आवाम की एक ही पुकार अबकी बार पुष्कर सरकार

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सौ दिन में उत्तराखण्ड के राजनीतिक हीरो बन गये धामी
किरन शर्मा
देहरादून। उत्तराखण्ड में भाजपा की प्रचंड बहुमत सरकार के होते हुए पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कार्यकाल में जिस तरह से राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार, घोटाले व राजशाही अंदाज में सत्ता चली उससे राज्यवासियों के मन में त्रिवेन्द्र सरकार के खिलाफ एक बडी नाराजगी देखने को मिल रही थी और यही कारण था कि जैसे ही भाजपा हाईकमान को इस बात का इल्म हुआ कि राज्य में कराये गये सर्वे से 2022 में भाजपा की सत्ता वापसी नहीं हो रही है तो त्रिवेन्द्र रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को यह सोचकर कमान दी गई कि वह पार्टी को एक बडे पायदान पर लाकर खडा करंेगे लेकिन तीरथ सिंह रावत को कभी भी इस बात का अहसास नहीं हुआ कि वह सांसद से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुके हैं। उनके तीन माह के कार्यकाल में ब्यूरोक्रेसी के हावी होने पर आखिरकार भाजपा हाईकमान ने तीरथ को भी सत्ता से अलविदा करवाया और उसके बाद राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जब मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई तो उन्होंने राज्य के अन्दर सौ दिन के भीतर राज्यवासियों के मन में अपनी सत्ता चलाने के अंदाज से उनका दिल जीत लिया और वह राज्य के अन्दर सबसे बडे राजनीतिक हीरो बन गये तो वहीं राज्य की अधिकांश जनता एक ही पुकार लगाते हुए दिख रही है कि अबकी बार पुष्कर सरकार।
उत्तराखण्ड के बीस सालों में राज्य का कोई भी मुख्यमंत्री ऐसा नहीं दिखा जिसने आवाम का दिल जीतने के लिए अपने आपको मुख्यमंत्री नहीं बल्कि जनता का सेवक साबित करने के लिए अपने कदम आगे बढाये हों। मधुरभाषी पुष्कर सिंह धामी जिन्होंने भगदा के शासनकाल में सत्ता को बेहद करीब से देखा और अनुभव किया कि आवाम का दिल कैसे जीता जाता है। पुष्कर सिंह धामी राज्य के अन्दर युवाओं के बीच में हमेशा अपनी बडी पकड बनाकर रखते थे और उनका मधुर व्यवहार ही सबके दिलों को जीत लेता था। तीरथ सिंह रावत को जब मुख्यमंत्री के पद से हटाया गया तो किसी को भी इस बात का इल्म नहीं था कि भाजपा हाईकमान विधानसभा चुनाव से पूर्व युवा विधायक पुष्कर ंिसह धामी को राज्य की सत्ता सौंप सकते हैं लेकिन भाजपा हाईकमान ने पुष्कर सिंह धामी पर विश्वास जताते हुए उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाया तो राज्य के युवाओं मंे एक अजीब लहर देखने को मिली क्योंकि पुष्कर सिंह धामी हमेशा युवाओं के बीच राज्य के विकास को लेकर मंथन व चिंतन करते रहते थे। पुष्कर सिंह धामी को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खुला साथ मिला तो उन्होने राज्य को स्वच्छ प्रशासन देने की दिशा में अपने कदम आगे बढाये और पार्टी के सभी मंत्री व विधायकों को साफ संदेश दे दिया कि उनके कार्यकाल में कोई भी गलत कार्य नहीं हो पायेगा और इसके लिए चाहे उनकी सत्ता रहे या न रहे वह राज्य के अन्दर किसी भी मंत्री या विधायक के कहने पर गलत काम का शत-प्रतिशत विरोध करेंगे यही कारण है कि पुष्कर सिंह धामी राज्य के अन्दर स्वच्छ प्रशासन देने की दिशा मंे आगे बढते चले गये और पुष्कर सिंह धामी ने जो जनपदों में अफसरों की तैनाती की उस पर कोई भी उंगली नहीं उठा पाया और स्वच्छ तबादलों से यह बात साफ हो गई थी कि पुष्कर सिंह धामी किस विजन के तहत सत्ता चलाने का इरादा लेकर मैदान में उतरे हुये हैं उससे विपक्ष की नींद उडी हुई है और साढे चार साल में राज्य के अन्दर भाजपा को लेकर आवाम के मन में जो नकारात्मक सोच पैदा हो गई थी वह पुष्कर के सौ दिन मंे सकारात्मक दिखने लगी है और राज्य के अधिकांश जिलों में जिस तरह से मुख्यमंत्री ने आवाम को रोज-रोज विकास योजनाओं के तोहफे देने शुरू किये हैं उससे आवाम ने भी अब एक स्वर में बोलना शुरू कर दिया है कि अबकी बार पुष्कर सरकार।

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