जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की पंडित गोविन्द बल्लभ पंत को

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में कांग्रेसजनो ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में भारत रत्न, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित गोविन्द बल्लभ पंत की जयंती के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उनका श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। इस अवसर पर कांग्रेस सभागार में सेवादल द्वारा स्वर्गीय पन्त के विचारों पर गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित गोष्ठी कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्वर्गीय पण्डित गोविन्द बल्लभ पन्त के राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2०वीं शताब्दी के तीसरे दशक में कुमाऊं परिषद के माध्यम से सामाजिक और राजनैतिक जीवन में पन्त ने अपनी शुरूआत की।
उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में फैली भीषण गरीबी, कुली बेगार प्रथा तथा सामाजिक बुराइयों के कारण प्रताडि़त हो रहे कमजोर तबकों की पीड़ा को गहराई से महसूस किया और कालान्तर में उसके लिए उन्होंने अनेक संघर्ष किये। उन्होंने कहा कि भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त ने आजादी के बाद 2० साल उत्तर प्रदेश और भारत की राजनीति में केन्द्रीय भूमिका निभाते हुए मुख्यमंत्री और देश के गृह मंत्री जैसे पदों को सुशोभित किया। उन्होंने कहा कि पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त अद्वितीय प्रतिभा के धनी और साहसी पुरूष थे। स्वतंत्रता संग्राम में उनका अविस्मरणीय योगदान तथा साइमन कमीशन के विरोध में उनकी भूमिका इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने कहा िक भारत में कुली बेगार तथा जमीन्दारी उन्मूलन के साथ ही समाज में फैली अनेक कुरीतियों का उन्होंने सदैव विरोध किया। केन्द्रीय गृह मंत्री तथा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने विकास की मजबूत नींव रखी। उनका पूरा जीवन नि:स्वार्थ जनसेवा को समर्पित रहा है। स्वर्गीय पन्त ने भारतीय राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ी और उनकी योग्यता, प्रशासनिक क्षमता तथा स्वतंत्रता आन्दोलन में अद्वितीय योगदान को देखते हुए उन्हें भारत रत्न के अलंकार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रवत ने कहा कि कृषि सुधारों के लिए पंडित पन्त के मुख्यमंत्रित्व काल में (कुंजा) अधिनियम को पारित किया गया। संयुक्त प्रान्त की विधान परिषद में 1924 से 1929 तक विरोधी दल के उपनेता रहते हुए उन्होंने अनेकों अधिनियमों और प्रदेश की समस्याओं के ऊपर तार्किक भाषणों के जरिये सरकार को मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा कि उनका राजनैतिक सफर यहीं नहीं रूका वे संयुक्त प्रान्त की विधानसभा में 1932-1937 तक सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंंने अनेक महत्वपूर्ण जटिल समस्याओं के ऊपर सारगर्भित भाषण दिये जिसमें से एक प्रेस की आजादी के सम्बन्ध में भी था जो लगातार दो दिन तक विधानसभा में चला जिसके बाद ब्रिटिश हुकूमत को प्रेस की आजादी पर प्रतिबन्ध सम्बन्धी इस विधेयक को वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि पंण्डित गोविन्द बल्लभ जैसे महान व्यक्तित्व समाज के लिए सदैव प्रेरणा के स्रोत रहेंगे।

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