निडर होकर मैदान में डटे धामी

0
120

संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड में पिछले छह माह से प्रदेश की सत्ता चलाने वाले पुष्कर सिंह धामी ने साफ संदेश दिया था कि वह राज्य हित में काम करेंगें चाहे उन्हें चंद समय में ही अपनी कुर्सी क्यों न त्यागनी पडे। धामी ने अपनी धमक दिखाते हुए जिस तरह से मात्र छह माह के भीतर ही राज्य में अपना इकबाल बुलंद कर राज्य वासियों का दिल जितने का जिगर दिखाया उसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पुष्कर सिंह धामी को अपना सखा कहा और साफ संदेश दिया कि वह पारदर्शिता के साथ सत्ता चलायें विधानसभा चुनाव में वह उनके सारथी बनकर साथ खड़े होंगें।
यही कारण है कि पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में एक के बाद एक धाकड फैसले दिये और साफ संदेश दिया कि वह डर कर राजनीति नहीं करेंगें। धामी का ही हौसला था कि उन्होंने उत्तराखंड में अपने आपको कददावर नेता समझने वाले हरक सिंह रावत की उस मांग को एक सिरे से खारिज कर दिया जिसके लिए वह आये दिन पुष्कर सरकार को रूठ कर दिखा रहे थे और अपने व पुत्रवधु के लिए टिकट की मांग कर रहे थे।
युवा चेहरा पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के अंदर मात्र छह माह के भीतर ही अपने आपको एक कुशल राजनीतिज्ञ साबित कर पायेंगें इसको लेकर राज्यवासियों के मन में एक बडी शंका देखने को मिलती थी लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने अपनी धुंआधार राजनीतिक पारी से जिस तरह देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खुलकर आशीर्वाद हासिल किया और उसी के बाद से वह फ्री हैंड राजनीति करने लगे और उन्होंने अपने अल्प कार्यकाल में जिस तरह से बडे बडे फैसले लेकर सबको हैरान किया उससे पुष्कर का राजनीतिक कद ऊंचा होता चला गया। पुष्कर सिंह धामी को बार बार यह भय दिखाया गया कि पार्टी के कुछ विधायक कांग्रेस में जा रहे है लेकिन इन धमकियों से पुष्कर पर कोई फर्क नहीं पडा और उनका साफ कहना था कि राज्य में डर कर राजनीति नहीं करेंगें चाहे उनका राजनैतिक भविष्य क्यों न दांव पर लग जाये।

LEAVE A REPLY