मोदी मैजिक ने उड़ा दी कांग्रेस की नींद

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव के बाद से भले ही भाजपा के कुछ प्रत्याशी दहाड़ लगा रहे हों कि उनके साथ पार्टी के ही कुछ नेताओं ने भीतरघात किया है लेकिन जिस तरह से राज्य की अधिकांश विधानसभा सीटों पर महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरूषों से अधिक रहा है वह भाजपा के लिए बडा वरदान भी साबित हो सकता है। चुनाव के आखिरी दौर में नरेन्द्र मोदी ने लगातार तीन रैलियां करके आवाम के मन में अपना पुराना करिश्मा फिर जागृत कर दिया था क्योंकि जिस तरह से भाजपा छोड कांग्रेस में गये हरक सिंह रावत ने स्वीकारा है कि मोदी के नाम पर मतदान हुआ है तो फिर इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर राज्य में विधानसभा चुनाव के अन्दर मोदी मैजिक रहा तो फिर कांग्रेस कैसे राज्य में सरकार बनाने के दावे करती आ रही है? चुनाव परिणाम का आईना दस मार्च को ही साफ दिखाई देगा लेकिन इससे पूर्व कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिस तरह से प्रदेश में 45 सीटें आने की बात कही है और राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने व खुद को मुख्यमंत्री बनाये जाने को दम भरा है उससे सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार हरीश रावत के पास ऐसा कौन सा जादुई चिराग है जिसे घिसकर उन्हें यह आभास हो गया कि राज्य में कांग्रेस को 45 सीटें मिल रही है और वह सरकार बनाने जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस बात का इल्म जरूर होगा कि उनके साथ चुनाव में भीतरघात का खेल हो सकता है लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने राज्य के अन्दर सभी प्रत्याशियों को जिताने के लिए रात-दिन एक कर दिया और उन्होंने चुनाव के दौरान जिस तरह से ऑल रॉउडर खिलाडी की तर्ज पर हर गेंद पर चौके-छक्के मारने का हौसला दिखाया उससे कांग्रेस से लेकर भाजपा के ही कुछ बडे नेताओं के माथे पर पसीनें आते रहे और भाजपा के कुछ बडे नेता जो खुद को राज्य का मुख्यमंत्री बनाये जाने की चाहत में रात-दिन लगे रहते थे उनका एक ही गोपनीय मिशन था कि किसी तरह से खटीमा विधानसभा सीट पर भीतरघात कर पुष्कर सिंह धामी को हार दिला दी जाये? हालांकि पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी उनके लिए आवाम के बीच सारथी बनकर उभरी और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रूद्रपुर की रैली में लगभग दस बार पुष्कर ंिसह धामी की सत्ता चलाने को लेकर जमकर तारीफ की उसी के चलते खटीमा के लोगों के मन में यह बात समा गई कि अब पुष्कर ंिसह धामी विधायक नहीं एक मुख्यमंत्री हैं और अगर वह चुनाव जितेंगे तो वह मुख्यमंत्री की तरह इलाके का बडा विकास कर देंगे इसलिए यह साफ नजर आ रहा है कि खटीमा में पुष्कर सिंह धामी को जीत का आशीर्वाद इलाके की जनता ने जरूर दिया है इसलिए भाजपा के चंद भीतरघातियों को इस बात का भी इल्म होना चाहिए कि उन पर भाजपा हाईकमान की नजर है और चुनाव परिणाम के बाद ऐसे भीतरघातियों के राजनीतिक जीवन पर एक बडा ग्रहण भी लग सकता है?
गौरतलब है कि राज्य में पाँचवी विधानसभा के नतीजे आने पर लगभग एक पखवाडा ही शेष बचा है। इस बार मतदाता मौन है। राज्य में हुए कम मतदान पर सियासी समीकरण कुछ भी हो सकते है,लेकिन भाजपा के लिए सुखद है कि महिलाओं ने मोदी के नाम पर जबरदस्त मतदान किया है। सूबे की जनता भाजपा से नही लेकिन भाजपा के विधायकों से नाराज रही है। इस बार मोदी की लहर दौड पडी तो बहुत से नेताओं का भाग्य उदय भी हो गया। कुछ सीटों पर मुकाबला रोचक होने जा रहा है। यदि राज्य में युवा पुष्कर सिह धामी को पुन: सत्ता सौपी जाती है तो उन्हें पहले ही दिन से अपने खिलाडियों को कठोर अनुशासन में कसना पडेगा ताकि 2०24 के लोकसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर अपने वर्चस्व को कायम रख पाने में सफल हो सके। इस मर्तबा तो मोदी की श्रीनगर, अल्मोड़ा व दून में हुई रैलियों ने भाजपा की इज्जत बचा ली है लेकिन यही व्यवहार बना रहा तो राज्य से दिल्ली का रास्ता अलग हो सकता है। इस पर भी युवा पुष्कर सिह धामी को मनन करना होगा। राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन का कार्य तीव्रता से चल रहा है लेकिन जो प्रभावित है उनके आजीविका के लिए सरकार को सोचना होगा ताकि 2०24 का रास्ता सुगम हो सके। अभी तक सबसे ज्यादा नाराजगी विधायकों से जनता की इसी पर रही है। कांग्रेस के मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे माने जाने वाले हरदा ने नतीजे आने के पहले ही ईवीएम पर सवाल खड़े कर दिए जो उनकी हार को प्रदर्शित करती है।

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