हादसे, मौत और मजिस्ट्रेट जांच फिर ‘खामोशी’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी के पछवादून में स्थित चकराता, त्यूणी में अकसर वाहनों के गहरी खाई में गिरने से मौत का मंजर देखने को मिलता आ रहा है और इन मौतों का जिम्मेदार आखिरकार कौन है यह आज तक एक पहेली बनकर रह गया है? ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन इलाकों मंे कब तक मौत का तांडव मचता रहेगा? इलाकांे में हादसे, मौत और उसके बाद सरकार द्वारा मजिस्ट्रेट जांच के आदेश और उसके बाद सिस्टम की खामोशी यह सवाल खडे कर रही है कि आखिरकार ऐसे हादसों के लिए कौन दोषी है जिसे आज तक किसी भी सरकार ने सजा देने का साहस नहीं दिखाया? एक बार फिर आज त्यूणी से विकासनगर आ रही एक यूटीलिटी में सम्भवतः ज्यादा लोग सवार थे और एक मोड पर चालक का गाडी से नियंत्रण हटा और वह खाई में जा गिरी जिसके बाद चीख-पुकार से इलाका कांप उठा और जब खाई का नजारा देखा तो वहां लाशे ही लाशे बिछी हुई थी। एक गांव के तेरह लोगों की दर्दनाक मौत ने गांव में कोहराम मचा दिया और मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने जब अपनों की लाशें खाई में पडी देखी तो उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इस हादसे में तेरह साल के मासूम से लेकर साठ वर्ष तक के व्यक्ति की मौत ने सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया कि आखिरकार क्या इस इलाके में आरटीओ विभाग घृतराष्ट्र बना हुआ है जिसे यह दिखाई नहीं देता कि आखिरकार वाहनों में गाडी चालक किस तरह से ग्रामीणों को ठूस-ठूस कर भर लेते हैं और कई बार गाडी का भार अधिक होने के कारण चालक पहाडों के रास्ते को पार करते हुए ग्रामीणों को मौत की खाई की ओर धकेल देता है? हैरान करने वाली बात है कि यूटीलिटी में पच्चीस लोग सवार थे जो कि परिवहन विभाग को कटघरे में खडा कर रहा है कि अगर वह घृतराष्ट्र न बना होता तो आज तेरह लोगों को अकाल मौत न मिलती। अब पुष्कर सरकार को मजिस्ट्रेट जांच की समय सीमा तय कर दोषियों पर जल्द से जल्द कार्यवाही करने के लिए साहस दिखाना चाहिए जिससे कि इन इलाकों में हो रहे हादसों में मौतों के तांडव को रोका जा सके?
उल्लेखनीय है कि विकासनगर से त्यूणी और चकराता आते-जाते समय पिछले बीस सालों में बडे-बडे हादसे हो चुके हैं और इन हादसों में मरने वालों की संख्या का अगर आंकलन किया जाये तो वह आंकडा दिल दहला देगा। त्यूणी और चकराता में अकसर यूटीलिटी व कुछ वाहनों में सवारियों को इस कदर ठूस-ठूसकर भरा जाता है जिसे देखकर आभास होता है कि मानो यह दोनो इलाके किसी ऐसे राज्य के हों जहां यातायात के लिए कोई नियम कानून नहीं हों? अकसर देखने मंे आता है कि त्यूणी व चकराता से चलने वाले प्राईवेट वाहनों में काफी लोगों को बिठा लिया जाता है और उसी के चलते कुछ मोड पर गाडी खाई में पलट जाती है और उससे मौत का एक बडा मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप जाती है। ऐसा ही कुछ आज एक बडा हादसा चकराता में उस समय घटा जब त्यूणी से विकासनगर आते समय एक यूटीलिटी बायला गांव के करीब खाई में जा गिरी और उसमें सवार बायला गांव के तेरह ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो गई। खाई में मौत का एक बडा मंजर देखकर बायला गांव के ग्रामीणों में कोहराम मच गया और खाई में बिखरी पडी लाशों को देखकर उनके अपनों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे। ग्रामीणों के मन में इस बात का बडा दर्द था कि आखिरकार वो कब तक अपनों की मौत ऐसे ही देखते रहेंगे। इस हादसे के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए उसकी मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये हैं लेकिन यह जांच कितने दिन में पूरी होगी और इसमें दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ क्या कार्यवाही अमल में लाई जायेगी यह भी मुख्यमंत्री को सुनिश्चित करना पडेगा क्योंकि अकसर इन इलाकों में ऐसे हादसे होना एक आम बात हो गई है और कभी भी जांच किस अंजाम तक पहुंची इसका खुलासा हमेशा से एक राज ही बना रहा जिसका परिणाम आज का यह हादसा है?
’मौत की यूटीलिटी’ में सवार थे ग्रामीण
परिवहन विभाग घृतराष्ट्र न बनता तो अकाल मौत में न समाती तेरह जिंदगी
देहरादून। त्यूणी से विकासनगर आते समय एक यूटीलिटी वाहन बायला गांव के करीब अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी और उसमंे सवार बायला गांव के तेरह लोगों की मौत हो गई और दो गम्भीर रूप से घायल हुये ग्रामीणों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया। बायला गंाव के तेरह ग्रामीणों की मौत ने सवाल खडा कर दिया कि मरने वालों को क्या इल्म था कि वह जिस यूटीलिटी में सवार होकर जा रहे हैं वह उन्हें मौत के सफर पर ले जा रही है। इस हादसे में मासूूम बच्चों सहित तेरह ग्रामीणों की मौत से पछवादून में एक बडा मातम बन गया और दीपावली से पूर्व मौत के इस मंजर ने बायला गांव के ग्रामीणों को एक बडा दर्द दे दिया।
मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह त्यूणी से विकासनगर के लिए एक यूटीलिटी यू.के16सीए-0520 बायला, बुलहाड़़, कोटी, कनासर होते हुए विकासनगर की ओर जा रही थी और जैसे ही वह बायला गांव के समीप पहुंची तो गाडी का चालक गाडी से अपना संतुलन खो बैठा और गाडी गहरी खाई में जा गिरी जिससे उसमें सवार तेरह ग्रामीणों की मौत हो गई और दो घायलों को एसडीआरएफ ने इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। इस हादसे में यूटीलिटी के परखच्चे उड गये।
मौके से जो जानकारी मिली उसके अनुसार उसके अनुसार से गाड़ी में कुल 15 लोग बायला गांव से सवार हुए थे जिनमें से 13 लोगों की मृत्यु हो गई है दो लोग घायल हैं। बताया जा रहा है कि मरने वालों में मातबर सिंह सगराईक, उसकी पत्नी तथा एक साल की छोटी बेटी, जयपाल सिंह देवबाइक, उसके छोटे भाई नरिया तथा उनकी छोटी बहन, साधराम चबाईक , मनाईक की ईशा,(गजेंद्र सिंह की बेटी) , रतन सिंह दलाण की भी मृत्यु हो गई है, मसराण के दान सिंह की मृत्यु हो गई, खणकायक के पंडित हरिराम की भी मृत्यु हो गई है, जगत बाजगी बायला की बेटी काजल की भी मृत्यु हो गई है, एक बाजगी मलेथा पशगांव का है उसकी भी मृत्यु हो गई! जो घायल है उनमें पिंगवा भरम के गजेंद्र है तथा बायला देवाईक इंदर सिंह का बेटा घायल है इन दोनों को उपचार के लिए चकराता डॉक्टर के पास ले गए हैं। इस हादसे ने आज एक बार फिर सरकारी सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिया है?
