भीतरघात से फिसलेगी सत्ता

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कांग्रेस-भाजपा में जहां बडा भीतरघात हुआ वह काटेगी वनवास
पुष्कर धामी की टीमें हर जिले पर रखेंगी गोपनीय नजर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि जब भी किसी राजनीतिक दल के नेताओं ने अपनी ही पार्टी के अन्दर भीतरघात का खेल खेला तो उस दल की सत्ता में ताजपोशी नहीं हो पाई। स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी ने पांच साल सत्ता चलाई और उसके बाद पार्टी के ही अन्दर भीतरघात का तांडव मचा और भाजपा को सत्ता सुख मिला था। वहीं भगतसिंह कोश्यारी, भुवन चन्द खण्डूरी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव हुये लेकिन इन दोनो बडे राजनेताओं के कार्यकाल में भी सत्ता मोह में फंसे कुछ बडे नेताओं ने अपनी ही पार्टी को हरवाने के लिए जो चक्रव्यूह रचा था उसी से भाजपा को हार का सामना करना पडा था। वहीं हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के बाद जब राज्य में विधानसभा चुनाव हुये तो पार्टी के अन्दर बडे-बडे कुछ दिग्गजों ने हरदा की वापसी का रास्ता बंद कर पार्टी को हार के दोराहे पर खडा किया था। अब छह माह से पुष्कर सिंह धामी राज्य की सत्ता संभालने के लिए आगे आये और उन्होंने अपने अल्प कार्यकाल में राज्य के अन्दर जिस तरह से भाजपा के पक्ष में एक बडा माहौल तैयार किया वह पार्टी के ही कुछ दिग्गज नेताओं को अखर रहा है जिसको देखते हुए यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस या बीजेपी में जहां भी पार्टी नेताओं ने बडा भीतरघात करने की साजिश रची वह राजनीतिक दल पांच साल के लिए सत्ता का वनवास काटेगा। वहीं पुष्कर सिंह धामी ने एक बडी रणनीति के तहत हर जिले मंे अपनी गोपनीय टीमें तैयार करने का खाका तैयार किया है जिससे कि पार्टी का कोई नेता भीतरघात का ताना-बाना न बुन सके और एक बार फिर राज्य में भाजपा की सरकार बन सके?
उल्लेखनीय है कि इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला होने का डंका पीटा जा रहा है। जहां भाजपा विधानसभा चुनाव मंे अबकी बार साठ पार का नारा दे रही है वहीं कांग्रेस भाजपा पर प्रहार करते हुए दम भर रही है कि भाजपा इस बार 06 पर आकर टिकेगी। विधानसभा चुनाव में टिकट बटवारे को लेकर भाजपा ने मंथन किया और कई दिन पहले अपने 59 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। हालांकि भाजपा ने अपने दस सिटिंग विधायकों की टिकट काटी है लेकिन भाजपा के कुछ उम्मीदवार ऐसे नजर आ रहे हैं जिनके खिलाफ उनकी विधानसभा क्षेत्र में जनता उनसे बेहद खफा है और वह इस बार जीत का सेहरा अपने सिर पर बंधवा पायेंगे इसमें पूरी शंका दिखाई दे रही है? हालांकि काफी समय से यह बात उभर रही थी कि राजधानी में दो सिटिंग विधायकों की टिकट कटनी तय है क्योंकि उनके क्षेत्र में जनता उनसे बेहद नाराज है लेकिन उसके बावजूद भी उनके टिकट न कटना काफी हैरान करने जैसा दिखाई दिया? चुनावी रणभूमि में अकेले पुष्कर सिंह धामी कांग्रेस से मोर्चा लेते हुए दिखाई दे रहे हैं और कांग्रेस के हर वार का वह ही जवाब दे रहे हैं जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से लेकर उत्तराखण्ड के पांचो सांसद चुनावी रणभूमि में उस जोश के साथ दिखाई नहीं दे रहे हैं जिस जोश के साथ पार्टी दावा कर रही है कि इस बार भाजपा 60 के पार। चर्चाएं यह भी हैं कि पुष्कर सिंह धामी को भी इस बात की कहीं न कहीं शंका जरूर होगी कि पार्टी के कुछ नेता भीतरघात का ताना-बाना बुनकर भाजपा की सत्ता में वापसी पर बडा ग्रहण पर्दे के पीछे से रहकर लगा सकते हैं?
यही कारण है कि पुष्कर ंिसह धामी ने हर जिले में सम्भवतः अपनी गोपनीय टीमें तैनात करने का खाका बनाकर पार्टी नेताओं पर नजर रखने के लिए तैयार किया है जिससे कि भाजपा के साथ कोई भीतरघात का खेल न खेल सके? वहीं कांग्रेस में जिस तरह से हरीश रावत, प्रीतम सिंह, रणजीत रावत समेत कुछ बडे नेता आपस में ही छत्तीस का आंकडा रखे हुये हैं उससे कांग्रेस में भी भीतरघात का तांडव विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है? हालांकि कांग्रेस के दिग्गज दावा कर रहे हैं कि पार्टी एक साथ मिलकर चुनाव लडेगी लेकिन हरक सिंह रावत को पार्टी में शामिल कराने को लेकर जिस तरह से हरीश रावत व पार्टी के कुछ नेताओं के बीच आपसी खीचतान चली उससे पार्टी के अन्दर कुछ नेता आपस में ही एक दूसरे को कमजोर करने का ताना-बाना बुन सकते हैं? कुल मिलाकर कहा जाये तो इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है लेकिन यह भी सच है कि अगर दोनो दलों में से किसी एक दल के नेताओं ने अपनों को हरवाने में बडा भीतरघात किया तो उस दल को पांच साल का वनवास काटना पडेगा यह तय है?

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