देहरादून(संवाददाता)। एसएफआई के राज्य सचिव हिमांशु चौहान ने बताया कि संगठन के अखिल भारतीय अध्यक्ष े देहरादून से श्रीनगर पहुचे । श्रीनगर में अखिल भारतीय विरोध दिवस के अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के गेट पर प्रदर्शन किया गया और वहां पर ऑल इण्डिया प्रेसिडेंट का स्वागत किया गया।
इस अवसर पर प्रदर्शन में मुख्य नारे व मांगे सभी छात्रों को मुफ्त वैक्सीन शिक्षण संस्थान में ही उपलब्ध करवायी जाए। कोरोना सम्बंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सभी शिक्षण संस्थानों को शीघ्र खोला जाए। डिजिटल डिवाइड के माध्यम से छात्रों को ड्राप आउट की ओर धकेलना बन्द करों। डिजिटल डिवाइड पर रोक लगाओ। इस अवसर पर कार्यक्रम को बैक टू क्लास रूम से किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय अध्यक्ष वी.पी शानू का स्वागत डी ए वी इकाई अध्यक्ष मनोज कुँवर ने चादर पहना कर किया। अखिल भारतीय अध्यक्ष वी. पी शानू ने बताया कि शिक्षण संस्थानों को खुलवाने के लिए पूरे देश भर में व श्रीनगर गढ़वाल विश्विद्यालय में छात्रों का अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाया गया। उन्होंने बताया कि सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बराबरी का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए विरोध दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि यह तारीख हिंदुस्तान के इतिहास में विशेष स्थान रखती है सन 1936 में इसी दिन हिंदुस्तान के संगठित छात्र आंदोलन की शुरुआत हुई थी ।
उन्होंने कहा कि उस समय इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ लडऩा था परंतु वक्त गुजर जाने के साथ-साथ इस आंदोलन की महत्वता और चरित्र भी बदलता गया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की आजादी में मुख्य भूमिका निभाने के अलावा इस आंदोलन ने देश की एकता व अखंडता व सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए अनेको आंदोलनो को लड़ते हुए लाखों कुर्बानियां दी है।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कोरोना रूपी महामारी का कहर पूरी दुनिया पर बरप रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नाकामियों और उदासीनता के चलते भारत तो आधुनिक विश्व के सबसे बड़े नरसंहार का शिकार हुआ । कोरोना महामारी के समय सरकार की अवैज्ञानिक सोच और उदासीन रवैये का भीषण शिकार भारत का शिक्षा ढांचा भी हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और नियत के चलते हिंदुस्तान का शिक्षा ढांचा पहले से ही चरमराया हुआ था। कोरोना आने के बाद तो पूरा का पूरा ढाँचा ढह ही गया। उन्होंने कहा कि लगभग 17 महीनों के लंबे वक्त से सभी शिक्षण संस्थान बंद है। जिसका सीधा प्रभाव अलग -अलग रूप में प्राइमरी से लेकर विश्विद्यालय में पढऩे वाले छात्रों पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि संगठित छात्र आंदोलन का स्थापना दिवस संघर्षों में शामिल हो कर मनाया गया । इस दिन निम्नलिखित मांगो को लेकर एसएफआई की प्रत्येक इकाई शिक्षण संस्थानों को खोलने व अन्य निम्नलिखित मांगो को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित कर मॉक क्लास रूम(शिक्षण संस्थानों के परिसर में या गेट पर बैठ कर कक्षाओं का आयोजन पूरे देश भर में किया गया।
इस अवसर पर राज्य सचिव हिमांशु चौहान, राज्य अध्यक्ष नितिन मलेठा, श्रीनगर इकाई सचिव नीलम, अध्यक्ष आशुतोष, ज्योति, कमलेश नेगी, गोविंद राम, प्रियंका, पंकज अग्रसर, मर्दुला, शैलेंद्र परमार, आदि लोग उपस्थित रहे।
