प्रेस क्लबों में कौन सा खजाना?

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उत्तरांचल प्रेस क्लब के बाद हरिद्वार प्रेस क्लब में भी हठधर्मिता!
देहरादून। उत्तराखण्ड के प्रेस क्बलों में आखिरकार कौन सा खजाना छुपा हुआ है जिसके चलते क्लब के पदाधिकारी अपनी खुलकर हठधर्मिता दिखाकर अपने विरोधी पत्रकारों को क्लब से बाहर करने का खेल खेलने में लगे हुए हैं? उत्तरांचल प्रेस क्लब में नियमों को ताक पर रखकर जो खेल खेला गया वह किसी से छिपा नहीं है और मामला अदालत में होने के बावजूद भी संविधान अपने हिसाब से बदल देना यह साबित कर गया था कि किस तरह से क्लब पर अपना कब्जा जमाये रखने के लिए कुछ पत्रकारों का समूह खेल खेलने में लगा हुआ है। अभी उत्तरांचल प्रेस क्लब का मामला सुर्खियों में था ही कि हरिद्वार प्रेस क्लब में भी पत्रकारों की एकता को तोडने की राजनीति साफ नजर आ गई और क्लब पर कब्जा करने के लिए जिस तरह से तानाशाही अपनाते हुए साजिश का खेल शुरू हुआ उस पर उपनिबंधक फार्मम्स सोसाइटी एवं चिट्स हरिद्वार ने साफ आदेश जारी किये कि संविधान के अनुसार पत्रकारों की समस्या का समाधान किया जाये।
उल्लेखनीय है कि पिछले लम्बे समय से राज्य के कुछ प्रेस क्लबों पर वहीं के पदाधिकारियों द्वारा कब्जा जमाये रखने के लिए रणनीति के तहत खेल शुरू हुआ और नियम कानूनों को ताक पर रखते हुए उत्तरांचल प्रेस क्लब के कुछ पत्रकारों ने आमसभा की बैठक में लिये निर्णयों को ही ताक पर रख दिया और पूर्व सरकार के कुछ राजनेताओं के बल पर मात्र चंद पत्रकारों के चुनाव कराकर अपने आपको बाहुबली साबित कर क्लब पर कब्जा कर लिया था। क्लब में हुये नियमविरोधी चुनाव को लेकर पत्रकारों ने उच्च न्यायालय मंे भी अपनी याचिका दाखिल कर रखी है और सब रजिस्ट्रार को भी इस मामले में आदेश दिये गये थे लेकिन कुछ राजनेताओं के दबाव में न्यायालय के फैसले को ही हवा में उडा दिया गया। बहस छिडी कि प्रेस क्लब के अन्दर आखिर ऐसा कौन सा खजाना छुपा हुआ है जिसको हासिल करने के लिए कुछ पत्रकार सिर्फ उस पर अपना ही वर्चस्व कायम रखना चाहते हैं? उत्तरांचल प्रेस क्बल में नियमविरोधी जो खेल देखने को मिला था उसी की छाया हरिद्वार प्रेस क्लब में भी देखने को मिल गई जिसको लेकर वहां काफी पत्रकारों में एक बडी नाराजगी देखने को मिली। सवाल खडे हुए कि आखिरकार कुछ पत्रकार आखिरकार किस कारण से क्लब पर कब्जा करने का सपना पाले हुए हैं। हरिद्वार प्रेस क्लब में भी अपनी इच्छा के अनुसार चुनाव कराने को लेकर कुछ पत्रकारों ने अपने कदम आगे बढाये तो उसका विरोध शुरू हो गया और इसकी शिकायत उपनिबंधक फार्म सोसाइटी चिट्स एवं हरिद्वार के पास पहुंची तो उन्हें बताया गया कि क्लब के कुछ पदाधिकारी व पत्रकार क्लब पर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए पत्रकारों को सदस्य ही नहीं बना रहे हैं और सिर्फ अपनो को सदस्य बनाकर क्लब पर कब्जा जमाये रखने का खेल खेला जा रहा है। इस शिकायत पर उपनिबंधक अर्ल्ट हुए और उन्होंने साफ आदेश किये कि उन्हें शिकायती पत्र मिला जिसमें कहा गया कि सदस्यों की सदस्यता का नवीनीकरण करने व विक्रम छाछर के निष्कासन के सम्बन्ध में नियमानुसार पक्ष प्राप्त होने के उपरांत ही प्रेस क्लब हरिद्वार में चुनाव सम्पन्न कराये जायें। अब सवाल खडा होता है कि आखिरकार प्रेस क्लबों में ऐसे कौन से खजाने छुपे हुए हैं जिसके चलते क्लबों के कुछ पदाधिकारी व पत्रकार क्लब पर अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए अपने निशाने पर आने वाले पत्रकारों को ही क्लब से बाहर का रास्ता दिखाने में लगे हुए हैं।

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