गुप्तकाशी और जोशीमठ पहुंचे पत्रकार उमेश

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उत्तराखण्ड। कोविड के इस काल मे वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी उमेशकुमार लगातार पहाड़ी इलाको में कोरोना राहत सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में आज सुबह 9.3० बजे हेलीकॉप्टर के माध्यम से उमेशकुमार सबसे पहले रुद्रप्रयाग जिले के चारधाम हेलीपैड गुप्तकाशी पहुंचे और उसके बाद साढ़े दस बजे जोशीमठ पहुंचे जहाँ स्थानीय सामजिक कार्यकर्ताओ और युवाओ से मुलाकात कर उन्होंने दुर्गम इलाको के लिए ऑक्सीमीटर , थर्मल स्केनर पैरासिटामोल , मास्क आदि राहत सामग्री सौंपी । साथ ही गरीब परिवारों तक राशन किट पहुंचाने का काम भी लगातार कर रहे हैं।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमेशकुमार ने कहा कि उनके लिए एक एक जान कीमती है उसको बचाने के लिए वो जमीन से लेकर आसमान सभी रास्तों से पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस काल मे सभी के छोटे छोटे प्रयासों से ही हम कोरोना पर विजय पाएंगे। उन्होंने कहा कि ये समय राजनीति का नही है , एक दूसरे की टांग खिंचाई का नहीं है ,बल्कि सभी को साथ मिलकर उत्तराखण्ड से इस कोरोना को भगाना है। आपको बता दें कि कोरोना की इस दूसरी लहर ने पहाड़ो को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था । गाँव के गाँव कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए थे ऐसी स्थिति में पहाड़ परिवर्तन समिति के संस्थापक पत्रकार उमेशकुमार ने अपनी टीमो को जमीनी मार्ग से कुमाऊँ और गढ़वाल मंडल के लिए रवाना किया और स्वयं त्वरित राहत पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से पहाड़ों के जिलों में पहुँचे क्योंकि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण और कई इलाको में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं के कारण सड़क मार्ग बाधित होने के वजह से इन जिलों तक सड़क मार्ग से त्वरित राहत पहुंचाना सम्भव नही था इसलिए उमेशकुमार ने पहाड़ो में राहत पहुंचाने के लिए दोनों ही विकल्प चुने । जहाँ पहाड परिवर्तन समिति की गढ़वाल मंडल और कुमाऊँ मण्डल की टीम के सदस्य पैदल पैदल कई गाँवो तक पहुंचे वहीं उमेशकुमार देहरादून से लगातार उनतक और जिलों तक लगातार राहत समाग्री पहुंचाते रहे।
चमोली ,रुद्रप्रयाग , उत्तरकाशी , टिहरी , अल्मोड़ा , बागेश्वर , पिथौरागढ़ , पौडी , श्रीनगर , त्यूणी , गुप्तकाशी और जोशीमठ तक उमेशकुमार ने हवाई मार्ग से राहत सामग्री पहुंचाई वहीं पहाड परिवर्तन समिति की टीम पैदल रास्तों से पहाड़ो के दुर्गम से दुर्गम इलाको में राहत सामग्री के साथ पहुंची। आपको बता दें कि पिछली बार कोरोना की पहली लहर के दौरान जब हजारों की सँख्या में प्रवासी विभिन्न राज्यो में फंसे थे उस दौरान भी उमेशकुमार ने हवाई मार्ग और बसों से प्रवासियों को उनके घरों तक पहुंचाया ।

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