उत्तराखण्ड सत्ता की चाबी है गंगोत्री सीट

0
140

चंद्र प्रकाश बुड़ाकोटी
देहरादून। गंगोत्री से निकलने वाली मां गंगा देश के करोड़ो लोगो की तारणहार है, दूसरी ओर गंगोत्री से उतराखण्ड में सत्ता की गंगा भी बहती है। जिस पार्टी ने जीती गंगोत्री सीट उसी की बनती है सरकार यह मिथक सालो से बरकरार है। या यूं कहें कि गंगोत्री सीट ही सत्ता की चाबी है तो गलत नही होगा। दरअसल इक्कासी हजार मतदाताओं वाली उतराखण्ड के उतरकाशी जिले की गंगोत्री बिधान सभा सीट की बात करे तो यह एक ऐसी सीट है,जिस भी दल ने जीती उसी पार्टी की सरकार राज्य में बनती है। इस बार यह मिथक टूट पायेगा इस पर चर्चाएं जोर शोर से शुरू हो गई है। जहाँ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस अभी प्रत्याक्षी चयन में उलझी हुई है। दोनो दलों से दर्जनों नाम सामने आ रहे है। जबकि आम आदमी पार्टी ने कर्नल कोठियाल को सीएम प्रोजेक्ट कर गंगोत्री से चुनाव लड़वाने का दांव खेल बाजी मार ली है। गंगोत्री सीट की बात करे तो उतराखण्ड राज्य गठन के बाद पहला चुनाव दो हजार दो में हुआ। उस समय गंगोत्री सीट से कांग्रेस प्रत्यक्षी विजयपाल सजवाण ने जीत दर्ज की थी और सरकार कांग्रेस की बनी। वही दो हजार सात में इस सीट पर भाजपा के गोपाल रावत ने चुनाव जीता संयोग भाजपा की सरकार बनी। दो हजार बारह में हुए चुनाव में कांग्रेसी विजयपाल सजवाण चुनाव जीत कर आये और कांग्रेस सत्ता में आई। दो हजार सत्रह में भाजपा के गोपाल रावत पर गंगोत्री के लोगो मे बिश्वास जताया उनकी जीत के साथ ही भाजपा सत्ता में आ गई। कुछ माह पूर्व गोपाल रावत के निधन के बाद यह सीट खाली हुई है जिस पर उप चुनाव नही हुआ। अब दो हजार बाइस में राज्य में फिर से बिधान सभा चुनाव है गंगोत्री सीट को लेकर जो मिथक सालो से चला आ रहा है वह बरकार रहता है कि नही यह भविष्य के गर्त में है। जिस तरीके से देवस्थानम बोर्ड के विरोध में तीर्थ पुरोहित आक्रोशित है,और गंगोत्री में सबसे ज्यादा आक्रोश सरकार को झेलना पड़ रहा है। उससे साफ है कि इस बार गंगोत्री सीट पर चुनाव रोचक होगा।

LEAVE A REPLY