अधिकारियों व कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

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देहरादून। प्रदेश सरकार की कर्मचारी विरोधी नीति एवं एक दिन का वेतन काटे जाने के विरोध में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों व शिक्षकों ने दूसरे दिन काली पटटी बांधकर कामकाज निपटाया और अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के संरक्षक मंडल के सदस्यों ने कहा कि पूरे प्रदेश में विरोध दर्ज किया गया है और 15 फरवरी को कैडिंल मार्च निकालने का निर्णय लिया।
यहां विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी, शिक्षक अपने अपने कार्यालयों में पहुंचे और जहां पर उन्होंने अपनी मांगों के समाधान के लिए बाजूओं में काली पटटी बांधकर विरोध जताया और अपना कामकाज निपटाया और यह विरोध दो दिन तक चलेगा। वक्ताओं ने कहा कि मकान किराए भत्ते की देयता 8, 12 और 16 प्रतिशत के अनुरूप मंजूर करते हुए अन्य देय भत्तों में बढ़ोत्तरी की जाए। वक्ताओं ने कहा कि राज्य निगम कर्मचारियों के वर्तमान में लागू एसीपी की व्यवस्था के स्थान पर पूर्व व्यवस्था के अनुरूप 1० साल, 16 साल और 26 साल की सेवा पर प्रोन्नत वेतनमान दिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि ऊर्जा निगम में पूर्व व्यवस्था पर वेतन मैट्रिक्स के आधार पर एसीपी दी जाए और सभी शिक्षकों को पूरे सेवाकाल में तीन प्रोन्नति और तीन एसीपी का लाभ अनिवार्य किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में राज्य कर्मियों के पक्ष में जारी होने वाले शासनादेशों को एक समान रूप से सभी निगम, निकाय, संस्थान, प्राधिकरण में लागू किया जाए लेकिन इस ओर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है ।
वक्ताओं ने कहा कि शिथिलीकरण नियमावली 2०1० को पूर्व की तरह लागू किया जाए और नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए तथा आयुष्मान योजना के तहत आने वाले सभी कार्मिकों को सरकारी चिकित्सालय से रेफर होने की अनिवार्यता की बाध्यता खत्म कर एक समान नीति को लागू किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अन्य वर्गों की तरह स्टाफिंग पैटर्न का लाभ देते हुए ग्रेड वेतन 42०० का लाभ दिया जाए और राजकीय वाहन चालकों को स्टाफिंग पैटर्न के प्रथम स्तर ग्रेड वेतन 24०० को नजरअंदाज कर 28००, 42०० और 45०० को मंजूर किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि एक जनवरी 2००6 या उसके बाद सीधी भर्ती या पदोन्नति पर कर्मचारियों के शुरूआती वेतन का निर्धारण वित्त विभाग के ताजा शासनादेश के आधार पर हो और आउटसोर्स कर्मियों को समान कार्य के अनुरूप समान वेतन दिया जाए।

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