अनाथ बच्चों के लिए राज्यपाल और सरकार आई आगे

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देहरादून(संवाददाता)। दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आज सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत स्थापित डॉ. बी. आर अम्बेडकर फाउंडेशन द्वारा पोषित अम्बेडकर चेयर की स्थापना की गई। उद्घाटन कार्यक्रम राज्यपाल, बेबी रानी मौर्या एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गरिमामयी की उपस्थिति में विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में किया गया। इस मंच से राज्यपाल ने घोषणा की कि कोविड महामारी के चलते अनाथ हुए बच्चों के लिए दून विश्वविद्यालय में संचालित हर पाठ्यक्रम में 1 सीट आरक्षित की जाएगी।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. बी. आर. आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित तथा दीप प्रज्वल्लन कर श्रद्धांजलि दी गयी। तदोपरांत अम्बेडकर फॉउण्डेशन के निदेशक श्री देवेंद्र कुमार माझी की पुस्तक ‘रीविसिटिंग डॉ भीमराव आंबेडकर रू थॉट्स एंड फिलोसोफीÓ का विमोचन माननीय राज्यपाल के कर कमलों हुआ। इसके उपरांत राज्यपाल बेबी रानी मौर्या, अपने उद्बोधन में कहा की इस चेयर की स्थापना से अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिलाओं के हित में अत्यावशयक शोध कार्यों की परिकल्पना की जा सकेगी। हर जाति की समानता और जाति के नाम पर हो रहे भेदभाव को दूर करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि दून विश्वविद्यालय ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होने की दिशा में एक नया कदम उठाया है। उन्होंने अपने छात्र जीवन को याद किया और उस पर डॉ. अंबेडकर के जीवन की अमिट छाप का उल्लेख किया. उन्होंने विश्वविद्यालय की समस्याओं और परिस्थितियों पर चर्चा करने की बात की। मुख्यमंत्री जी ने दून विश्वविद्यालय में नए पुस्तकालय भवन के निर्माण के लिए अनुदान देने की घोषणा की। डॉ धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, ने दून विश्वविद्यालय की उपलब्धि पर बधाई दी तथा कामना की कि शोध कार्यों में विश्वविद्यालय भविष्य में कोई उत्कृष्ट योगदान दे। उन्होंने बताया की दून विश्वविद्यालय में तीन चेयर्स की स्थापना की परिकल्पना थी. जिसमें से एन टी पी सी एवं आंबेडकर चेयर स्थापित की जा चुकी हैं. तथा अटल बिहारी वाजपेयी चेयर की स्थापना भी जल्द की जाएगी.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल ने बताया कि इस वर्ष आंबेडकर चेयर केवल तीन विश्वविद्यालयों को दी गयी है जिसमें दून विश्वविद्यालय एक है. उन्होंने कहा की विश्वविद्यालय कि आंबेडकर चेयर बाबा साहेब के सिद्धांतो, आदर्शों एवं जीवन दर्शन पर शोध कार्य संचालित करेगा जिससे उत्तराखंड के अनुसूचित जातियों, महिलाओं, अनुसूचित जनजातियों , आदिवासियों एवं समाज के अन्य वंचित वर्गों के आर्थिक, राजनितिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण संभव हो सके। इस उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकगण मौजूद रहे। प्रो एच सी पुरोहित, डॉ हर्षपति डोभाल, प्रो. कुसुम अरुणांचलम, डॉ. रीना सिंह , डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. सविता कर्णाटक, डॉ. नितिन कुमार, , डॉ. सुधांधु जोशी, दीपिका भाटिया, आबशार अब्बासी, डॉ. करुणा शर्मा, डॉ. स्मिता त्रिपाठी, शुभ्रा कुकरेती, डॉ. माला शिखा, डॉ. स्मिता त्रिपाठी, आदि उपस्थित रहे।

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