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संवाददाता
देहरादून। अखिल भारतीय पंचायत परिषद उत्तराखंड प्रदेश के कार्यवाहक अध्यक्ष नवीन जोशी ने कहा है कि पंचायतों को व्यापक स्तर पर मजबूत करने के लिए संघर्ष किया जायेगा और पंचायती राज अधिनियम के तहत धारा 73 एवं 74 लागू करवाने को व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जायेगा।
यहां प्रिंस चौक स्थित परिषद के कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को भी रिटायर होने पर सांसद व विधायक की तरह पेंशन व्यवस्था लागू करवाने के लिए संघर्ष किया जायेगा और समय पर चुनाव न होने पर 6 माह का कार्यकाल बढ़ाए जाने का प्रावधान किये जाने व प्रत्येक ब्लॉक में पंचायत भवन बनवाने के लिए सरकार पर दबाव बनानक का कार्य किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष , मेयर को सुविधाएं विधायक के समान दी जाए और नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष को रुपये 6००० मानदेय, नगर निगम पार्षद, नगर पालिका का सदस्य नहर पंचायत सदस्य रुपये 3००० मानदेय, ग्राम प्रधान रुपये 5०००,मानदेय, ग्राम पंचायत सदस्य रुपये 1००० मानदेय दिया जाय, कार्यकाल समाप्ति पर इन सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को पेंशन का प्रावधान भी होना चाहिए।
इस अवसर पर कार्यवाहक अध्यक्ष नवीन जोशी ने कहा कि अखिल भारतीय पंचायत परिषद का गठन पूरे राज्य में किया जाएगा, पंचायतों, नगर पालिका , नगर निगम में जो प्रतिनिधि चुनकर आए हैं व उनको जो अधिकार मिलने चाहिए थे वह आज तक नहीं मिल पाए हैं, उनको अधिकार दिलवाने के लिए अखिल भारतीय पंचायत परिषद धरना, प्रदर्शन, रैलियां और उनके लिए संघर्ष करेगी । उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बने हुए साढ़े चार साल हो गए हैं परंतु राज्य सरकार ने आज तक पंचायत प्रतिनिधियों की सुध नहीं ली गई है और न ही उनके अधिकारों के लिए कोई बात कही इसके विरुद्ध भी अखिल भारतीय पंचायत परिषद पंचायत प्रतिनिधियों को एकजुट कर संघर्ष का आह्वान करेगी, ओर पंचायत प्रतिनिधियों को किस प्रकार के परेशानियों और संघर्षों से गुजरना पड़ता है, परंतु राज्य सरकार ने आज तक इस बात का भी कोई संज्ञान नहीं लिया, शीघ्र ही पंचायत परिषद का गठन करके सम्मेलन व रैलियों के माध्यम से सरकार को जगाने का कार्य किया जाएगा। इस अवसर पर अखिल भारतीय पंचायत परिषद के प्रदेश संयोजक मनीष कुमार ने कहा कि प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों को दिलवाने के लिए पंचायत परिषद शीघ्र ही आंदोलन की रूपरेखा बनाएगी ,जितना इस राज्य सरकार में पंचायत प्रतिनिधि अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं उतना आज तक किसी भी सरकार में नहीं हुआ । उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सांसद ,विधायकों को सुविधाएं व क्षेत्र के विकास के लिए निधि दी जाती है उसी प्रकार से पंचायत प्रतिनिधियों को भी निधि दी जाए ,राज्य के ग्रामीण इलाके आज भी विकास से कोसों दूर हैं मूलभूत सुविधाओं का अभाव इन इलाकों में है ,जो आजादी के 7० साल बीत जाने के बाद भी आज तक सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, शिक्षा, बेरोजगारी जैसी समस्याएं मुंह बाए खड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थिति बद से बदतर हो गई है कोरोना काल में हर प्रकार का व्यक्ति पीडि़त हुआ है महामारी ने कमर तोड़ कर रख दी है परंतु सरकार ने उनके उत्थान के लिए भी कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनाई है और न ही लागू की गई है और जब शहरी क्षेत्रों में ही इन समस्याओं से हालत बदतर है तो ग्रामीण इलाकों में क्या स्थिति होगी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।। उन्होंने कहा कि इसके लिए चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जायेगा। इस अवसर पर वार्ता में मुख्य रूप से अखिल भारतीय पंचायत परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट पी के अग्रवाल, कार्यवाहक अध्यक्ष नवीन जोशी व प्रदेश संयोजक मनीष कुमार आदि उपस्थित थे ।

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