तीन साल से लापता बच्चे को परिजनों तक पहुड्डचाया

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अवनीश अग्निहोत्री
उत्तराखण्ड पुलिस की ऑपरेशन स्माइल टीम द्वारा एक बार फिर एक और बच्चे को उसके परिजनों से मिलाया गया, हैरानी की बात ये है कि इस बच्चे के अपहरण और तस्करी के आरोप राजस्थान पुलिस के दो पुलिसकर्मियों पर लगे थे साथ ही ये मामला राजस्थान विधानसभा में भी उठा था। उत्तराखण्ड पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार की पहल पर प्रदेश स्तर पर चलाये जा रहे ष्ऑपरेशन स्माईलष् के तहत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी पी रेणुका देवी द्वारा इस ऑपरेशन में लगातार लापता बच्चों को उनके परिवार तक पहुचाया जा रहा है। वही एंटी ह्यूमेन ट्रैफिकिंग यूनिट कोटद्वार की प्रभारी सुमनलता के प्रभार में ऑपरेशन स्माईल टीम जनपद पौड़ी गढ़वाल के उप निरीक्षक कृपाल सिंह व हमराह कांस्टेबल मुकेश कुमार के द्वारा श्री सत्य साई आश्रम देहरादून में जाकर संस्था के लेखाकार व काउंसलर अरुण कुमार कुकरेती के साथ दिव्यांग बालक गोपी पुत्र वंशीलाल निवासी बल्लभपूरा कोटा ग्रामीण, राजस्थान जो बालगृह में 19 जून को रेलवे स्टेशन देहरादून से चाइल्ड लाइन रेलवे द्वारा लावारिश में भर्ती किया था। इस बच्चे से प्यार से बातचीत की गई तो तो ये केवल कोटा-दादी-दादा जैसे शब्द का होंठ के इशारे से इस्तेमाल कर पा रहा था। बच्चे के परिजनों की तलाश के लिए बच्चे के फोटो को फेसबुक और व्हाटसअप पर पुलिस व अन्य सामाजिक संस्थाओं को भेजा गया तो कोई सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद बच्चे को आधार सेंटर लेजाकर इसके फिंगर प्रिंट लिवाये गए तो बालक का नाम गोपी पता उपरोक्त लिखा हुआ आया। तब संस्था के काउंसलर अरुण कुमार कुकरेती व उप निरीक्षक कृपाल सिंह के चेहरे पर एक सफलता की मुस्कान आयी। आधार कार्ड पर लिखे मोबाइल नम्बर पर बालक के परिजनों से बात की गई तो उधर से किसी खुशवीर सिंह ने बताया कि इस बालक को में नहीं जानता मेरे नम्बर किसी ने बालक के आधार कार्ड पर वैसे ही लिखवा दिया होगा। इसके बाद उप निरीक्षक कृपालसिंह के द्वारा कोटा सिटी के इंस्पेक्टर विनय शर्मा जी से बालक के परिजन की तलाश के लिए बात की गई तो बताया कि आप साइबर इंचार्ज प्रताप सिंह से बात कर लो तो तब प्रताप सिंह ने बताया कि जो बालक गोपी का फोटो आपने भेजा है इसको में जानता हुँ। इस बालक की तलाश के लिए मैंने बहुत काम किया था। जिसका गुम होने का मुकदमा भी स्थानीय थाना भीमगंजमंडी में दर्ज है। बच्चा तीन साल से गायब है। पुलिस द्वारा बताया गया कि बच्चे के परिजनों ने बच्चे का फोटो देखकर बच्चे को पहचान लिया है। बच्चे के परिजनों का फोटो द्वारा व्हाटसअप बच्चे को दिखाया गया तो उसने भी पहचानकर कर घर जाने के लिए खुशी का इजहार किया। इस बच्चे का राजस्थान पुलिस और इसके माता पिता को सौंपने के दौरान जब परिजनों से फिर से मिलन हो रहा था तो बच्चे की बूढ़ी माँ और पिता बच्चे के दूर से एक झलक देखते ही रोने लगे और बच्चे को दोनों ने अपने गले से लगा लिया। बालक के पिता ने रोते हुए बताया कि पिछले तीन साल से मैंने अपने बेटे को बहुत जगह तलाश किया था। जो हमको नहीं मिला। राजस्थान पुलिस के उपनिरीक्षक सुभाष चंद ने बताया कि इस बालक की गुमशुदगी का मामला राजस्थान विधान सभा में भी उठाया गया था। स्थानीय मीडिया से जानकारी मिली कि गोपी अपहरणकांड कोटा में इसलिए चर्चित रहा क्योकि कांग्रेस विधायक भरत सिंह ने ये मामला विधानसभा में उठाया था और भीमगंजमंडी थाने के तत्कालीन कॉन्स्टेबल शिवराज गोस्वामी और बलबीर पर बच्चे का अपहरण और तस्करी करने के आरोप लगाए थे।
इस बच्चे को राजस्थान पुलिस व उसके परिवार वालों के सुपुर्द करते हुए विदाई के दौरान संस्था के कर्मचारी भी काफी भावुक हो गए थे। बच्चे के परिजन और राजस्थान पुलिस की उत्तराखंड ऑपरेशन स्माईल पौड़ी गढ़वाल टीम द्वारा हर संभव मदद की गयी। उत्तराखंड पुलिस के इस कार्य के लिए बच्चे के परिजन व राजस्थान पुलिस और वहां की मीडिया के द्वारा भी काफी तारीफ की गयी।

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