नियुक्ति को प्रशिक्षित बेरोजगारों का धरना

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देहरादून। नियुक्ति व संशोधित नियमावली का शासनादेश जारी किये जाने की मांग को लेकर बीएड टीईटी प्रथम प्रशिक्षित महासंघ से जुड़े हुए प्रशिक्षित बेरोजगारों ने शिक्षा निदेशालय में धरने को जारी रखते हुए प्रदर्शन किया और आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दी।
यहां महासंघ से जुड़े हुए प्रशिक्षित बेरोजगार शिक्षा निदेशालय पर अध्यक्ष राजीव राणा के नेतृत्व में इकटठा हुए और वहां पर प्रदर्शन कर धरना दिया और आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया। इस अवसर राजीव राणा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा सेवा नियमावली में किये गये पंचम संशोधन को यदि राज्य सरकार निरस्त नहीं करती है तो महासंघ उग्र आंदोलन करेगा और लगातार उनके हितों की अनदखी की जा रही है जिसे किसी भी दशा में सहन नहीं किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती सेवा नियमावली में बीएड वर्षवार ज्येष्ठता को सम्मिलित करते हुए संशोधित नियमावली का शासनादेश जारी किया जाना चाहिए और सरकार को इस दिशा में जल्द ही निर्णय लेना होगा। वक्ताओं ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में समस्त रिक्त पदों पर बीएड ज्येष्ठता और श्रेष्ठता के आधार पर वर्षवार शीघ्र नियुक्ति जारी किया जाये। वक्ताओं ने कहा कि शीध्र ही सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई तो महासंघ उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा और जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही संशोधित नियमावली का शासनादेश जारी नहीं किया गया तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति हेतु इसी माह को उत्तराखंड सरकार द्वारा सेवा नियमावली को संशोधित कर चयन प्रक्रिया में उनके बिन्दुओं में बदलाव किया गया है जिससे प्रदेश के हजारों बीएड टीईटी प्रशिक्षित बेरोजगार आहत है, क्योंकि वर्तमान नियमावली में प्रशिक्षिण वर्ष की ज्येष्ठता को आधार नहीं बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश भर के बेरोजगार उग्र आंदोलन कर आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगें। उनका कहना है कि लगातार संघर्ष किये जाने क बावजूद भी सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जिसे सहन नहीं किया जायेगा। उनका कहना है कि शिक्षा निदेशालय में धरना जारी है, लेकिन किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली है जो चिंता का विषय है। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में टीईटी की श्रेष्ठता को नियुक्ति का आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जबकि एनसीटीई ने सुप्रीम कोर्ट में अपने एक हलफनामें में यह स्पष्ट किया है कि टीईटी मात्र एक पालता परीक्षा है इसे चयन का आधार नहीं बनाया जा सकता है जो कि न्यायिक सिद्धांतों के विरूद्ध है और सरकार के इस तानाशाही निर्णय से प्रशिक्षित आहत है। इस अवसर पर अनेक प्रशिक्षित बेरोजगार शामिल थे।

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