प्रकाश पांडे की मौत को लेकर हाकिम पर ‘वार’

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हत्या का मुकदमा दर्ज कराने को लेकर बनाई रणनीति!
डीजीपी से मुलाकात कर एफआईआर दर्ज करने को बनाया खाका?
देहरादून। हल्द्वानी के ट्रासपोर्टर प्रकाश पांडे द्वारा जीएसटी व नोटबंदी से तंग आकर आत्महत्या किये जाने को लेकर उत्तराखण्ड की राजनीति में भूचाल आ रखा है और कुछ राजनीतिक दल के साथ भाजपा के चंद नेता भी सरकार द्वारा प्रकाश पांडे के परिजनों से की जा रही वादाखिलाफी से नाराज होकर मैदान में आगे आते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं लम्बे समय से सरकार के हाकिम को निशाने पर लेने वाले जन संघर्ष मोर्चा ने एक बार फिर हाकिम पर वार करने के लिए नया खाका तैयार किया है और वह डीजीपी से मुलाकात कर हाकिम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के लिए अपने कदम आगे बढाने का मन बना चुके हैं और उन्होंने दून में दस्तक भी दी है तथा हाकिम को एक बार फिर कटघरे में खडा करने के लिए मोर्चा रणनीति के तहत आगे आते हुए दिखाई दे रहा है जिससे राज्य में एक बार फिर प्रकाश पांडे की मौत को लेकर सियासत में भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं?
उल्लेखनीय है कि जबसे हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर पांडे ने कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के जनता दरबार में जीएसटी व नोटबंदी को लेकर जहर खाकर आत्महत्या की है तबसे राज्य के कुछ राजनीतिक दल लगातार सरकार की घेराबंदी करते आ रहे हैं। राजनीति इसलिए भी गर्माई हुई है क्योंकि पहले तो सरकार की ओर से मृतक की पत्नी को 12 लाख व सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया गया था लेकिन इस ऐलान के तीन दिन बाद सरकार ने साफ संदेश दिया कि न तो वह मृतक की पत्नी को कोई मुआवजा देेंगे और न ही उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। सरकार के इस ऐलान के बाद तो राज्य की राजनीति में एकाएक भूचाल आ रखा है और कांग्रेस से लेकर कुछ अन्य राजनीतिक दल सरकार को ट्रांसपोर्टर की मौत के बाद मुआवजा दिये जाने से अपने कदम पीछे खींचने पर सरकार के हाकिम को कटघरे में खडा किया जा रहा है। प्रदेशभर में प्रकाश पांडे की मौत को लेकर हंगामा मचा हुआ है और भाजपा के चंद पदाधिकारी भी इस बात को लेकर नाराज हैं कि सरकार ने पहले तो मुआवजा देने की घोषणा की और उसके बाद वह अपने वायदे से मुकर गई। सरकार ने प्रकाश पांडे की मौत की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये हैं लेकिन यह जांच सरकार के गले की फांस बन सकता है क्योंकि प्रकाश पांडे ने जिस तरह से केन्द्र व प्रदेश के दो राजनेताओं पर अपनी नाराजगी जाहिर की और मुख्यमंत्री के ओएसडी को कटघरे में खडा किया उससे यही बहस छिडी कि क्या मजिस्ट्रेट जांच में उन पर कार्यवाही होगी जिनसे प्रकाश पांडे खफा नजर आ रहा था? अब एक बार फिर जनसंघर्ष मोर्चे ने सरकार के हाकिम के खिलाफ प्रकाश पांडे की मौत को लेकर अपनी नई रणनीति तैयार कर उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के लिए डीजीपी से मुलाकात करने का खाका तैयार किया है और वह एक बार फिर सरकार के हाकिम को प्रकाश पांडे की मौत को लेकर उनकी घेराबंदी की जा रही है?

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