बांध बिस्तापितों के दर्द को बयां कर केजरीवाल के एक तीर से कई निशाने
चंद्र प्रकाश बुड़ाकोटी
देहरादून। देवभूमि उतराखण्ड में केजरीवाल ने बिजली का सियासी दांव तो खेला ही,बल्कि टिहरी बांध विस्तापितो के मामले को उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर शुरू करवा दी नई बहस। दिल्ली के सीएम अरबिंद केजरीवाल ने कहा कि उतराखण्ड में टिहरी बांध निर्माण के लिए जिन लोगों ने घर बार और जमीनें दी। उन्हें फ्री बिजली देने का वायदा किया गया था। लेकिन आज तक विस्थापितों को फ्री बिजली नहीं मिल पाई है। आम आदमी पार्टी द्वारा केजरीवाल के उतराखण्ड दौरा को पूरे सियासी नफे नुकसान को देखते हुए बनाया गया। पार्टी सुप्रीमो दिल्ली के सीएम पूरे होम वर्क के साथ दिखाई दिए। राज्य में तीन सौ यूनिट बिजली की गारंटी से अलग उंन्होने टिहरी बांध बिस्तापित हुए परिवारों के दर्द को भी बयां कर एक तीर से कई निशाने लगा दिए।हालांकि अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आए उतराखण्ड में जिस टिहरी बांध बिस्तापितो के मसले से राज्य के नेता और सरकारें हर समय बचती रही। उस पर केजरीवाल के एक बयान के बाद चर्चा शुरू हो गई है। बात करें टिहरी बिस्तापित लोगो की तो,टिहरी में टिहरी सीट,हरिद्वार ग्रामीण,पौड़ी में लालढांग सीट,और देहरादून में ऋषिकेश,धर्मपुर डोईवाला,राजपुर की सीटों पर सीधा असर करते है। आगामी दो हजार बाइस में राज्य में बिधान सभा चुनाव होने है। राज्य की राजनीति इस समय पूरी चुनावी मोड़ में दिखाई दे रही है,सियासी दांव पेंच सभी पार्टियों द्वारा खेले जा रहे है। टिहरी जनपद के हजारो लोगो की सदियों पुरानी विरासत टिहरी बांध की भेंट चढ़ गई। बांध बिस्तापितो को सरकार ने फ्री बिजली देने का वायदा किया था लेकिन आज तक विस्थापितों को फ्री बिजली नहीं मिल पाई है।
