अंधेरे में प्यासे पुलिस परिवार

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देहरादून। कितनी अजीब बात है कि जो पुलिस हर सरकारी विभाग की मुश्किल में उसका साथ देने के लिए आगे खडी होती है उस पुलिस को कुछ सरकारी विभाग इतना हल्के में लेते हैं कि उसकी फरियाद को सुनने के लिए भी वह आगे नहीं आना चाहते। ऐसा ही कुछ पिछले चौबीस घंटे से प्रेमनगर में पुलिस परिवारों के साथ देखने को मिल रहा है जो कि बिजली गुल होने से अंधेरे में तो हैं ही साथ ही उनका परिवार पानी की एक बूंद न आने से प्यासा हो रखा है लेकिन पुलिस वालों के परिवार का दर्द सुनने के लिए न तो वन विभाग आगे आया और न ही बिजली विभाग ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस राज्य के अन्दर कितनी कमजोर है।
उल्लेखनीय है कि बीते रोज मौसम खराब होने के बाद तेज आंधी के कारण प्रेमनगर थाने के पीछे स्थित सरकारी अस्पताल की दीवार ढह गई और उस पर दो पेड़ टूटकर भी जा गिरे जिससे बिजली की लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गई। दीवार पर पेड टूटने व बिजली की तारें क्षतिग्रस्त होने के बाद काफी इलाका अंधकारमय हो गया। पेड व बिजली की तारें टूटने की खबर वन विभाग व बिजली विभाग को दी गई लेकिन घंटो बाद भी कोई अफसर व विभाग का कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा जिसके चलते प्रेमनगर थाने के एक कर्मचारी ने दीवार पर गिरे दोनो पेडों को अपने रसूक से कटवा दिया और रास्ता साफ करवा दिया। बिजली विभाग ने सरकारी अस्पताल की बिजली तो शुरू करा दी लेकिन अस्पताल के ठीक सामने रहने वाले पुलिस के कई परिवारों के घरो में बिजली पहुंचाने के लिए विभाग के अफसरों ने अपने कदम आगे नहीं बढाये जिसके चलते पिछले चौबीस घंटे से पुलिस के लगभग आठ-दस परिवार अंधेरे में तो जीवन जी रहे हैं साथ ही बिजली न आने के कारण पानी की आपूर्ति न होने पर वे प्यासे दिखाई दिये। आज फिर पुलिस के एक-दो परिवारों ने वन विभाग से पेडों को लेकर शिकायत की तो उनका कहना था कि पेड तो अब कट ही गये हैं ऐसे में अब वहां उनका कोई काम नहीं रह गया है इस पर बिजली विभाग के अफसरों से जब बिजली न आने की शिकायत की गई तो उनका कहना था कि पहले वन विभाग मौके पर आकर पेड काटे उसके बाद ही वह पुलिस परिवारों के घरों की बिजली शुरू कर पायेंगे। इस पर पुलिस परिवार काफी हैरान व परेशान है कि जब वन विभाग का मौके पर कोई काम ही नहीं है तो फिर कैसे वन विभाग के अफसर मौके पर आयेंगे। कुल मिलाकर पिछले 24 घंटों से पुलिस परिवार अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर है तो पानी की एक-एक बूंद के लिए भी उन्हें तरसना पड़ रहा है। बहस इस बात को लेकर भी हो रही है कि जो पुलिस सडकों व जंगलों में चौबीस घंटे सडी-गली लाशों व हर परिवार को सुरक्षा देने के लिए आगे खडी रहती है उस पुलिस पर हर सरकारी विभाग क्यों अपनी हैकडी दिखाता है यह समझ से परे है।

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