मोदी के सपनों का बनाऊंगा उत्तराखण्ड

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राजेश शर्मा
देहरादून। उत्तराखण्ड को बीस सालों से ऐसी नजर लगी कि राज्य का कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री प्रदेश को पर्यटन, ऊर्जा, रोजगार, भ्रष्टाचार व घोटाले मुक्त की ओर अपने कदम आगे नहीं बड़ा पाया जिसका परिणाम यह देखने को मिलता रहा कि पांच साल बाद राज्य की जनता ने सत्ता चला रही सरकार को उखाड फेंका लेकिन फिर भी उसे वो राज्य नहीं मिल पाया जिसकी कल्पना राज्य निर्माण के दौरान आंदोलनकारियों ने की थी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे ज्यादा लगाव उत्तराखण्ड से है और वह बाबा केदारनाथ के धाम को समूचे विश्व में एक बडे तीर्थाटन के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बडे विजन के तहत आगे बढ़े हुये हैं और उन्होंने उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को अपने विजन से चार साल पहले ही रूबरू कराया था लेकिन त्रिवेन्द्र सिंह रावत मोदी के विजन को आगे बढाने के बजाए राज्य में राजशाही अंदाज में सत्ता चलाते रहे और यही कारण था कि त्रिवेन्द्र के सत्ता चलाने के अंदाज से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भाजपा के कुछ दिग्गज नेता खफा हुये और उन्होंने त्रिवेन्द्र से सत्ता लेकर उत्तराखण्ड के युवा विधायक के सिर पर अपना हाथ रखकर उन्हें सत्ता चलाने का गुरूमंत्र दिया और इस गुरूमंत्र को धारण कर पुष्कर आगे बढते चले गये और उन्होंने संकल्प लिया है कि वह देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों का उत्तराखण्ड बनायेंगे और अगर राज्य की जनता ने उन्हें अपना आर्शीवाद दिया तो वह उत्तारखण्ड को एक आर्दश राज्य बनाकर शहीद आन्दोलनकारियों को एक बडी श्रद्धांजलि देंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबसे देश की कमान संभाली है तब से उन्होंने किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को अपना सखा बनाने के लिए कभी भी कोई रूचि नहीं दिखाई और एक बडे विजन के तहत वह देश की सत्ता चला रहे हैं लेकिन यह भी साफ है कि उत्तराखण्ड से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बडा लगाव है और यह लगाव उस समय भी देखने को मिला था जब 2०13 में केदारनाथ में दैवीय आपदा आई थी तो उस समय के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी उत्तराखण्ड आये लेकिन उनका हैलीकाप्टर राजधानी में नहीं उतर पाया था जिस पर उन्होंने गुजरात से ही बडी सहायता राशि केदारनाथ के लिए भेजी थी और जब वह देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने केदारनाथ को एक भव्य रूप देने की दिशा में बडी पहल की और केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण के लिए हजारों करोड रूपये उत्तराखण्ड सरकार को दिये थे। त्रिवेन्द्र सिंह रावत अपने शासनकाल में नरेन्द्र मोदी के सपनों का केदारनाथ नहीं बना पाये लेकिन जैसे ही पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभाली तो उन्होंने सबसे पहला मिशन नरेन्द्र मोदी के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में केदारनाथ धाम में हो रहे पुर्ननिर्माण कार्यों में तेजी और गुणवत्ता लाने की दिशा में अपनी किचन कैबिनेट की टीम के साथ धाम को अद्भूत बनाने की दिशा में अपने कदम आगे बढाये और चंद दिन पूर्व जब केदारनाथ में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आये तो उन्होंने केदारनाथ में चल रहे कार्यों को देखकर पुष्कर की पीठ बार-बार थपथपाकर उन्हें अभेद आर्शीवाद दे दिया। पुष्कर सिंह धामी ने संकल्प लिया है कि अगर 2०22 में राज्य की जनता ने उन्हें अपना आर्शीवाद दिया तो वह शहीद आन्दोलनकारियों के सपनों का राज्य बनायेंगे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्डवासियों से जो पानी और जवानी को बचाने का संकल्प लिया है उसे वह शत-प्रतिशत पूरा करेंगे।
उत्तराखण्ड में चार साल तक सत्ता चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ राज्य के अन्दर एक बडी नाराजगी थी और समूचे प्रदेश में लहर चल रही थी कि अगर भाजपा हाईकमान ने त्रिवेन्द्र रावत के चेहरे पर राज्य के अन्दर चुनाव लडा तो भाजपा को दस से बारह सीट पर ही संतोष करना पडेगा और पांच साल तक उन्हें सत्ता से महरूम होना निश्चित है? उत्तराखण्ड की जनता के मन में प्रचंड बहुमत की सरकार को लेकर क्या चल रहा है इसका खुलासा उस समय गोपनीय रूप से हो गया जब दिल्ली में बैठे भाजपा के कुछ दिग्गज नेताओं ने उत्तराखण्ड में 2०22 को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर एक बडा सर्वे कराया। चर्चा है कि इस सर्वे का नतीजा देखकर भाजपा हाईकमान के पैरों तले जमीन खिसक गई थी कि आखिरकार राज्य की जनता प्रचंड बहुमत की सरकार से आखिर इतनी खफा क्यों है? आवाम का दिल भांपकर त्रिवेन्द्र रावत के बाद तीरथ सिंह रावत को सत्ता सौंपी गई लेकिन उन्होंने अपने तीन माह के कार्यकाल में शायद उन्हें कभी भी यह एहसास नहीं हुआ कि वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं? ब्यूरोक्रेसी से लेकर पार्टी के कुछ नेता उन पर हावी होते चले गये और इसका सच भाजपा हाईकमान को जैसे ही लगा तो उन्होंने तीरथ सिंह रावत को भी एक नाटकीय अंदाज में सत्ता से बेदखल कर खटीमा से भाजपा विधायक पुष्कर सिंह धामी को सत्ता सौंपी तो उत्तराखण्ड भाजपा के बडे-बडे दिग्गज हैरान हो गये कि आखिरकार पुष्कर को सत्ता सौंपने के पीछे क्या विजन है? भाजपा के बडे दिग्गज नेता अभी अपने गुणा-भाग में लगे हुये थे कि मात्र चार माह के कार्यकाल में ही राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संसार में अपनी अलग पहचान बनाने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपनी स्वच्छ प्रशासन की सत्ता चलाने के विजन से उनका दिल जीत लिया और वह राज्य में हो रहे आंदोलन को जिस तरह से समाप्त करने की दिशा में एक के बाद एक आगे बढते जा रहे हैं उसने विपक्ष से लेकर भाजपा के ही कुछ बडे नेताओं की नींद उडाकर रख दी है। त्रिवेन्द्र शासनकाल में बना देवस्थानम बोर्ड भले ही पुष्कर सिंह धामी के लिए एक बडा सिरदर्द बना हुआ हो लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने जिस तरह से तीर्थ पुरोहितों को वचन दिया है कि तीस नवम्बर तक देवस्थानम बोर्ड पर वह अंतिम फैसला कर देंगे उससे यह तो साफ नजर आ रहा है कि पुष्कर सिंह धामी देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए आगे आयेंगे या फिर तीर्थ पुरोहितों के हक-हकूक को वर्षों की भांति करने के लिए हरी झंडी देंगे यह तो तय माना जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों को विश्वास है कि त्रिवेन्द्र रावत की तरह पुष्कर सिंह धामी हठधर्मी नहीं है और वह तीर्थ पुरोहितों का आर्शीवाद लेकर ही 2०22 के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत का उनसे आर्शीवाद लेंगे?

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