खाकी के लॉयन अभिनव को मिला राष्ट्रपति पदक

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उत्तराखण्ड के आईपीएस अभिनव कुमार ने पुलिस महकमें में रहते हुये तो कुख्यात अपराधियों को अपने डर का एहसास कराकर उन्हें इस बात का हमेशा इल्म कराया था कि अगर उनके क्षेत्र में किसी भी कुख्यात ने अपराध करने का दुसाहस किया तो उसका हश्र उसे पता चल जायेगा यही कारण था कि जब भी हरिद्वार में किसी अपराधी ने अपराध किया तो उसे पुलिस कप्तान ने यह आभास करा दिया कि उसने किसके जिले में अपराध करने का दुसाहस किया है। कश्मीर के श्रीनगर में हमेशा आतंकियों का डर सुरक्षा बलों के मन में बना रहता था लेकिन जब अभिनव कुमार की तैनाती बीएसएफ में आईजी के रूप में श्रीनगर के अन्दर हुई तो हमेशा शेर की तरह देश के दुश्मनों के खिलाफ दहाडऩे वाले अभिनव कुमार ने श्रीनगर के अन्दर आतंकियों को गीदड़ की तरह दौड़ा कर जिस तरह से सबक सिखाने का अपने कार्यकाल में भौकाल दिखाया उसकी गूंज हमेशा समूचे कश्मीर में सुनाई देती रही। अभिनव कुमार एक ऐसे अफसर हैं जब उनकी प्रतिनियुक्ति खत्म हुई और उन्हें दुबारा किसी राज्य में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए पूछा गया तो उन्होंने दूसरी बार भी श्रीनगर में अपनी तैनाती करने का खुद आग्रह किया था। ऐसे शेर कहे जाने वाले अफसर देश के अन्दर बहुत कम ही दिखाई देते हैं जो सिर्फ अपनी वर्दी की आन-बान-शान के लिए वर्दी को धारण किये हुये हैं। फिल्मों में जिस तरह से ईमानदार अफसरों की छवि को प्रस्तुत किया जाता है वैसी छवि उत्तराखण्ड की धरती पर हमेशा अभिनव कुमार की देखी जाती है और वह ऐसे आईपीएस हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल में किसी भी बडे राजनेता के गलत आदेश को मानने से साफ इंकार किया और यह दिखाया कि वह वर्दी पहनने के दौरान जो कसम खाकर आये थे उसे वह एक कुर्सी के लालच में कभी नहीं तोड़ सकते।
देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखण्ड पुलिस में आईपीएस अभिनव कुमार को एक शेर के रूप में जाना जाता है और उन्होंने अपने कार्यकाल में कभी भी जिले की कमान लेने के लिए किसी भी राजनेता की परिक्रमा नहीं की और अपने सख्त अंदाज से उन्होंने जिस तरह पुलिस महकमें में अपनी एक छवि बनाई उससे पुलिस महकमें के लोग भी यह कहने से कभी नहीं चूकते कि अभिनव कुमार उत्तराखण्ड पुलिस की शान हैं। अभिनव ने अपने पुलिस कप्तान के कार्यकाल में जिस तरह से कुख्यात अपराधियों को दिन में तारे दिखाये वह किसी से छिपा नहीं है और देश की कुछ जेलों में बंद चंद कुख्यात आज भी अभिनव कुमार का नाम सुनते ही कांपते हैं। अपराधियों पर हमेशा शिकंजा कसने वाले अभिनव कुमार आज उत्तराखण्ड में अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन के पद पर तैनात हैं और उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा गणतंत्र दिवस 2०22 के अवसर पर विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक देने की घोषणा की गई है। उत्तराखण्ड पुलिस की शान अभिनव कुमार को राष्ट्रपति का पुलिस पदक दिये जाने की घोषणा पर पुलिस महकमें में एक खुशी की लहर देखी जा रही है। उत्तराखण्ड के आईपीएस अभिनव कुमार ने जब हरिद्वार जिले की कमान संभाली थी तो उन्होंने धर्मनगरी को अपराधमुक्त करने के लिए एक बडा ऑपरेशन चलाया और इस ऑपरेशन में हरिद्वार जनपद में एक दर्जन से अधिक बडे कुख्यात ईनामी बदमाशों को पुलिस ने मुठभेड में ढेर कर दिया था। अभिनव के कार्यकाल में देहरादून में झब्बालाल एंड सन्स के यहां डकैती डालने वाला कुख्यात अंग्रेज सिंह जब हरिद्वार जेल में बंद था तो पेशी पर जाने के दौरान वह अपने साथियों के साथ भाग खडा हुआ था तो अभिनव कुमार ने संकल्प लिया था कि जब तक अंग्रेज सिंह को वह जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा देंगे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। अभिनव कुमार ने अंग्रेज सिंह को पाताल से भी खोज निकालने का ऑपरेशन खुद अपने हाथों में लिया और अपने एसओजी प्रभारी आरबी चमोला को देश के कोने-कोने में अंग्रेज सिंह को तलाशने का ऑपरेशन सौंपा और एक बाहरी राज्य में आखिरकार अंग्रेज सिंह व एसओजी टीम के बीच मुठभेड हुई और अंग्रेज सिंह मारा गया था। इतना ही नहीं दिल्ली, उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड में आतंक का प्रयाय बने सुनील राठी को भी अभिनव कुमार ने अपने पुलिस कप्तान होने का खुलकर आभास कराया था और अभिनव के डर से सुनील राठी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था कि अभिनव कुमार उन्हें मुठभेड में मरवा सकते हैं। उत्तराखण्ड पुलिस में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवाने वाले अभिनव कुमार प्रतिनियुक्ति पर जब बीएसएफ में तैनात होने के बाद श्रीनगर गये तो वहां उन्होंने आतंकियो ंके खिलाफ बडे मोर्चे पर ऑपरेशन चलाये और वहां भी शेर की तरह उन्होंने आतंकियों को गीदड की तरह दौडाया। उत्तराखण्ड में अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन के पद पर तैनात अभिनव कुमार को राष्ट्रपति का पुलिस पदक देने की घोषणा हुई तो उससे पुलिस महकमें में एक बडी खुशी की लहर दौड गई।

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