भाजपा के डूबते जहाज को बचा पायेंगे तीरथ?

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हुजूर चुनाव लडे तो भीतरघात की बडी आशंका!
तो क्या भाजपा की चुनावी नैय्या युवा सांसद लगायेंगे पार!!
देहरादून(मुख्य संवाददाता)। उत्तराखण्ड में चार साल तक सत्ता चलाने वाले त्रिवेन्द्र सिंह रावत के राज में प्रदेश के अन्दर भाजपा की छवि प्रचंड बहुमत होने के बावजूद भी आज तक नहीं चमक पाई जिसके चलते सांसद तीरथ ंिसह रावत को उत्तराखण्डं की सत्ता सौंपी गई तो यह उम्मीद जगी थी कि शायद राज्य के अन्दर तीरथ सिंह रावत भाजपाईयों में एक बडा जोश भर देंगे लेकिन अपने तीन माह के कार्यकाल में वह पार्टी और राज्य को एक नई दिशा देने में सफल नहीं हो पाये हैं ऐसे मंे सवाल उठने शुरू हो गये हैं कि चार साल से जो भाजपा का ग्राफ राज्य के अन्दर जिस तरह से घटता जा रहा था उस ग्राफ को तीरथ उभार पायेंगे लेकिन अब भाजपा के अन्दर भी यह आशंकायें पनपने लगी है कि क्या पार्टी के डूबते जहाज को तीरथ बचा पायेंगे? दिल्ली में बैठे भाजपा व संघ के कुछ बडे पदाधिकारियों को आशंका है कि अगर मुख्यमंत्री को उपचुनाव लडाया गया तो उत्तराखण्ड के कुछ बडे भाजपा नेता भीतरघात का खेल खेलकर उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द खण्डूरी की तरह हरवा सकते हैं? इसी के चलते अब चर्चाओ का बाजार उत्तराखण्ड के अन्दर तेज हो गया है कि क्या विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा हाईकमान उत्तराखण्ड में भाजपा की चुनावी नैय्या पार कराने के लिए उस युवा सांसद को मैदान में उतार सकते हैं जो राज्य के कुछ बडे नेताओं की आंखों की हमेशा किरकिरी बने रहते हेैं और उन्होंने इस सांसद को मुख्यमंत्री न बनाने के लिए भी पर्दे के पीछे से कुछ माह पूर्व खेल खेला था?
राजनीति भी अजब गजब की तरह ही है। कल तक जिसे तुरूप का इक्का माना जाता था,वह फिसडी साबित हो तो गूँज बहुत दूर तक बिना हवा के ही चली जाती हैं? ‘चार साल बडे बेमिसाल’ त्रिवेंद्र सिंह रावत की सत्ता छीन गयी और अब तीरथ सिंह रावत के पास राज्य की बागडोर है तो वह भी उन्ही की बोई फसल को काट रहे है? हालांकि दिल्ली में बैठे आलाकमान ने उन्हें वास्तविक स्थिति में कमल खिलाने के लिए सत्ता सौपी थी। तीन माह से अधिक समय गुजर गया है लेकिन तीरथ सिंह रावत हर मोर्चे पर विफल हो रहे है? वे यदि एक शब्द गलत बोल जाये तो उनके विरोधी ही सोशल मीडिया पर धज्जियां उड़ाने में कोर कसर नहीं छोड रहे है और सरकार के तंत्र को इस बात की भनक भी नहीं लग पा रही कि आखिरकार कौन ऐसे चेहरे हैं जो राज्य के मुख्यमंत्री को सोशल मीडिया व राज्य की जनता के सामने कमजोर मुख्यमंत्री साबित करने के लिए चक्रव्यूह रचकर बडा खेल खेलने में जुटे हुये हैं? अब राज्य के अन्दर इस बात को लेकर चर्चाओं का बाजार शुरू हो गया है कि आखिरकार मुख्यमंत्री आने वाले समय में उपचुनाव लडेंगे या नहीं? बहस यह भी छिड रही है कि अगर मुख्यमंत्री को चुनाव लडवाया गया तो वह कहां से चुनाव लडेंगे? चर्चाएं यहां तक हैं कि दिल्ली मंे बैठे भाजपा व संघ के कुछ बडे पदाधिकारियों को इस बात की पूरी आशंका है कि अगर तीरथ सिंह रावत विधानसभा का उपचुनाव लडे तो पार्टी के ही कुछ बडे नेता पर्दे के पीछे से उन्हें चुनाव हराने का ताना-बाना बुन सकते हैं?
यहां यह भी आशंका उठ रही हैं कि 2022 में तीरथ सिंह रावत को कप्तानी सौपी गयी तो इस बार चुनावी परिणाम पार्टी के लिए बडे घातक सिद्ध हो सकते हैं? यही कारण है कि दिल्ली में बैठे भाजपा व संघ के कुछ बडे पदाधिकारी 2022 में भाजपा की चुनावी नैय्या को पार लगाने के लिए बडे मंथन में जुटे हुये हैं। चर्चाएं यहां तक है कि चुनावी समर से पहले भाजपा हाईकमान उत्तराखण्ड की सत्ता पर काबिज होने के लिए एक युवा सांसद को चुनाव की कमान सौंपकर उन्हें मैदान में उतार सकते हैं? यह युवा सांसद उत्तराखण्ड के विकास के लिए वर्षों से बडा सपना देखते आ रहे हैं और उसे पूरा करने के लिए वह हमेशा अगली पंक्ति में खडे रहते हैं? हालांकि यह सब अभी एक चर्चाएं ही हैं और भविष्य के अन्दर भाजपा हाईकमान उत्तराखण्ड में होने वाले चुनाव को लेकर क्या खाका तैयार करेंगे यह तो भविष्य के गर्त में कैद है लेकिन अभी तो गेंद तीरथ सिंह रावत के पाले में है वे क्या गुगुली फेंक कर अपने गुप्त विरोधियों को आउट कर पाते हैं या उन्हें बांउड्री मारने का मौका देते हैं ये सोचना समझना मुखिया का काम है,क्योंकि राजनीति में लम्बी पारी खेलनी है तो एककाद कटु फैसले लेने की क्षमता अवश्य ही जनता जनार्दन का विश्वास जीता जा सकता है। यदि कुछ चापलुसों की गुप्त सलाहों पर ही हुजूर को राजनीति करनी है तो उसका भविष्य स्वर्णिम हो कह पाना जल्दबाजी ही होगी। फैसला आखिर हुजूर के हवाले ही है?

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