ईवीएम पहनायेगी जीत का ताज

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किरन शर्मा
देहरादून। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव में इस बार मतदाता बिलकुल खामोश दिखाई दिया और उसके चेहरे से यह तक नहीं झलका कि वह किस राजनीतिक पार्टी को अपना मत देने के लिए आगे आयेगा। मतदाताओं की खामोशी से यह बात तो साफ हो गई कि किसी भी प्रत्याशी के लिए मीडिया व सोशल मीडिया पर भले ही कोई भी दुष्प्रचार व राजनीतिक आक्रमण किया गया हो उसको देखते हुए मतदाताओं ने अपनी राय को उसी मुकाम पर रखा जो उसने पिछले कुछ माह से राजनीतिक दलों के लिए बना रखी थी। मतदाताओं की खामोशी को देखते हुए कोई भी राजनीतिक दल यह दावा नहीं कर सकता कि उसे चुनाव में कितनी सीटें मिल रही हैं? आज का मतदान मतदाताओं की खामोशी के बाद ईवीएम तो कैद हो गया लेकिन दस मार्च को ईवीएम खुलने केे बाद ही तय होगा कि सत्ता की चाबी किस राजनीतिक दल के हाथों में आयेगी?
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की जनता ने इस बार कुछ माह पहले से ही अपना इरादा बना लिया था कि उसे किस राजनीतिक दल को अपना मत देना है। राज्य की जनता ने यह भी मन शुरूआती दौर में बना लिया था कि वह भाजपा और कांग्रेस में से ही किसी एक राजनीतिक दल को अपना मत देगी और राज्य में उक्रांद, आप, सपा, बसपा का मतदाताओं के बीच कोई भौकाल मतदान के दौरान दिखाई नहीं दिया। हालांकि उक्रांद व बसपा के अलावा चंद निर्दलीय प्रत्याशी भी चंद सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं लेकिन सत्ता की चाबी सिर्फ भाजपा व कांग्रेस में से ही एक ही राजनीतिक दल के पास रहनी तय मानी जा रही है। चुनाव से कुछ दिन पूर्व एकाएक कांग्रेस व भाजपा के कुछ प्रत्याशियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर जबरदस्त राजनीतिक आक्रमण किया गया। वहीं खटीमा में प्रदेश के मुख्यमंत्री को कथित रूप से पैसा बांटने के मामले में उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया लेकिन सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के खिलाफ यह ट्रोल मतदाताओं के मन में पुष्कर ंिसह धामी को लेकर कोई नफरत पैदा कर गया हो ऐसा तिनकाभर भी दिखाई नहीं दिया। वहीं एक स्टिंग मास्टर जो कि पूर्व में स्टिंग करने का बडा खिलाडी माना जाता है उसने खटीमा से कांग्रेस प्रत्याशी भुवन कापडी का एक स्टिंग पैसों को लेकर किया लेकिन इस स्टिंगबाज का यह स्टिंग चुनाव में कोई करिश्मा करेगा इसका तिनकाभर भी असर होता हुआ नहीं दिखाई दिया। पुष्कर सिंह धामी ने अपने इलाके में चप्पे-चप्पे पर प्रचार कर आवाम को भरोसा दिलाया कि राज्य में अगर भाजपा की सरकार आई तो खटीमा का विकास अभूतपूर्व किया जायेगा। कांग्रेस व भाजपा के बहुत उम्मीदवारों की विधानसभाओं में उन्हीं के पार्टी के कार्यकर्ता अपने ही प्रत्याशी के खिलाफ भीतरघात का खेल खेलने में जुटे हुये थे जिससे कई विधानसभाओं में किस दल का उम्मीदवार चुनाव जीतेगा इसको लेकर एक रहस्य ही बना हुआ है लेकिन यह भी सच है कि राज्य की कई विधानसभा सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवारों को उन्हीं की पार्टी के वो नेता हरवाने के मिशन में लगे हुये थे जो खुद पार्टी का उम्मीदवार बनने की कतार में आगे खडे हुये थे। कुल मिलाकर कहा जाये तो यह चुनाव सिर्फ भाजपा व कांग्रेस के बीच ही सिमट कर रह गया और यह भी सच है कि जिस राजनीतिक दल के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी के ज्यादा उम्मीदवारों के साथ अगर भीतरघात किया तो उस दल की सत्ता में एंट्री नहीं हो पायेगी इसलिए अब दस मार्च को ही ईवीएम के खुलने पर राज खुलेगा कि किस राजनीतिक दल के हाथों में सत्ता की चाबी होगी।

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