पुष्कर का राजतिलक

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दिग्गज नेताओं के मनाने पर नाराज मंत्री हुये शांत
चिरंजीव सेमवाल
देहरादून/उत्तरकाशी। मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी की ताजपोशी होने के बाद सरकार के आधा दर्जन मंत्री भाजपा हाईकमान के फैसले से नाराज हो गये और यह नाराजगी इतनी बढ़ गई कि दिल्ली में बैठे भाजपा के दिग्गज नेताओं को डैमेज कंट्रोल के लिए आगे आना पडा और मुख्यमंत्री की शपथ से चंद घंटे पहले ही रूठने-मनाने के चले ड्रामे का अंत हो गया और मुख्यमंत्री के साथ उन सभी मंत्रियों ने शपथ लेने के लिए हामी भर दी जो दोपहर तक यह दम भर रहे थे कि वह शपथ नहीं लेंगे। चर्चाएं यह भी हैं कि शायद कुछ मंत्रियों ने सरकार में पॉवरफुल मंत्रालय लेने के लिए पासा फेंका था जो उनका सही दिशा में जाता हुआ दिखाई दिया और चर्चाएं हैं कि आने वाले चंद दिनों में अपनी नाराजगी दिखा चुके मंत्रियों को हैवीवेट मंत्रालय मिल जायेंगे?
वर्ष 2017 में कांग्रेस के हरीश रावत सरकार में हुई बगावत के बाद अब भाजपा में बार बार हो रहे नेतृत्व परिवर्तन से कांग्रेस जैसे हालात नजर आ सकतें हैं। सूत्रों की माने तो शनिवार को भाजपा ने उत्तराखंड में पुष्कर धामी को सीएम की ताजपोशी करने से तीन वरिष्ठ मंत्री नारज हो गये। खबर यहां तक है कि तीनों मंत्रियों से रात्रि को गृह मंत्री अमित शाह ने फोन पर बात की और दिल्ली दौड शुरू हो सकती है। नाराजगी इसलिए बताई जा रही है एक तो चुफाल और सतपाल महाराज को सीएम नहीं बनाया गया। लगातार नाम आने के बावजूद पार्टी ने उन्हें सीएम नही बनाया जबकि उनका राष्ट्रीय स्तर का कद माना जाता है। वही दूसरी तरफ हरक सिंह रावत इस बात से नाराज है कि इतने जूनियर विधायक को मुख्यमंत्री बना दिया गया। सतपाल महाराज की नाराजगी तो पार्टी कार्यालय में ही दिखाई दे गई थी जब नाम घोषित होते ही उनके हाव भाव बता रहे थे वो नाराज हैं वही वो एकाएक बीजेपी कार्यालय से बाहर निकल गए थे। भाजपा के वरिष्ठ विधायक बिशन सिंह चुफाल भी हाईकमान के फैसले से नाराज दिखाई दे रहे हैं तो वहीं आज मंत्री धनसिंह रावत ने यमुना कालोनी में यशपाल आर्य से मुलाकात की। उधर यमुना कालोनी में ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने मंत्री व विधायकों के साथ बैठक करने का खाका तैयार किया हुआ था और वे नाराज नेताओं को मनाने के ऑपरेशन में लगे हुये थे लेकिन देखने वाली बात होगी कि पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री बनने पर उत्तराखण्ड में आया सियासी भूचाल सिर्फ दबाव की राजनीति का अंग है या फिर यह सियासी तूफान उत्तराखण्ड के अन्दर कोई नया गुल खिलायेगा? हालांकि दोपहर बाद यह सियासी तूफान फिलहाल तो शांत होने का भाजपा के दिग्गज नेता दावा कर रहे हैं लेकिन यह तो भविष्य के गर्त में कैद है कि आने वाले कुछ समय के भीतर उत्तराखण्ड की राजनीति में कहीं कुछ नया भी देखने को मिल सकता है ऐसी आशंकाओं से इंकार नहीं किया जा सकता?
वही हरक सिंह 28 साल की उम्र में विधायक बन गए थे और यूपी से उत्तराखंड तक कई सरकारों में मंत्री रहे है ऐसे में 2012 में विधायक बनने वाले धामी उनसे कही जूनियर हैै। सूत्र बताते हैं कि हरक और सतपाल महाराज को अमित शाह ने फोन किया है और सतपाल महाराज के देर रात दिल्ली जाने की चर्चाएं भी सामने आ रही है। ये सियासी ड्रामा अब क्या मोड़ लेगा ये देखने वाली बात होगी। अब हरक सिंह, सतपाल महाराज सहित दुसरे नेता क्या कदम उठाते है ये देखने वाली बात होगी? बहस छिड रही है कि एक तरफ तो उत्तराखंड में सियासी संकट के चलते भाजपा सोशल मीडिया के धुरंदरों के निशाने पर आयी हुयी है। चाय की दुकान से लेकर हेयर ड्रेसर की दुकान तक में इस बार किये गए नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कई तरह की बाते की जा रही है। वही दूसरी तरफ नेतृत्व परिवर्तन के बाद चंद बड़े नेताओ की नाराजगी की खबरे सामने आ रही है। अभी पुष्कर धामी को विधायक दल का नेता चुने हुए कुछ ही घंटे हुए है लेकिन वरिष्ठ नेताओ की नाराजगी की खबरे सामने आने लगी है। धामी को मुख्यमंत्री बनाए जाने से भाजपा के सीनियर मंत्री नाराज दिखाई दे रहे हैं? सूत्र बताते हैं कि नाराज मंत्रियों में सतपाल महाराज और हरक सिंह रावत शामिल है हालांकि नाराज तो कहीं और मंत्री विधायक भी हैं ,लेकिन इन दोनों की नाराजगी इन के हाव भाव से बीजेपी कार्यालय में ही दिखने लगी थी? आज सुबह से ही नाराज भाजपा नेताओं को मनाने का ऑपरेशन शुरू हो रखा था और जिस तरह से यमुना कालोनी में कुछ राजनेतओं के यहां बैठकों का दौर चल रहा था इस दौर की कमान भाजपा के चंद दिग्गज नेताओं ने उठाई और उन नेताओं को मना लिया गया जो शपथ न लेने का सम्भवतः दम भर रहे थे और मदन कौशिक ने दोपहर बाद साफ कर दिया था कि मुख्यमंत्री के साथ मंत्री भी शपथ लेंगे।

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