उत्तराखण्ड में आवाम में दिख रहा गुस्सा गुनाहगार तो हो सरकार!

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भ्रष्टाचार, घोटाले, फर्जी मुकदमों, अफसरशाही की तानाशाही पर चुप्पी कब तक?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्डवासियों ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर 2017 में भाजपा को प्रचंड बहुमत की सरकार देकर सपना संजोया था कि राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार, घोटाले व तानाशाही का तांडव देखने को नहीं मिलेगा लेकिन पिछले चार साल से त्रिवेन्द्र राज में जिस तरह से राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार, घोटालों व अफसरशाही की तानाशाही का तांडव राज्यवासियों को देखने पडा और त्रिवेन्द्र सरकार में पनप रहे भ्रष्टाचार को उजागर करने पर जब मीडिया पर फर्जी मुकदमें व राजद्रोह जैसे मुकदमें दर्ज किये गये तो राज्यवासियों के मन में यह सवाल खडे होने शुरू हो गये थे कि वह लोकशाही में रह रहे हैं या फिर राजशाही में? चार साल बाद भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाकर एक बार फिर राज्य में सत्ता पर काबिज होने का जो पासा फेंका है वह पासा कोरोना काल में मुख्यमंत्री के लिए अभिशाप बनता हुआ दिखाई दे रहा है? अब तो उत्तराखण्ड में आवाम के अन्दर नये मुख्यमंत्री की कार्यशैली को लेकर भी गुस्सा पनपना शुरू हो गया है और यह गुस्सा कोरोना में मरे हजारों लोगों के परिवारों में पनप रहा है उनके मन में प्रचंड बहुमत की सरकार को लेकर यह ज्वालामुखी फूट रही है कि अगर सरकार का स्वास्थ्य सिस्टम सही होता तो आज उनके अपनों को हमेशा के लिए आकाल मौत में न समाना पडता? तीन माह के कार्यकाल में तीरथ सिंह रावत ने ऐसा कोई करिश्मा करके नहीं दिखाया जिससे कि आवाम के मन में एक संतोष होता कि उन्होंने राज्य में पनपे भ्रष्टाचार, घोटाले, फर्जी मुकदमें और अफसरशाही की तानाशाही को लेकर कोई बडा कदम उठाने का साहस दिखाया हो? आवाम के मन में इस बात को लेकर भी अब नाराजगी है कि गुनाहगार तो हो सरकार?
उत्तराखण्ड में चार साल तक त्रिवेन्द्र शासनकाल में जिस तेजी के साथ भ्रष्टाचार व घोटाले पनपे और उस पर उन्होंने जिस अंदाज में चुप्पी साधी उसने राज्यवासियों के मन में एक बडा आक्रोश पैदा कर रखा था और तो और उनके शासनकाल में कुछ अफसरों ने जिस तरह से राज्य के अन्दर तानाशाही का तांडव किया वह किसी से छुपा नहीं है। त्रिवेन्द्र रावत ने अपने राज में सरकार को आईना दिखाने वाले पत्रकारों के खिलाफ जिस तरह से फर्जी मुकदमें दर्ज कराकर अपने आपको राज्य का बादशाह समझकर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया वह किसी से छिपा नहीं है। त्रिवेन्द्र रावत ने रांची घुसकांड में अपने ऊपर उठ रहे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कुछ पत्रकारों पर फर्जी राजद्रोह का मुकदमा कायम कराकर जिस तरह से उन्हें अपनी सत्ता की हनक दिखाई उससे साबित हो गया था कि राज्य के अन्दर लोकतंत्र नाम की चीज पर किस तरह से ग्रहण लग चुका है? भाजपा हाईकमान ने तीरथ सिंह रावत को उत्तराखण्ड का नया मुख्यमंत्री बनाया तो राज्यवासियों के मन में एक आशा की किरण जागी थी कि वह भ्रष्ट तंत्र पर बडा प्रहार करेंगे और राज्यवासियों को संदेश देंगे कि उनके शासनकाल में वो सबकुछ नहीं होगा जो त्रिवेन्द्र राज में चार साल तक होता रहा था? लगभग तीन माह से तीरथ सिंह रावत ने राज्य की कमान संभाल रखी है लेकिन अभी भी शासन, प्रशासन व पुलिस महकमें में दर्जनों अफसर पॉवरफुल बने हुये हैं और राज्य के अन्दर पनपे भ्रष्टाचार व एक भी घोटाले पर नये मुख्यमंत्री ने कोई बडा प्रहार किया हो ऐसा देखने को नहीं मिला है? ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक सिर्फ चेहरा बदलने से राज्य में चार साल से तार-तार हो रखे लोकतंत्र बहाल हो गया है? गजब बात तो यह है कि तीरथ राज में भी कुछ पॉवरफुल अफसर अपने गुट बनाकर अपने चहेते अफसरों को जिले व पुलिस में तैनाती दिलाने के मिशन में पर्दे के पीछे से खेल खेलने में लगे हुये हैं? उत्तराखण्ड के अन्दर राज्य के कुछ अफसर अपने आपको कमजोर व डरा हुआ महसूस कर रहे हैं और उनका यहां तक आरोप है कि उनके चंद अफसर जो उन्हें हमेशा से नापंसद करते आये हैं वह उनकी पोस्टिंग में जबरदस्त तरीके से अडंगा लगा रहे हैं? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री द्वारा किये जाने वाले तबादले की सूची से राज्य में उनका विजन साफ हो जायेगा। बहस छिड रही है कि इन तबादलों में सरकार ने अगर स्वच्छ छवि के अफसरों को तैनात करने के लिए अपना पैमाना तय किया तो राज्यवासी चार साल में अपने साथ हुये राजशाही के तांडव को भूलने की ओर अपने कदम आगे बढा सकती है और अगर राज्य में दागी रहे कुछ अफसरों को प्रशासन व पुलिस महकमें में तैनाती दी गई तो यह तीरथ रावत राज के शासनकाल को कटघरे में लाकर खडा कर सकता है? अब देखने वाली बात होगी कि क्या राज्य के नये मुख्यमंत्री राज्यवासियों को त्रिवेन्द्र राज में मिले राजशाही के जखमों पर मरहम लगाने की दिशा में कोई बडा कदम उठाने का साहस दिखायेंगे?

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