खनन में सिंडिकेट का होगा आगाज!

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सरकार की नियमावली एक पत्र से ही धाराशाही?
गजबः पहले से ही निविदा न आने का दिख गया सपना!!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पिछले सत्रह सालों से सभी सरकारों पर शराब व खनन को लेकर उंगलियां उठती रही हैं और सबसे ज्यादा आरोपों की बौछार कांग्रेस शासनकाल में हरीश रावत सरकार पर हुई थी और भाजपा ने हमेशा रावत सरकार को शराब व खनन के मुद्दे पर घेरा। डबल इंजन की सरकार ने दावा किया था कि खनन के काम में पारदर्शिता लाने के लिए खनिज क्षेत्र व लॉट का टेंडर ई निविदा से किया जायेगा इसके लिए सरकार ने कैबिनेट में खनिज को लेकर नियमावली भी बना दी लेकिन शासन के एक अफसर द्वारा लिखे गये पत्र से सरकार की मंशा पर ही सवालिया निशान लग गये हैं और सवाल उठ रहे हैं कि सरकार को पहले से ही कैसे सपना दिखाई दे गया कि ई-निविदा में अगर तीन बार किसी ने टेंडर न डाला तो उसके लिए शासन केेश-टू-केश प्रकरण देखेगा। शासन के इस पत्र से खनन के खेल में सिंडिकेट का आगाज होने की आशंका अब खुलकर दिखने लगी है? बहस इस बात की भी शुरू हो गई कि अगर सरकार के पास ई-निविदा में टेंडर नहीं भरे जाते तो उसके बाद ऐसा आदेश पारित करना था लेकिन ई-निविदा से पहले ही शासन के इस खत से सरकार की खनिज नियमावली कटघरे में आकर खडी हो गई।
उल्लेखनीय है कि डबल इंजन सरकार ने दावा किया था कि खनन के काम में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ई-निविदा से खनिज पट्टों की निलामी करेगी। सरकार ने अपने इस दावे को सच साबित करने के लिए कैबिनेट बैठक में खनिज नियमावली 2017 को हरी झण्डी दी थी। सरकार के इस फैसले से खनन का काम करने वालों को एक आशा की किरण दिखाई दी थी कि अब खनन माफिया इस व्यवसाय में अपना वर्चस्व कायम नहीं कर पायंेगे। सरकार हर मंच से ऐलान कर रही है कि उसने शराब व खनन के काम ई-निविदा से कराने के लिए हरी झण्डी दी है और ई-निविदा सह ई-निलामी की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होगी। खनन के काम में छोटे व्यवसाईयों ने अपनी दस्तक देने के लिए पूरा खाका तैयार कर लिया था लेकिन इसी बीच शासन के प्रमुख सचिव आनंद वर्धन ने भूतत्व एवं खनिकर्म इकाई उत्तराखण्ड को 12 अप्रैल में पत्र लिखा कि उन्हें यह कहने का निर्देश हुआ है कि किसी भी उपखनिज क्षेत्र/लॉट हेतु उत्तराखण्ड उपखनिज (परिहार) (संशोधन) नियमावली 2017 के प्रावधानानुसार ई-निविदा सह ई-नीलामी में राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम तीन निवदाकार प्राप्त न होेने की स्थिति में उक्त उपखनिज, क्षेत्र, लॉट हेतु राष्ट्रीय स्तर में कम से कम तीन बार ई-निविदा सह ई-नीलामी की प्रक्रिया पूर्ण कराने का कष्ट करें। पत्र मंे कहा गया है कि उक्त प्रक्रिया के उपरान्त भी अगर संदर्भित उपखनिज क्षेत्र, लॅाट हेतु न्यूनतम तीन अर्ह निविदाकार प्राप्त नहीं होते हैं तो केश-टू-केश प्रकरण शासन को संदर्भित करने का कष्ट करें। प्रमुख सचिव के इस पत्र से अब भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है और यह शंका भी उठ गई है कि सरकार ने अपनी नियमावली को ही एक पत्र के सहारे किस तरह से ढेर करके रख दिया है? बहस हो रही है कि आखिरकार जब अभी तक ई-निविदा का काम शुरू नहीं हुआ तो सरकार को कैसे यह सपना दिख गया कि खनिज के लॉट में कोई निविदा नहीं डालेगा तो उसके बाद केस-टू-केस उस प्रकरण को निपटाया जायेगा। इस पत्र से खुली आशंका हो गई है कि सरकार का यह आदेश कहीं न कहीं खनन के क्षेत्र में सिंडिकेट के लिए दरवाजा खोलने जैसा है? सरकार की मंशा पर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी हल्ला बोला है और कहा है कि डबल इंजन की सरकार का ध्यान ही शराब व खनन पर है लेकिन इसके बावजूद भी सरकार खजाना खाली होने का रोना रो रही है।

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