पंडित गोविंद बल्लभ पंत का भारत के विकास में योगदान विषय पर गोष्ठी

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देहरादून(संवाददाता)। कांग्रेस सेवा दल प्रदेश प्रवक्ता अशोक मल्होत्रा ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 134वीं जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी पंडित गोविंद बल्लभ पंत का भारत के विकास में योगदान विषय पर की गई इस गोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रदेश प्रभारी अमरजीत सिंह अध्यक्षता राजेश रस्तोगी ने की।
इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए प्रदेश महासचिव नीरज त्यागी प्रदेश ने गोविंद बल्लभ पंत के जीवन के महत्वपूर्ण बिंदु प्रकाश डालते हुए बताया गोविंद बल्लभ को हिमालय पुत्र उपनाम से जाना जाता था और उनके व्यक्तित्व अनुसार महाराष्ट्र बल्लभ पंत की भी उपाधि दी गई थी। उनके पिता वैद्य थे । उनकी शिक्षा-दीक्षा अल्मोड़ा में हुई तत्पश्चात उन्होंने इलाहाबाद में वकालत की पढ़ाई तत्कालीन राजनीति में उनका महत्वपूर्ण वह उस समय होने वाले स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में जितने भी आंदोलन हुए उन सब आंदोलनों में पंडित गोविंद बल्लभ पंत का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि साइमन कमीशन के विरोध में जो अंग्रेजों ने लाठीचार्ज किया तो पंडित नेहरु के बचाव के लिए वह कवच की तरह पंडित नेहरू को घेरकर इनके ऊपर लेट गए अंग्रेजों की सारी लाठियां उन्होंने अपने शरीर पर खाई किस वजह से जीवन पर्यंत उनकी गर्दन सीधी नहीं हो पाई । उन्होंने कहा कि पंडित पंत अविभाजित उत्तर प्रदेश जिसका नाम उस समय संयुक्त प्रांत होता था उसके दो बार मुख्यमंत्री रहे और देश आजाद होने के बाद 1951 में देश के गृहमंत्री रहे। इसी संदर्भ में प्रदेश प्रवक्ता अशोक मल्होत्रा ने बताया की कुमाऊं में कुमाऊं कांग्रेस की स्थापना 1912 में पंडित जी के माध्यम से की गई थी और 1914 में पंडित पंत ने काशीपुर में प्रेम सभा की स्थापना की जिसने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण कार्य किया, कि उन्हें उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए भारत रत्न की उपाधि से नवाजा गया।
इस अवसर पर राजेश रस्तोगी ने बताया काकोरी कांड में जो क्रांतिकारी थे उनका मुकदमा लडऩे का कार्य पंडित पंत ने किया था प्रदेश प्रभारी डॉ अमरजीत सिंह ने बताया असहयोग आंदोलन जब पूरे देश में चल रहा था उस आंदोलन में नैनीताल से पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने झंडा सत्याग्रह में भाग लिया और उसका नेतृत्व किया और उनके नाम से अंग्रेज काशीपुर को उस समय गोविंदगढ़ कहा करते थे क्योंकि पंडित पंत की स्थली मुख्य रूप से काशीपुर रहा हैा।

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