तो मदन कौशिक ही सही सलाहकार?

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में पहाड़ की राजनीति से अलग तराई क्षेत्र के बड़े नेता चार बार से विधायक और भाजपा संगठन के नये मुखिया मदन कौशिक यूँ तो सदन हो या सड़क, सरकार में हो या विपक्ष मदन कौशिक ने अपनी काबलियत सिद्ध करने का कोई मौका नही चुका है। 2००2 में उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गजों को परास्त कर पहली बार सदन में पहुंचे मदन कौशिक ने नारायण दत्त तिवारी सरकार को कई मुद्दों पर घेर कर ही अपनी काबिलियत का परिचय करा दिया था। 2०12 में सत्ता में आयी भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बन कई मंत्रालयों से कई नई योजनाओं को तो धरातल पर उतारा ही था वही मूल निवास प्रमाण पत्र पर हुये भारी विवाद के बाद बानी कमेटी का चेयरमैन बन तराई क्षेत्र के लोगो तो बड़ा लाभ दिलाने में कामयाबी हांसिल की। उसके बाद मदन कौशिक पर पहाड़ विरोधी होने का भी आरोप लगा। लेकिन 2०12 से 2०17 तक खंडूरी व निशंक दोनों मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार के रूप में ही मदन कौशिक की गिनती होती रही। निशंक व मदन कौशिक भले ही धुर विरोधी हो उसके बाद भी 2०1० के कुम्भ को साथ साथ सफल करना रहा हो या अन्य कोई भी फैसले मदन कौशिक की भूमिका साफ नजर आयी। सदन में भी सरकार को कई बार मदन कौशिक के आक्रामक रुख ने विपक्ष को पीछे धकेल दिया। त्रिवेंद्र सरकार में तो मदन कौशिक को डिप्टी सीएम ही कहा जाता था। मदन कौशिक की एक भी सलाह के बिना पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत कोई फैंसला नही लेते थे। वर्तमान मुख्यमंत्री शुरू में भले ही मदन कौशिक से कुछ तल्ख दिखे लेकिन राष्ट्रीय नेताओं के दिल्ली लौटते ही तिरथ सिंह रावत का रुख बदला है या स्वयं तिरथ ने स्वीकार किया है कि मदन कौशिक एक अनुभवी व अच्छे सलाहकार है। ताजा ही मामला सामने भी आया जब तिरथ सिंह रावत लॉकडाउन की स्तिथि से निपटने में अपने को अक्षम से महसूस कर रहे थे ऐसे में मदन कौशिक के साथ हुई लम्बी वार्ता के बाद जो चर्चा सामने आयी है कि सरकार लॉक डाउन को लेकर कुछ राहत भरे फैसले ले सकती है। उससे यह स्पष्ट होता है कि मदन कौशिक द्वारा सरकार को दी गयी सलाह की कारगर लगी और जल्द प्रदेश के लिये अच्छी खबरे भी सामने आ सकती हैं। इसको चुनावी तालमेल कहें या मदन कौशिक की काबलियत जो हर परिस्तिथि में अपनी पार्टी के संकटमोचन बन कर सामने आ जातें हैं।

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