स्वास्थ्य विभाग का गजब तमाशा!

0
131

करोड़ो के सचल चिकित्सा वाहनों की पांच सालों से नही ली सुध
चंद्र प्रकाश बुड़ाकोटी
देहरादून। उतराखण्ड में सरकार और स्वास्थ्य बिभाग दुरस्त पहाडी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए कभी भी गंभीर नही रही।अंदाजा इससे लगा सकते है बड़े-बड़े सपने दिखाकर स्वास्थ बिभाग ने तेरह सचल चिकित्सा वाहन करोड़ो में खरीदे थे वे आज सालो से विभागीय कार्यालयों में जंक खा रहे है टायर भी गलने लग गए है,किसी को कोई फर्क ही नही।यह हालात तब है जब स्वाथ्य मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री के पास है। बताते चले कि उतराखण्ड में स्वास्थ्य बिभाग ने पहाड़ी जनपदों में घर के पास ही तमाम चिकित्सीय सुविधा मिल सके इस उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत दो हजार आठ में तेरह करोड़ के तेरह सचल चिकित्सा वाहन खरीदे थे। इन वाहनों में चिकिसीय जांच की एक्सरे,अल्ट्रासाउंड सहित हर छोटी बड़ी मशीने लगाई गई थी।उद्देश्य था राज्य के लोगो को घर के पास ही तमाम चिकित्सकीय सुविधा मिल सके। कुछ समय तो ये वाहन सही चले बाकायदा इनका रोटेशन बनाया गया,लोगो को बड़ी राहत मिली। इन सचल चिकित्सा वाहनों को प्रदेश के तेरह जनपदों में भेजा गया था छोटे छोटे बाजारों सड़क मार्ग पर जाने के लिए सीएमओ इनका रूट चार्ट तैयार करते थे।लेकिन सालो से अब ये सड़क पर नही चलते कारण सरकार शासन से कोई दिशा निर्देश व बजट की व्यवस्था न होना। उतराखड में कोरोना गांव गांव तक फैल गया है चिकित्सीय व्यवस्था का गांव तक पहचाना चुनौती पूर्ण है। अगर यह वाहन चलते होते तो कोरोना काल मे यह बड़े मदद गार साबित हो सकते थे। स्वास्थ्य विभाग और सरकार की निष्क्रियता का अंजाम ही है बिगत कई सालों से ये करोड़ो के प्राथमिक सुबिधाओं से युक्त वाहन बिभाग के कार्यालयों में जंक खा रहे है।सरकार की तो बात ही क्या करनी,जब बिभाग को ही इनकी चिंता नही है धूप बारिश में खड़े खड़े इन सचल चिकित्सा वाहनों में जंक लग गया,जांच की मशीन गायब हो गई।सालों से वाहनों एक ही जगह खड़े होने के कारण टायर भी गलने लगे।सरकार अगर सच मे स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति गंभीर होती तो आज करोड़ो रुपये यू ही बर्बाद नही होते।

LEAVE A REPLY