देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। राज्य में मोदी के नाम पर सत्ता में आई प्रचंड बहुमत की सरकार ने अपने अभी तक के शासनकाल में एक भी ऐसा काम नहीं किया जिससे कि वह राज्य की जनता का दिल जीत पाये? अब विधानसभा चुनाव होने में मात्र कुछ महीनों का समय रह गया है ऐसे में राज्यवासी भाजपा के चंद दिग्गज नेताओं के लच्छेदार भाषणों की भावनाओं में बह जायेंगे ऐसा अभी तक तो मुश्किल ही नजर आ रहा है? चार साल में आवाम का दिल न जीत पाने वाली भाजपा सरकार के सामने कोरोना काल में कोरोना मरीजों की मौतें व मरीजों को बैड न दिला पाने का एक बडा डर भी सताने लगा है और यही कारण है कि भाजपा के चंद बडे नेता व आरएसएस के बडे पदाधिकारी उत्तराखण्ड में एक बार फिर भाजपा की सत्ता कैसे वापस आयेगी इसको लेकर गुप्त मंथन में जुटे हुये हैं लेकिन उन्हें राज्य के अन्दर आवाम के मन में पैदा हो रखी एक बडी नाराजगी उनका बीपी बढाये हुये है?
उल्लेखनीय है कि बंगाल में मिली करारी हार से तिलमिलाही भाजपा हाई कमान 2०22 में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड में हार का स्वाद नही चखना चाह रही है। यदि बात उत्तराखंड राज्य की जाय तो अर्धशतक से ज्यादा विधायक भाजपा के पास है। लेकिन इनमें भी कांग्रेस पृष्ठभूमि के विधायक भी है जिनमें से कुछ कभी भी दल बदल सकते हैं? संघ व भाजपा हाई कमान लगातार गुप्त सूचनाओं के माध्यम से पार्टी का रिपोर्ट कॉर्ड तैयार कर रहे हैं,इनमें से भी आधे से अधिक विधायक,मंत्री नाराज चल रहे है? भाजपा की संघ से बढती दूरियाँ भी यही बयां कर रही है कि राज्य में जो कुछ चल रहा है उससे जनता खुश नही है? विकास कार्य ठप है,तो कोरोना महामारी ने कोहराम मचा रखा है। जिस ढंग से सत्ता तीरथ सिंह रावत के पास है,जो हर मोर्चे पर विफल हो रही है उससे यही लगता है कि 2०22 का जो रास्ता भाजपा अस्थायी राजधानी से तय करेगी वह 2०24 में भी बहुत बडी उलट पलट कर सकती है? उत्तराखण्ड में प्रचंड बहुमत की सरकार को लेकर आवाम के मन में दिखाई दे रही एक बडी नाराजगी की गूंज लम्बे समय से संघ भी सुन रहा है? सवाल उठ रहे हैं कि बेशक हाईकमान ने त्रिवेंद्र से तीरथ को ताज दिया लेकिन वे आक्रामक नही हो पाये है। कुछ दागी अधिकारियों व चापलुसों की लम्बी चौड़ी फेरहिस्त के बीच मुखिया शायद उनके चक्रव्यूह में फंसे हुये हैं जहां से उन्हें बाहर आने का रास्ता नजर नहीं आ रहा? ऐसे में भ्रष्टाचार मुक्त राज्य की परिकल्पना करना भी अपने आप में गुनाह है? सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार जब राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री राज्यवासियों दिल नहीं जीत पा रहे हैं तो फिर 2०22 के मिशन को भाजपा कैसे फतह करेगी इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है?
