सीएम के महकमें में ‘छेद’

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किसके लाडले हैं जेल अफसर?
जेलों में मोबाइल के तांडव से आईजी धडाम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के सीएम के महकमें में ही अगर छेद ही छेद नजर आ रहे हों तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अफसरशाही किस तरह से बेलगाम हो रखी है? हैरानी वाली बात है कि सीएम जेल में बंद अपराधियों का नेटवर्क तोडने के लिए पुलिस महकमें को आदेश दे रहे हैं तो वहीं जेल अफसर सीएम के आदेशों को हवा में उडाते हुए कैदियों द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे मोबाइल फोन पर खामोशी साधे हुए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि हरिद्वार जेल में एक कैदी ने जहां अपने मोबाइल से अपना वीडियो बनाकर आईजी जेल तक की पोल खोलकर उसे वायरल किया वहीं जेल में दो कैदियों से मोबाइल बरामद होने के बाद भी एक भी बंदी रक्षक के खिलाफ कोई कार्यवाही न होना इस ओर इशारा कर रहा है कि आखिरकार जेल अफसर किसके लाडले हैं जिन पर सरकार कभी भी बडी कार्यवाही करने के लिए आगे नहीं आती? आईजी जेल ने जबसे पदभार संभाला है तबसे राज्य की कई जेलों में कैदियों द्वारा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के सबूत आने के बाद भी उनकी जेल अफसरों के प्रति खामोशी कई सवालों को जन्म दे रही है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड की चंद जेलों में बंद कुख्यात बदमाश तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल धडल्ले से करते ही रहते हैं लेकिन अब तो अदने से कैदी भी जेलों से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण उस समय देखने को मिल गया जब हरिद्वार जेल में बंद एक कैदी ने जेल में जेल अफसरों द्वारा किये जा रहे तांडव की गाथा की वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया। वीडियो बनाने वाले कैदी ने जिस तरह से आईजी जेल से लेकर जेलर तक को कटघरे में खडा किया है उससे साफ संदेश जा रहा है कि जेलों में कैदियों के नेटवर्क के आगे जेल प्रशासन किस तरह से नतमस्तक हो रखा है। हरिद्वार जेल से ही कैदियों के पास दो मोबाइल फोन मिले और उस पर मुकदमे भी दर्ज हुये लेकिन सबसे बडा सवाल यह है कि आखिरकार इन कैदियों के पास कहां से मोबाइल फोन आये? जेल में आने वाले हर व्यक्ति की जब तलाशी ली जाती है तो फिर कैसे जेल में अदने से कैदी भी मोबाइल लाने में सफल हो रहे हैॅं यह आईजी जेल की कार्यशैली पर भी बडा सवाल खडा कर रहा है। बहस छिड रही है कि हरिद्वार जेल से दो मोबाइल पकडे गये और एक कैदी ने वीडियो वायरल किया इतना सबकुछ होने के बाद भी अभी तक जेल के किसी भी छोटे कर्मचारी पर कोई गाज गिरी हो ऐसा देखने को नहीं मिला जिससे सवाल खडे हो रहे हैं कि जेल अफसर आखिरकार किसके लॉडले हैं जिसके चलते उन पर कभी कार्यवाही नहीं होती? हैरानी वाली बात है कि गृह विभाग सरकार के सीएम त्रिवेन्द्र रावत के पास है लेकिन उनके ही विभाग में जिस तरह से जेल के कुछ अफसर छेद करने में लगे हुए हैं उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि अफसरों में सीएम का कोई खौफ नहीं रह गया है। यही कारण है कि जेलों में तैनात कुछ अफसर बेखौफ होकर अपनी नौकरी बजा रहे हैं। उत्तराखण्ड की कई जेलों में अब तक मोबाइल का प्रयोग होने व जेल से उद्यमियों को धमकियां दिये जाने की बात सामने आ चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने कभी भी किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए उसे सजा देने के लिए अपने कदम आगे नहीं बढाये जिनकी जेलों में धडल्ले से मोबाइल फोन का इस्तेमाल हो रहा है।

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