21 इंफेंट्री से चुराई थी गोलियां!

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मद्रास इंफेंट्री ने कारतूस खोके के लापता होने की दी शिकायत
देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी की सुरक्षा व्यवस्था पर उस समय एक बार फिर सवालिया निशान लग गया जब एसओजी ग्रुप ने कैंट घंघौडा इलाके से हजारों खाली कारतूस व सैकडों एसएलआर के जिंदा कारतूस बरामद किये थे। इन कारतूसों के पकडे जाने के बाद देश की खुफिया एजेंसियां महिलाओं व कबाडी से पूछताछ में जुटी रही लेकिन सेना ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि बरामद कारतूसों से उनका कोई नाता है लेकिन दो दिन पूर्व 21 इंफेंट्री मद्रास के एक कैप्टन ने थाना कैंट में लिखित शिकायत दी कि उनके यहां से हजारों कारतूस के खोखे गायब हैं। अब सवाल उठ रहा है कि आखिरकार 21 इंफेंट्री ने कारतूस व खाली खोके बरामद होने के बाद ही थाने में इसकी शिकायत क्यों दी? ऐसे में शंका उठ रही है कि महिला गैंग ने 21 इंफेंट्री से ही गोलियों के खोके व एसएलआर के कारतूस चुराये थे?
उल्लेखनीय है कि चंद दिन पूर्व एसओजी ग्रुप ने जीएमएस रोड में रहने वाले एक कबाडी से इंसास रायफल के हजारों खाली कारतूस के खोके और 119 एसएलआर के जिंदा कारतूस बरामद किये थे। इन खोकों व कारतूसों के बरामद होने के बाद पुलिस अफसर इस मामले में चुप्पी साध गये जबकि यह पता लगाने की कोशिश नहीं की गई कि आखिर कितने बडे पैमाने पर कहां से तीन महिलाओं ने यह कारतूस चुराये थे। पहले दिन से ही इस बात से पर्दा उठ रहा था कि कैंट इलाके की एक इंफेंट्री से यह कारतूस के खोके चोरी किये गये थे लेकिन इंफेंट्री ने भारी मात्रा में कारतूस चोरी होने के बावजूद भी इसकी रिपोर्ट कैंट थाने में नहीं लिखवाई थी। दो दिन पूर्व 21 इंफेंट्री मद्रास के एक कैप्टन ने कैंट थाने में शिकायत दी है कि उनके यहां से आठ हजार से कुछ ज्यादा इंसास के खाली खोके मिस हो रखे हैं। हैरानी वाली बात है कि हथियार के खोके कैसे इंफेंट्री से मिस हो गये यह बडा चिंता का विषय है और देश की सुरक्षा से मामला जुडा होने के कारण खुफिया एजेंसियों व सेना अफसरों को भी यह राज तलाशना होगा कि आखिरकार 21वीं इंफेंट्री से कैसे कारतूस के खोके गायब हुए? सवाल यह भी उठ रहा है कि इंफेंट्री ने सिर्फ खाली कारतूसों के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई है जबकि 119 एसएलआर के कारतूस किसके हैं और कहां से चोरी किये गये यह एक बडा जांच का विषय है। इतनी बडी मात्रा में घातक हथियार के खाली कारतूस व जिंदा कारतूस बरामद होने के बाद भी पकडे गये गैंग को पुलिस कस्टडी रिमांड पर न लेना पुलिस अफसरों की खामोशी पर भी कई सवाल खडे कर रहा है? अगर इन कारतूसों के गायब होने का सारा इतिहास उजागर न हुआ तो यह सेना के लिए आने वाले समय में काफी घातक हो सकता है?

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