प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में डबल इंजन की सरकार के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में राज्य की काफी अफसरशाही बेलगाम और हिटलरशाही अंदाज में कामकाज करती रही जिसके चलते राज्य के अन्दर भाजपा सरकार को लेकर आवाम के मन में एक बडी नाराजगी का जन्म हो चुका था लेकिन भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड का गोपनीय सर्वे कराकर खटीमा से युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें सत्ता सौंप दी थी। साढे चार साल में जिस अफसरशाही के बेलगाम होने का आरोप सरकार के ही कुछ मंत्री व विधायक लगाते थे उस अफसरशाही को पुष्कर सिंह धामी ने अपनी स्वच्छ शासन चलाने की शैली से सुधार दिया था और यही कारण था कि चंद अफसरों की आंखों मे ंपुष्कर ंिसह धामी खटकने लगे थे और उन्हें इस बात का भय था कि अगर राज्य में दुबारा भाजपा की सरकार बनी और मुख्यमंत्री की कमान धामी को मिली तो वह उस अंदाज में कामकाज नहीं कर पायेंगे जो वह भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में करते आ रहे थे?
उल्लेखनीय है कि राज्य बनने के बाद से ही भाजपा व कांग्रेस शासनकाल में सत्ता के ही चंद मंत्री व विधायक इस बात के लिए आग बबूला रहते थे कि अफसरशाही के बेलगाम होने के कारण वह अपने इलाके का विकास नहीं कर पाते? भाजपा की डबल इंजन सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के राजकाज में तो कुछ मंत्री व विधायक बार-बार यह आरोप लगाते थे कि राज्य में सरकार की चुप्पी के चलते अफसरशाही बेलगाम हो रखी है लेकिन कभी भी बेलगाम अफसरशाही पर न तो त्रिवेन्द्र सिंह रावत नकेल लगा पाये और नही पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत। उत्तराखण्ड के अन्दर डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में लगातार सोशल मीडिया पर आवाज उठती रही कि सत्ता हिटलरशाही और तानाशाही से चलाई जा रही है जिसका खामियाजा 2०22 में भाजपा को भुगतना पडेगा? भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड का मन पढने के बाद पुष्कर सिंह धामी को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया और उन्होंने अपने अल्प कार्यकाल में जिस तरह से एक के बाद एक धाकड फैसले लेकर कुछ अफसरों को सरकार का भौकाल दिखाया उससे प्रदेश के चंद अफसर पुष्कर सिंह धामी की सत्ता चलाने के स्टाइल से भयभीत हो गये और उनके मन में इस बात को लेकर भय बना कि अगर 2०22 में पुष्कर सिंह धामी फिर सत्ता में लौटकर मुख्यमंत्री बने तो उनकी हिटलरशाही पर ब्रेक लग जायेगा? चर्चाओं का बाजार गर्म है कि ऐसे ही चंद अफसरों ने पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ राज्य में काम किया और कांग्रेस के कुछ नेताओं के पक्ष में उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर उनके सारथी बने वह यह साबित कर गया कि पुष्कर सिंह धामी राज्य के अन्दर स्वच्छता से शासन चलाने का दम पाले हुये थे।
