देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखंड में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत आशा वर्कर्स, भोजन माताएं और आंगनवाड़ी कार्यकत्र्रियां ट्रेड यूनियन के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर सचिवालय कूच किया। सचिवालय के कुछ पहले उन्हें पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस पर महिलाओं ने सड़क पर ही धरना दिया। इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के साथ ही प्रधानमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किए गए।
यहां प्रदर्शनकारी सीटू कार्यालय के पास इकटठा हुई और वहां से मांगों के समाधान को लेकर सचिवालय कूच किया लेकिन पुलिस ने बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया। आंगनवाड़ी स्वयंसेविकाएं 1० सूत्रीय मांगों, भोजन माताएं 11 सूत्रीय मांगों और आशा वर्कर्स 12 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। समय समय पर सीटू और अन्य यूनियनों के संयुक्त आह्रवान पर उत्तराखंड में इन सेवाओं से जुड़ी महिलाएं सचिवालय, विधानसभा और सीएम आवास कूच कर चुकी हैं। आशा कार्यकत्रियां दो अगस्त से कार्य बहिष्कार पर हैं। फिलहाल कार्य बहिष्कार गढ़वाल मंडल में किया जा रहा है। कुमाऊं में सीएम के आश्वासन पर आशाओं ने आंदोलन स्थगित कर दिया था। इसके तहत समस्त स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही सीएमओ कार्यालय पर धरना दिया जा रहा है।
इस अवसर पर कहा गया कि आंदोलन के दौरान आशाओं की स्वास्थ्य सचिव से वार्ता भी हुई थी। इसमें कुछ बिंदुओं पर सहमति भी बनी थी, लेकिन शासनादेश जारी नहीं हुए। इसी तरह आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों ने 26 अगस्त को विधानसभा के समक्ष प्रदर्शन किया। तब उन्होंने सीएम से मुलाकात भी की। साथ ही उन्हें आश्वासन भी मिला था। इसके बाद 17 सितंबर को बाल विकास मंत्री रेखा आर्य से विधानसभा में मुलाकात हुई थी। इस दौरान आंगनवाड़ी स्वयंसेविकाओं की समस्याओं पर बिंदुवार वार्ता की गई। मंत्री ने भी उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इस अवसर पर अनेकों आशायें, आंगनवाडी कार्यकत्र्रियां व भोजनमातायें शामिल रही।
