उत्तराखण्ड के नायक बने दिल अजीज धामी

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पुष्कर की सत्ता चलाने के अंदाज पर मोदी भी फिदा
राज्यवासियों के दिलों पर सीएम का दिख रहा जादू
किरन शर्मा
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी राज्य की जनता के मन में इस कदर उतर चुके हैं कि हर तरफ उनकी तारीफों के कसीदे पढे जा रहे हैं और यह बात उठ रही है कि अगर पुष्कर ंिसह धामी को पांच साल पहले राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया होता तो आज राज्य की कायाकल्प ही बदली हुई होती। लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले पुष्कर ंिसह धामी ने जिस तरह से हर इंसान को गले लगाने के लिए अपनी दरियादिली दिखाई है उससे आवाम उनकी कायल होती जा रही है। चुनावी रणभूमि में पुष्कर सिंह धामी अकेले सबसे बडे योद्धा के रूप में दिखाई दे रहे हैं और महाभारत की तरह पुष्कर सिंह धामी का चुनावी रण जीतने के लिए उनके साथ नरेन्द्र मोदी भगवान श्रीकृष्ण की तरह खडे हुए दिखाई दे रहे हैं और यही कारण है कि प्रधानमंत्री के बताये रास्ते पर चलते हुए पुष्कर सिंह धामी आगे बढते जा रहे हैं और उन्होंने मात्र चार माह के भीतर राज्य के अन्दर जो करिश्मा करके दिखाया है वह किसी से छुपा नहीं है और अब तो पुष्कर सिंह धामी को आवाम करिश्माई पुष्कर के नाम से पुकारने लगे हैं और उनके मन में एक ही आशा की किरण है कि ऐसे मुख्यमंत्री को कम से कम दस साल और सत्ता चलाने के लिए दिये जाये तो वह इस राज्य को भ्रष्टाचार, अपराध, माफिया मुक्त प्रदेश बना देंगे। पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ साजिशों का दौर भी कुछ अपने करने लगे हैं लेकिन नरेन्द्र मोदी का बडा साथ मिलने के कारण पुष्कर सिंह धामी ऐसे विभिषणों को नजरअंदाज कर रहे हैं जो उन्हें सत्ता से दूर रखना चाह रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के एक बडे नायक के रूप में जिस तरह से दिल अजीज बन चुके हैं और उनकी सत्ता चलाने के अंदाज पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी फिदा होकर उन्हें अपना सखा बना चुके हैं तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुष्कर सिंह धामी में दरियादिली का कितना बडा जादू है कि उसके चलते उन्होंने संसार मंे ताकतवर दिखाई दे रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी अपना अजीज बना लिया है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड के बीच इक्कीस सालांे से परिसम्पत्तियों का बटवारा नहीं हुआ था लेकिन अपना एक बडा विजन लेकर पुष्कर सिंह धामी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वार पहुंचे तो बडे व छोटे भाई ने एक बडी लकीर खींचते हुए परिसम्पत्तियों का बटवारा चंद घंटों में ही कर दिया जो इक्कीस साल से अटका पडा हुआ था। इस कार्य को अंजाम देने के साथ ही सीएम धामी ने अपना नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज करा लिया है। धामी ने जब से पहाड़ी राज्य की कमान अपने हाथों में संभाली है तभी से उनका मुख्य फोकस प्रदेश के विकास पर ही रहा है। उत्तराखण्ड के विकास के प्रति उनकी साकारात्मक सोच ने जहां पार्टी हाईकमान के दिग्गज नेताओं को उनका मुरीद बना दिया हैं, वहीं उनके विरोधियों की नींद इस बात को लेकर उड़ी हुई है कि आखिर वह धामी सरकार को घेरे तो किस मुद्दे पर? कुछ माह पश्चात ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है। यहां यह कहना गलत नहीं होगा सीएम धामी का विकास मॉडल आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत की पटकथा को लिख रहा है। 21 वर्ष के युवा राज्य उत्तराखण्ड को पहली बार एक युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रूप में मिला है। जैसे कि उत्तराखण्ड की जनता को अपेक्षा थी कि एक युवा शासक ही प्रदेश को विकास की बुलंदियों तक पंहुचा सकता है। इसी अपेक्षा को साकार करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिन रात लगे हुए है। उनकी कलात्मक कार्यशैली ने उन्हें हरदिल अजीज बना दिया है। बता दें कि राज्य में एक बार फिर चुनावी बेला आने वाली है और भाजपा हाईकमान की उत्तराखण्ड के प्रति बढ़ती राजनीतिक सक्रियता इस ओर इशारा कर रही है कि भाजपा हाईकमान उत्तराखण्ड में इतिहास का रचते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने का मन बना चुकी है और इस इतिहास को रचने के लिए उन्हें पूर्व में की गई गलतियों से सबक लेते हुए भीतरघातियों को भी परखना होगा। चर्चाओं का बाजार गर्म हो चला है कि भीतरघातियों को परखने के लिए खुफिया नजरें तैनात हो चुकी है। वैसे अब चर्चाओं का बाजार इस बात को लेकर भी गर्म हो चुका है कि सीएम धामी का व्यक्तित्व लोंगों की नजर में इतना प्रभावी हो चुका है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा उनके नाम से भी अपना वोट बैंक बढ़ा सकती है? वैसे तो अपने अल्प कार्यकाल में सीएम धामी ने कई उल्लेखनीय कार्य किए है लेकिन जिस कार्य की चर्चा इन दिनों तेजी के साथ हो रही है वह है राज्य निर्माण के समय से चला आ रहा, 21 वर्ष पुराना उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के मध्य का परिसंपतित्यों का मुद्दा। इस मुद्दे का समाधान दोनो ही राज्य के मुख्यमंत्रियों ने बड़ी ही सरलता के साथ एक दूसरे पर विश्वास जताते हुए निकाल दिया। परिसंपत्तियों के समाधान से जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर का सियासी मजबूती प्राप्त हुई है, वहीं राज्य में भाजपा के वर्चच्व को भी एक पॉजिटिव पुश मिला है। विपक्ष के लोग भले ही इस प्रदेश सरकार की सियासी हार के रूप में देख रहे है और दिखा रहे है लेकिन जानकारों की माने तो यह धामी सरकार का उत्तराखण्ड के लिए एक मास्टरस्ट्रोक ही साबित होगा? पहली बार देखने में आ रहा है कि किसी विधानसभा चुनाव से पूर्व किसी राजनीतिक दल के पक्ष में इतने साकारात्मक भाव देखने को मिल रहे है। भाजपा को विश्व की सबसे बड़ी पॉलीटिकल पार्टी कहा जाता है। यहीं कारण है कि चाहे चुनाव छोटे लेवल के हो या बड़े लेवल भाजपा के कार्यकर्ता सभी चुनावों को एक जंग की तरह लड़ते है और जीत हासिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। वहीं जब पार्टी के पास सीएम धामी जैसा सेनापति हो तो कार्यकर्ताओं में और भी ज्यादा जोश का संचार हो जाता है। उत्तराखण्ड का विकसित राज्य बनाने की दिशा में सीएम धामी ने जो उल्लेखनीय कार्य किए है, उनको देखते हुए जानकार अब यह कहने से नहीं चूक रहे कि धामी के विकास मॉडल ने आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत की पटकथा लिख दी है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चंद माह में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नजरों में नम्बर वन मुख्यमंत्री बन जायेंगे ऐसी कल्पना राज्य के किसी भी भाजपा नेता ने नहीं की थी लेकिन पुष्कर ंिसह धामी ने अपनी स्वच्छ त्रिदेव टीम के साथ जिस तरह से राज्य को स्वच्छ प्रशासन देने की दिशा में अपनी लम्बी छलांग लगाई है उससे राज्यवासियों का एक ही स्वर सुनाई दे रहा है कि पुष्कर फिर सत्ता संभालेंगे।

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