त्रिवेन्द्र को केदारनाथ से भगाया

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देहरादून(संवाददाता)। हिटलरशाही से सरकार चलाकर अपने आपको राज्य का भाग्य विघाता समझने वाले उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तीर्थ पुरोहितों के खिलाफ एक बडा फैसला लेते हुए जिस तरह से राज्य के चारो धामों में देवस्थानम बोर्ड का गठन किया उससे तीर्थ पुरोहित समाज जो हमेशा राज्य की कामना के लिए पूजा अर्चना करता आ रहा है वह त्रिवेन्द्र सिंह रावत से इतना नाराज हुआ कि उनके खिलाफ बुद्धि-शुद्धि यज्ञ से लेकर उनके खिलाफ सख्त टिप्पणी करने से भी पीछे नहीं हटा और देश के प्रधानमंत्री के आगमन से मात्र चंद दिन पूर्व आज जिस तरह से त्रिवेन्द्र ंिसह रावत मेयर सुनील उनियाल गामा के साथ केदारघाटी में पहुंचे और बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए जैसे ही उन्होंने अपने कदम आगे बढाये तो नाराज तीर्थ पुरोहितों ने उनका रास्ता रोक लिया और उनके खिलाफ नारे लगाये ‘त्रिवेंद्र रावत वापस जाओ- त्रिवेंद्र रावत वापस जाओÓ, ‘उत्तराखंड के चोर वापस जाओ-वापस जाओÓ। तीर्थ पुरोहितों का यह आक्रोश इस बात का गवाह बन रहा है कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने किस तरह से तीर्थ पुरोहितों केे हक-हकूकों पर बडा प्रहार करने के लिए राज्य में देवस्थानम बोर्ड का गठन किया था। हालांकि राज्य के युवा व मधुरशाली मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवस्थानम बोर्ड को लेकर एक समिति का गठन कर रखा है और वह देवस्थानम बोर्ड पर जल्द ही कोई बडा फैसला लेंगे ऐसी उम्मीद तीर्थ पुरोहितों को अब दिखाई देने लगी है।
केदारनाथ चारधाम देवस्थानम बोर्ड की चिंगारी में हाथ झुलसा बैठे पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ चारोधाम के तीर्थ पुरोहितों में बडी नाराजगी पिछले दो सालों से पनप रही है। त्रिवेन्द्र रावत के राज में बनाए गए देवस्थानम बोर्ड के लगातार विरोध और राज्य सरकार के आश्वासन के बाद अब तक भंग न हो पाने से आक्रोशित तीर्थ-पुरोहितों के भारी विरोध का सामना आज खुद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को उस समय करना पड़ा जब वह बाबा केदारनाथ के दर्शन करने के लिए उनके द्वार पहुंचे थे जहां तीर्थ पुरोहितों ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन्हें बाबा केदारनाथ के द्वार तक जाने से रोक लिया और उन्हें धक्का देकर वहां से जिस तरह खदेड़ा वह यह बताने के लिए काफी है कि तीर्थ पुरोहित देवस्थानम बोर्ड को लेकर किस तरह से आक्रोशित हैं।
उल्लेखनीय है कि बाबा केदारनाथ धाम के कपाट दिवाली के बाद छह नवंबर को बंद होंगे और इससे पहले पांच नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बाबा के दरबार दर्शन करने पहुंच रहे हैं। उससे पहले आज पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बाबा केदारनाथ के दर्शन करने केदारपुरी पहुँचे लेकिन आक्रोशित तीर्थ-पुरोहितों और हक-हकूकधारियों ने उनका रास्ता रोककर जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। विरोध कर रहे तीर्थ पुरोहितों ने ‘त्रिवेंद्र रावत वापस जाओ- त्रिवेंद्र रावत वापस जाओÓ, ‘उत्तराखंड के चोर वापस जाओ-वापस जाओÓ से लेकर ‘रोजी-रोटी जो दे न सके वो सरकार निकम्मी हैÓ जैसे नारे लगाते हुए पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत को संगम स्थित पुल से आगे नहीं जाने दिया। भारी विरोध और तमाम मान-मनौव्वल के बाद भी जब तीर्थ-पुरोहित और हक-हकूकधारी समाज के प्रतिनिधि नहीं माने तो देहरादून मेयर सुनील उनियाल गामा आदि अपने समर्थकों के साथ पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत वापस लौटने को मजबूर हो गए। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब तीर्थ पुरोहितों ने किसी पूर्व मुख्यमंत्री को बाबा केदारनाथ के दर्शन करने से रोका हो और उन्हें धक्का देकर वहां से खदेडा हो। उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री जो कि हमेशा मधुरभाषी रूप में सबको नजर आ रहे हैं उन्होंने आज केदारघाटी में तीर्थ पुरोहितों के गुस्से को शांत करने के लिए कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन कौशिक को भेजा जिन्होंने तीर्थ पुरोहितों को आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री उनकी मांग को लेकर गंभीर हैं और जल्द से जल्द इस पर वह बडा फैसला लेंगे।

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