सीएम के सपनों को चूर-चूर करती खाकी!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी राज्य में पिछले साढे चार साल से हिटलरशाही अंदाज में चले आ रहे शासनकाल से नाराज दिख रहे व्यापारियों व आवाम के मन में लोकतंत्र के शासन का एक नया अहसास कराने के लिए आगे आ रखे हैं। कोरोना काल में राज्य के अन्दर ठप हो चुके पर्यटन व उद्योग को बढावा देने के लिए मुख्यमंत्री एक बडी पहल कर राज्य को फिर खुशहाली की पटरी पर लाने का सपना देखकर अपने मिशन में आगे बढे हुये हैं लेकिन हैरानी वाली बात है कि राजधानी में ही जहां सारी सरकार विराजमान है वहां ही पुष्कर सिंह धामी के सपनों को चूर-चूर करने में खाकी के कुछ दरोगा आगे आते हुए दिखाई दे रहे हैं? गजब बात है कि कहीं किसी पुलिस चौकी में दरोगा महिला से अभद्रता कर रहा है तो कोई दरोगा रेस्तरा में रात में खाना खाने वालों को तत्काल वहां से भगाने का फरमान रेस्तरा मालिक को ऐसे दे रहा है मानों वह पर्यटकों को खाना नहीं बल्कि अफीम परोस रहा हो? राजधानी में कप्तान की चंद पुलिस जिस तरह से बेलगाम हो रखी है उस पर पुलिस साहब की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है? अगर राज्य में ऐसे ही पर्यटन को बढावा देने का ख्वाब अगर प्रदेश के मुख्यमंत्री देख रहे हैं तो फिर ऐसे प्रदेश में पर्यटक कैसे आजादी के साथ अपनी छुट्टियों का आनंद ले सकेंगे यह अपने आप में एक बडा सवाल खडा हो गया है? पुलिस के एक दरोगा की अभद्रता समूचे राज्य के पर्यटन को कटघरे में खडा कर रही है और यह बात भी उठ रही है कि क्या देवभूमि में खाना खाने वालों को भगाने का फरमान पुलिस के किसी बडे साहब की सोच है या फिर चंद दरोगा अपनी वर्दी का रौब गालिब करने के लिए सीएम की सत्ता को देश के पर्यटकों के सामने निशाने पर लाने का खेल खेल रहे हैं?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड पर्यटन प्रदेश है और कोरोना काल में जिस तरह से चारधाम यात्रा बंद हुई और पर्यटन जिलों में बाहरी राज्यों के पर्यटकों के आने पर बैन लगा उससे उत्तराखण्ड के पर्यटन स्थल में व्यापार करने वाले व चारधाम यात्रा मार्गों पर होटल, रेस्तरा व अन्य सामान बेचने वालों के सामने रोजी-रोटी का एक बडा संकट आकर खडा हो रखा है। पुष्कर सिंह धामी जबसे राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं तबसे उन्होंने कोरोना काल में बर्बादी की राह पर आ खडे हुये उद्योगों व व्यापार को फिर पटरी पर लाने के लिए कई अह्म फैसले किये हैं और पर्यटक स्थलों पर अब मुख्यमंत्री की पहल से पहली जैसी रौनक नजर आने लगी है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने बडी रणनीति के तहत चारधाम यात्रा का भी शुभारंभ कराया है जिससे व्यापारियों व तीर्थ पुरोहितों में अपनी अजीविका को लेकर एक नई रोशनी नजर आने लगी है। राजधानी में पहली जैसी चहल-पहल बने और व्यापारियों का व्यापार फिर चल निकले इसके लिए पुष्कर ंिसह धामी व्यापारियों के साथ उनके हर दुख-दर्द में उनके साथ खडे हुये हैं और उन्होंने पुलिस के डीजीपी से भी साफ कहा है कि वाहन चैकिंग के नाम पर किसी भी व्यक्ति का उत्पीडन न किया जाये। उत्तराखण्ड में वैसे ही रोजगार ठप हो गया था और रेस्तरा व अन्य उद्योग चलाने वालों को एक बडा नुकसान हो रखा है और अपने व्यापार को जिंदा रखने के लिए व्यापारी कर्ज लेकर फिर एक नई आशा की किरण बंधाये हुये हैं कि अब उनका व्यापार शायद चल जाये। राजधानी में बाहरी राज्यों से पर्यटकों का आना-जाना रहता है और उनहें जब रात्रि में खाना आसानी से उपलब्ध हो जाता है तो वह सरकार की बल्ले-बल्ले करने लगते हैं लेकिन राजधानी के कुछ दरोगा मुख्यमंत्री के सपनों को चूर-चूर करने में कोई कसर नहीं छोड रहे हैं। गजब बात है कि जहां मुख्यमंत्री थाने-चौकियों में आवाम के साथ शालीनता से व्यवहार करने का पाठ पुलिस को पढा रहे हैं वहीं कुछ दरोगा अपनी वर्दी का इकबाल आवाम को दिखाने से पीछे नहीं हट रहे हैं और चंद दिन पूर्व एक चौकी में एक दरोगा ने एक महिला से अभद्रता की और इसकी शिकायत पुलिस के एक अफसर से भी की गई लेकिन साहब शायद दरोगा प्रेम में इतने लीन दिखे कि उन्होंने महिला से हुंई अभद्रता पर चुप्पी साध ली। इतना ही नहीं राजधानी के बार बंद होने का समय रात्रि ग्यारह बजे है लेकिन एक इलाके का दरोगा एक बार में चंद दिन पूर्व साढे दस बजे ही पहुंच गया और बार मालिक को धमकाया कि कल से बार दस बजे बंद कर दें या फिर जनपद के पुलिस कप्तान से अनुमति लें। आश्चर्यचकित बात है कि जब बार ग्यारह बजे तक खुलने का समय है तो फिर कोई दरोगा कैसे दस बजे किसी का बार बंद करा सकता है? बार संचालक सरकार को हर साल कई लाख रूपये बार फीस के रूप में राजस्व देते हैं लेकिन पुलिस का किसी बार को निशाना बनाना कई सवालों को जन्म दे रहा है? एक इलाके के बार व रेस्तरा में रात्रि साढे ग्यारह बजे के लगभग कुछ लोग वहां खाना खा रहे थे और म्यूजिक और बार बंद था लेकिन इसके बावजूद वहां पहुंचे एक दरोगा ने वहां के संचालक को फरमान दिया कि खाना खाने वालों को पन्द्रह मिनट में रेस्तरा से भगा दो नहीं तो वह सबको चौकी में ले जायेगा। सवाल यह भी है कि दरोगा को रेस्तरा में रखे रजिस्टर का आंकलन करना चाहिए था कि आखिरी व्यक्ति ने किस समय वहां प्रवेश किया था और अगर समय खत्म होने के बाद वहां किसी की एंट्री होती तो वहां के संचालक के खिलाफ उन्हें एक्शन लेने का अधिकार था लेकिन एक बार व रेस्तरा को जबरन निशाने पर लेकर उसके संचालक को आंतकित करना हैरान करने वाली बात है और ऐसे में राजधानी के अन्दर रेस्तरा या बार चलाने वाला कैसे अपने व्यापार को चला पायेगा यह तो सरकार को ही सोचना पडेगा?

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