केन्द्रीय रेल मंत्री से मिले कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी

0
148

देहरादून(संवाददाता)। राज्य के औद्योगिक विकास, एमएसएमई तथा खादी व ग्रामोद्योग मंत्री गणेश जोशी ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा रेल मंत्री पीयूष गोयल से, नई दिल्ली स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की और कहा कि शिमला की तर्ज पर मसूरी तक रेल पहुंचाई जा सकती है और इसके लिए हरसंभव प्रयास करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर काबीना मंत्री गणेश जोशी ने राज्य के औद्योगिक विकास के लिए जारी की गई औद्योगिक विकास स्कीम 2०17 के लाभ 2०22 के बाद भी जारी रखे जाने, फार्मा इण्डस्ट्रीज के लिए प्रयोगशाला परीक्षण उपकरण तथा क्वालिटी कन्ट्रोल उपकरणों को पात्र घटक में सम्मिलित किए जाने, हरिद्वार जनपद अंतर्गत तकरीबन 7०० से अधिक पूर्व से स्थापित उद्योगों हेतु बेहतर माल ढुलाई सुविधा उपलब्ध कराने एवं हेतु ”इनलैण्ड कंटेनर डीपो (आईसीडी)ÓÓ सुविधा विकसित करने तथा पर्यटन नगरी मसूरी को शिमला की तर्ज पर रेल कनेक्टिविटी से जोडऩे जैसे प्रस्तावों पर केन्द्रीय सहयोग की मांग की। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी इन दिनों दिल्ली में केन्द्रीय नेताओं से मुलाकात कर अपने अधीन विभागों की योजनाओं की स्वीकृति हेतु पैरवी कर रहे हैं। कोरोना वायरस कोविड 19 संक्रमण काल के दौरान देहरादून जनपद के कोरोना उपचार व्यवस्थाओं के प्रभारी के तौर पर कोरोना उपचार व्यवस्थाओं में व्यस्त होने के कारण गणेश जोशी राज्य सरकार में मंत्री बनने बाद पहली बार केन्द्रीय नेताओं से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे हैं।
इस अवसर पर औद्योगिक विकास मंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (उद्योग संवद्र्धन एवं आन्तरिक व्यापार विभाग), भारत सरकार की अधिसूचना 23 अपै्रल, 2०18 द्वारा हिमांचल प्रदेश और उत्तराखण्ड राज्य में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए औद्यागिक विकास स्कीम -2०17 स्वीकृत की गयी है। जो कि 31 मार्च, 2०22 तक प्रभावी रहेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के लिए स्वीकृत उक्त पैकेज में केन्द्रीय पूंजी निवेश उपादान की आकर्षक सुविधा होने के कारण राज्य में औद्योगिक प्रतिष्ठानों द्वारा नये उद्येगों की स्थापना अथवा अपने विद्यमान उद्यम के विस्तार का कार्य किया जा रहा है। अभी भी काफी उद्यमी नये उद्योग की स्थापना या विद्यमान उद्यम के विस्तार के लिए आगे आ रहे हैं, किन्तु गत वर्ष से कोविड-19 के प्रथम व द्वितीय लहर में लॉकडाउन तथा वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाईयों हो रही है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों में जीवन रक्षक दवाओं, मेडिकल ऑक्सीजन, ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर के निर्माण, अस्पतालों की स्थापना एवं वर्तमान परिदृश्य में व्यवहार्य परियोजनाओं हेतु राज्य में ऐसी विनिर्माणकध्सेवा गतिविधि की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में सीमित वित्तीय संसाधन हैं। उन्होंने कहा कि अत: इसको दृष्टिगत रखते हुए भारत सरकार द्वारा स्वीकृत इस पैकेज की वैधता दिनांक 31 मार्च, 2०22 के बाद भी बढ़ायी जानी नितान्त आवश्यक है। औद्योगिक विकास मंत्री ने कहा कि, भारत सरकार द्वारा स्वीकृत औद्योगिक विकास योजना, 2०17 में विनिर्माणक क्षेत्र की ओद्योगिक इकाईयों को केन्द्रीय पूंजी निवेश की अनुमन्यता के लिए संयंत्र और मशीनरी के मूल्य को गणना में लिये जाने के सम्बन्ध में अधिसूचना 23 अपै्रल, 2०18 के अनुबन्ध-2 में पात्र घटक (म्सपहपइसम ब्वउचवदमदज) दिये गये घटकों में प्रयोगशाला परीक्षण उपकरण (स्ंइवतंजवतल जमेजपदह मुनपचउमदज) तथा क्वालिटी कन्ट्रोल उपकरण सम्मिलित नहीं है। जबकि फार्मा इण्डस्ट्रीज के लिए प्रयोगशाला परीक्षण उपकरण एक आवश्यक घटक है। उत्तराखण्ड की फार्मास्यूटिकल्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिऐशन द्वारा इस सम्बन्ध में एक प्रत्यावेदन दिये जाते रहे हैं। मेरा भी यह विचार हैं कि फार्मास्यूटिकल्स तथा अन्य उद्योगां को अपने उत्पाद के परीक्षण तथा क्वालिटी कन्ट्रोल की सुनिश्चितता के लिए प्रयोगशाला उपकरणों क्वालिटी कंट्रोल इक्यूपमेंट पर किये गये अचल पूंजी निवेश में पूंजीगत उपादान का लाभ मिलना चाहिए, ताकि सभी उद्योग निर्धारित मानकों के अनुसार उत्पाद का विनिर्माण सुनिश्चित कर सकें। कोविड-19 के कारण उन्पन्न परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उत्तराखण्ड तथा हिमांचल प्रदेश के लिए स्वीकृत ओद्योगिक विकास योजना, 2०17 की वैधता अवधि 31मार्च,2०22 के बाद से आगामी 3 वर्ष तक बढ़ाने की जरूरत है।

LEAVE A REPLY