आठ वर्ष पूरे हुये 2०13 की दैवीय आपदा के

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उत्तरकाशी(संवाददाता)। 16 जून आज ही के दिन वर्ष 2०13 में केदारनाथ सहित जनपद उत्तरकाशी में भी आपदा ने गहरे जख्म दिए थे। वो मंजर जब भी जेहन में आता है तो रूह कांप उठती है। भयंकर विनाशकारी बाढ़ में लोगों को जान माल की बहुत अधिक हानि हुई, हजारों लोगों के आशियाने तास के पत्तों की तरह गिर गए। जरा याद कीजिये वो मंजर जब हमारी नजरों के सामने ही तास के पत्तों की तरह बहुमंजिला भवन एक-एक कर बाढ़ के आघोष में समा रहे थे। क्या तत्समय सोचा जा सकता था कि हम फिर इन्ही जगहों पर अपने आशियाने बना सकेंगे। भारी तबाही ने पूरे उत्तरकाशी शहर को उजाड़ बना दिया। लोगों के दिलों में अपने आशियाने यूँ बिखर जाने का अपार दु:ख हम सबने अपनी आंखों से देखा है, 2०13 की उस भयंकर जलप्रलय से मची त्रासदी के बाद उत्तरकाशी मुख्यालय सहित गंगोत्री से डुंडा तक जो तटवर्ती क्षेत्र प्रभावित हुए उनके फिर से संवरने की किसी को उम्मीद भी नही थी। जिन लोगों के घर मकान बच भी गए वो यहां रहने को राजी नही थे, लोग यहां से पलायन करने लगे। उत्तरकाशी में ये विकट संकट की घड़ी थी। लेकिन तत्कालीन उत्तराखंड सरकार और उत्तरकाशी से स्थानीय विधायक रहे विजयपाल सजवाण के दृढ़ संकल्प और मजबूत इच्छाशक्ति के बूते उजाड़ हो चुके जिला मुख्यालय एवं पूरी गंगा घाटी को फिर से संवारने का जो अभूतपूर्ण प्रयास किया गया वो हम सबके सामने दिख रहा है। पुनर्निर्माण के अलावा कई अन्य चुनोतियाँ भी थी जिसमे उत्तरकाशी से गंगोत्री तक सड़क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, गंगोत्री धाम एवं आसपास ठहरे यात्री वहीं फस गये ,किसानों की फसल बिना ट्रांसपोर्ट के बर्बाद हो रही थी, घाटी के बिभिन्न गांवों में रसद आपूर्ति की सबसे बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई, लोगों की आवाजाही बंद हो गई, इस तरह की समस्याओं से घिरे क्षेत्र में श्री विजयपाल सजवाण जी के अभूतपूर्ण प्रयासों से यहां हेलीकॉप्टर सेवा प्रारम्भ की गयी जिसमे यात्रियों को सुरक्षित करने के अलावा घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में रसद आपूर्ति की गई, इसके अलावा स्थानीय किसानों को बड़ी राहत देते हुए उनकी फसल का उचित मुआवजा सरकार द्वारा दिया गया। प्राथमिक स्तर पर राहत देने के अलावा जो दीर्घकालीन पुनर्निर्माण की चुनोती सामने थी उसमें सरकारी मानक आड़े आ रहे थे लोगों के भवन के पुनर्निर्माण में जो धनराशि सरकार द्वारा नियत थी वो बहुत कम थी जिसमे श्री विजयपाल सजवाण जी ने मुख्यमंत्री से मिलकर आपदा के मानकों से इतर तत्कालीन समय के लिए अलग से मानक तय किये जिसमे प्रभावित लोगों को पुनर्निर्माण के लिए उचित धनराशि सरकार द्वारा दी गई। गंगोत्री से डुंडा तक जो तटवर्ती क्षेत्र उजाड़ हो चुके थे उनके लिए भारी बजट स्वीकृत कर बाढ़ सुरक्षा के महत्वपूर्ण कार्य पूरी विधानसभा क्षेत्र में करवाए गये। उत्तरकाशी शहर में जो मजबूत सुरक्षा दीवार आज खड़ी है, उसी के साये में आज लोग सुकून की नींद सो रहे है। घाटी के अनेक गांवों में सड़क मार्ग एवं कई महत्वपूर्ण रुपुल भी उस भयंकर जलप्रलय में बह गए थे, लेकिन अपनी काम करने की लगन और निरंतर भागदौड़ के दम पर श्री सजवाण जी ने गंगोत्री विधानसभा के अंतर्गत लगभग 16 पुल स्वीकृत करवाने के अलावा 65 से भी अधिक रुसड़कों पर पुनर्निर्माण, नवनिर्माण एवं सुधारीकरण कार्य करवाये। ये उसी का परिणाम रहा कि जिस मजबूती और तत्परता से उत्तरकाशी में सुरक्षात्मक कार्य हुए है, उससे यहां का जनजीवन फिर से पटरी पर उतर पाया। वरना उत्तराखंड के अनेक जगहों पर 8 बरस बाद आज भी बाढ़ के घाव साफ दिखते है। उस भयंकर प्रलयकारी बाढ़ के बाद आज उत्तरकाशी जिस स्वरूप में उभरा है ये उन्ही प्रयासों का परिणाम है जो तत्कालीन समय के अनुरूप किये गए।
आज के ही दिन उस भयंकर विनाशकारी बाढ़ में केदारघाटी एवं गंगाघाटी में हजारों की संख्या में यात्रियों और स्थानीय लोगों ने अपनी जान गंवाई है। जिन लोगों की उस विनाशकारी बाढ़ मे जान गई उन सभी दिवंगत आत्माओं को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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