पुष्कर जीत के रास्ते पर बढ़ा रहे कदम

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को जब भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी तो उन्हें विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा की सत्ता की वापसी का उनसे वचन लिया। भाजपा हाईकमान ने पुष्कर पर भरोसा करते हुए उन्हें राज्य में फ्री-हैंड फैसले लेने का अधिकार दिया तो पुष्कर सिंह धामी ने राज्यहित में एक के बाद एक बडे-बडे फैसले लेकर विपक्षी पार्टियों की नींद उडाकर रख दी थी और उन्हीं में जज्बा था कि उन्होंने पार्टी से बार-बार रूठने वाले शेर-ए-गढवाल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाकर यह साबित कर दिया था कि वह दबाव की राजनीति सहने वाले नहीं है चाहे उनकी कुर्सी रहे या न रहे? पुष्कर सिंह धामी के इकबाल से ही आज भाजपा मात्र छह माह के भीतर राज्य में इतनी पावरफुल बन गई है कि सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी राज्य में सरकार बनाने का खुले मंच से दावा कर रहे हैं और अपनी विधानसभा सीट को आवाम के भरोसे छोडकर सभी विधानसभा में चुनाव लड रहे प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार करने में आगे आ रखे हैं।
युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी बेशक अपनी विधानसभा में पूरा समय नही दे पा रहे है लेकिन अपने सख्त फैसलों की बदौलत वे आज भी पहले पायदान पर खडे है। युवाओं की पसंद वाले धामी ने वो कर दिखाया जो राजनीति के चाणक्य हरदा भी नही कर पा रहे थे। गढवाले-ए-शेर को कैसे चलता किया,किसी विरोधी ने भी सपने में भी नही सोचा होगा। राज्य पाँचवी बार चुनावों में है लेकिन कोविड के चलते चुनाव प्रचार में भारी कमी है। इस बार भाजपा के संकट मोचक यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियां भी नही हो पा रही है। प्रधानमंत्री मोदी का ही जादू था कि 2००2, 2००7 और 2०12 के तीन विधानसभा चुनावों में भाजपा-कांग्रेस के बीच करीब 32 फीसदी से 34 फीसदी वोट प्रतिशत के साथ साथ हार जीत होती रही,लेकिन 2०17 में 46: बनाम 34: के तौर पर करीब 11-12: तक रह गया। मोदी सूनामी की चुनावी लड़ाई में 31-32 सीटों से बढकर 57-11 सीटों के अंतर तक पहुँचा दिया था। 2०17 में भाजपा के पक्ष में राज्य में लहर पैदा हुई थी क्योंकि मोदी की बडी बडी रैलियों ने गढवाल संसदीय क्षेत्र की 12 सीटों में से 11 पर विजयी पताका फहराई, देहरादून, हरिद्वार, श्रीनगर, पिथौरागढ़ से लेकर रुद्रपुर यानी पाँचों लोकसभा क्षेत्रों में ताबड़तोड़ पांच रैलियां कर कांग्रेस के खिलाफ बनी सत्ता विरोधी लहर का भरपूर सियासी फायदा भी भाजपा ने उठाया था, लेकिन अब बाजी पलटती दिख रही है क्योंकि हालात बदल चुके हैं। 2०17 के सत्ता संग्राम के मुकाबले 2०22 बैटल में सियासी संग्राम पूरी तरह बदला हुआ है। आज न जनमत भाजपा के पक्ष में और न ही सत्रह वाली मोदी लहर है और न ही डबल इंजन सरकार,इसके बाद भी युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी ने बहुत सटीक बैटिग व फिल्लिडग की बदौलत भाजपा की पुन: वापसी की राह बुनी है। युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी का ही राजनीतिक साहस तब दिखाई दिया जब गढवाल संसदीय क्षेत्र के बडे ठाकुर नेता हरक सिंह रावत को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा कर जनता को अपने पक्ष में ला खडा किया।

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