देशभर के साथ तीर्थनगरी मे भी मची लोहड़ी पर्व की धूम

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शहर मे विभिन्न स्थानों पर हुआ लोहड़ी पूजन
पंजाबी महासभा के तत्वावधान मे आयोजित कार्यक्रम साबित हुआ बड़ा आकर्षण
ऋषिकेश। देश भर के साथ अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश मे भी खुशियों और उल्लास के रूप मे मनाया जाने लोहड़ी का पर्व बेहद धूमधाम के साथ मनाया गया। लोहड़ी पर्व की धमक अब सिर्फ पंजाब की वादियों तक ही सीमित नही रही है बल्कि पूरे देश मे लोहड़ी की धूम मची हुई है। इसकी बानगी आज पर्व पर उत्तराखंड की देवभूमि मे भी देखनें को मिली।शहर मे विभिन्न स्थानों पर उत्साह और उमंग के साथ लोगों ने सांझी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सामुहिक रूप से लोहड़ी का पर्व मनाया। निर्मल आश्रम मे महंत राम सिंह, महाराज व संत जौध सिंह महाराज ने संयुक्त रूप से लोहड़ी पूजन कर श्रद्वालुओं को प्रसाद वितरित किया। गुरूद्वारा हेमकुण्ट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट मे भी पर्व बेहद उल्लास के साथ मनाया गया। देवभूमि उत्तरांचल उधोग व्यापार मण्डल ने प्रांतीय अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल के दिशा निर्देशन मे त्रिवेणी घाट स्थित गांधी स्तम्भ के बाहर विगत् वर्षों की भांति इस वर्ष भी धूमधाम के साथ त्यौहार मनाकर गरीबों और जरूरतमंदों को कम्बल वितरित किए। लोहड़ी पर्व का बड़ा आकर्षण पंजाबी महासभा के तत्वावधान मे तिलक रोड़ स्थित पंजाबी क्वाटरों मे आयोजित किया गया कार्यक्रम रहा जिसमे शहर के तमाम गणमान्य नागरिकों ने सम्मलित होकर बेहद गर्मजोशी से एक दूसरे को बधाई दी। इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, पंजाबी महासभा के जिलाध्यक्ष प्रदीप कोहली,व्यापारी नेता जयदत्त शर्मा, मदन नागपाल, विनोद शर्मा, हरीश धींगड़ा, अशोक मनचंदा, कीमतीलाल चावला,सुभाष कोहली,अनिता बहल,स्नेहलता शर्मा, सरोज डिमरी,स्वीटी कोहली,गीता मनचंदा, सीमा शर्मा सहित बड़ी संख्या मे क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

क्यों मनाई जाती है लोहड़ी
एक लोक प्रचलित कहानी के अनुसार सुंदरी और मुंदरी नाम की दो बहनें थीं। बचपन में ही पिता की मौत हो जाने के कारण ये दोनों अपने चाचा के पास आ गईं। लेकिन जालिम चाचा ने दोनों को एक जमींदार को बेचने की सोची। ये बात जैसे ही दुल्ला भट्टी नाम के डाकू को पता चली तो उसने चाचा के चंगुल से दोनों लड़कियों को छुड़ाया। दोनों को दुल्ला भट्टी ने अपने यहां शरण दी। उनका लालन पोषण किया।जब लड़कियां बड़ी हो गईं तो उसने दो अच्छे वर ढूंढकर उनकी शादी करने का सोचा। शादी बहुत जल्दी-जल्दी में की गई। दुल्ला भट्टी ने आग जलाई और उसी आग के आसपास फेरे लेते हुए दोनों लड़कियों की शादी कर दी गई। कहते हैं दूल्हा भट्टी के पास दोनों बहनों को देने के लिए कुछ नहीं था इसलिए उसने दोनों की झोली में गुड़ डाला और उन्हें विदा कर दिया। इसी कहानी को आधार मानते हुए लोहड़ी का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन पंजाब में पतंगबाजी करने का भी चलन है।

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