विश्व जल दिवस पर ग्रामीण युवाओं ने सरकार को दिखाया आईना

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यमकेश्वर के भेलडुंग गांव मे जल स्त्रोत  को सूखने से बचाने  के लिए की गई मुहिम लाई रंग
ग्रामीणों मे उत्साह, जल संरक्षण का लिया संकल्प
अमित सूरी
ऋषिकेश। पलायन का पर्याय बने उत्तराखण्ड राज्य के युवा अब अपनी पूर्वजों की धरती के संरक्षण को जागृत होने लगे हैं। उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य,शिक्षा और पानी की गम्भीर समस्या से जूझते लोगों को जब कोई सहारा नही मिला तो पहाड़ी ग्रामीण निवासियों ने पलायन का रास्ता अपनाया। किन्तु धीरे धीरे प्रवासियों को अपने पूर्वजों की माटी और उजड़ती तिबारियों की पीड़ा भी सताती रही।इसी क्रम में ऋषिकेश से मात्र एक घण्टे के सफर की दुरी पर बसे गाँव भेलडुंग के मूल निवासी विनोद जुगलान ने विश्व की नम्बर वन दुपहिया वाहन के पुर्जे बनाने वाली कम्पनी निक्स इण्डिया टूल्स में उच्च प्रबंधन से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लेकर न केवल समाज सेवा का रास्ता अपनाया बल्कि  पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पूर्ण रूप से समर्पित होगये।एक सप्ताह पहले उन्होंने अपने गाँव के संरक्षण पर अपने ग्रामीण बन्धुओं से फोन पर सम्पर्क साधा और गाँव बचाने की मुहिम की शुरुआत हो गयी। सप्ताह भर पहले सोशल मीडिया के माध्यम से जब सेना में कार्यरत स्थानीय निवासी धर्मेंद्र जुगलान ने गांव में पानी की किल्लत का समाचार पढ़ा तो वे स्वयं अवकाश लेकर गाँव पहुंच  गये और जलसंरक्षण  कर रहे स्थानीय बन्धुओं के सहयोग में जुट गए।देखते ही देखते मेहनत रंग लाई 2014 में बैरागढ़ आपदा की और बादल फटने की घटना से क्षतिग्रस्त प्राकृतिक जल स्रोत शिला गदन से बिजली के तीन पाइपों को जोड़कर एक बड़े पाइप में जोड़ दिया गया।इस कार्ययोजना अंजाम तक पहुंचाने में जहाँ स्थानीय निवासी रविन्द्र जुगलान ने अहम भूमिका निभाई वही दूसरी ओर पुरानी और जीर्ण शीर्ण हो चुकी पानी की डिग्गी  की मुरम्मत का कार्य सैनिंक भाई  धर्मेन्द्र जुगलान,जितेंद्र जुगलान,प्यारे लाल जुगलान और पर्यावरणविद के रूप में अपनी पहचान बना चुके विनोद जुगलान विप्र  ने किया।तीन दिन तक चले इस जल ऑपरेशन को युद्ध स्तर पर अन्जाम दिया गया। बहुत ही सावधानी पूर्वक किये गए इस जल संरक्षण की कार्य योजना को अंजाम तक पहुंचाने में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजाइन अहमदाबाद के जल संरक्षण विशेषज्ञ दिनेश शर्मा जुगलान,राजेश जुगलान,पर्यावरणविद विनोद जुगलान विप्र ने मार्गदर्शन किया।क्योकि जल संरक्षण के समय मूल स्रोत से छेड़छाड़ करने से प्राकृतिक जल स्रोत के सूखने का बड़ा खतरा था,जैसा कि अक्सर होता है। एक माह से चल रही पानी की किल्लत के बाद पुनः पानी लौटने पर गाँव में खुशी का माहौल है गांव में स्थापित पुरातन देवी मंदिर में भेली चढ़ाकर गुड़ का प्रसाद वितरित किया गया। भेलडुंग गाँव में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण अन्य प्रदेशों में प्रवास कर रहे सभी मूल निवासी अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में गाँव लौटेंगे जहाँ  नौ अप्रैल से 15 अप्रैल तक  आध्यत्मिक भागवत कथा और रात्रि में  ग्राम संरक्षण पर सामाजिक मन्थन होगा।साथ ही भेलडुंग गाँव को ‘हमारा गाँव, हमारी विरासत’ के तहत यमकेश्वर प्रखण्ड का पहला हरित ग्राम सहित इको विलेज बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।विदित हो कि विनोद जुगलान विप्र  राज्य के दो विद्यालयों को हरित विद्यालय बनाने के लिए प्रयासरत हैं जिनमें रायवाला का जूनियर हाई स्कूल और खदरी का राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान शामिल हैं।
इस अवसर पर रविन्द्र जुगलान,विनोद जुगलान विप्र, प्यारे लाल जुगलान,भारतीय सेना में सेवारत धर्मेन्द्र जुगलान,जितेंद्र जुगलान,राजेश जुगलान,प्रदीप जुगलान,ललित मोहन जुगलान,वेदकिशोर जुगलान,कृष्ण किशोर जुगलान,सुशीला देवी,प्रभा देवी,बीना देवी,गोली देवी,अंजू देवी,कुमारी आरती,भारत जुगलान, विशेष रूप से पहुंचे आशीष लखेड़ा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। पर्यावरणविद विनोद जुगलान ने इसे ग्रामीण युवाओं और मातृ शक्ति की सराहनीय पहल बताते हुए माँ भुवनेश्वरी की कृपा बताकर धन्यवाद किया और कहा कि देव भूमि पर मदिरा के प्रमोशन और जल संरक्षण पर सरकारी उपेक्षा के कारण पलायन निरन्तर जारी है पलायन रोकने हेतु मिल जुल कर उपाय करने की आवश्यकता है वरना पहाड़ो से जीवन समाप्त हो जायेगा।

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