किसके हैं चुराये गये एसएलआर कारतूस!

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तो क्या… सहारनपुर कबाडी के पास पहुंच गया था बारूद?
गजबः गैंग को रिमांड पर लेने से डर रही खाकी
देहरादून। गजब बात है कि जब भी भारतीय सैन्य अकादमी में दीक्षांत परेड आयोजित होनी होती है तो उससे पन्द्रह दिन पहले शहर में चैकिंग और संदिग्धों की खोज के लिए ऑपरेशन चला दिया जाता है लेकिन कितनी हैरानी वाली बात है कि कैंट के सैन्य क्षेत्र की 21वीं इंफेंट्री से हजारों इंसास के खाली कारतूस चोरी हुये और सेना ने चोरी का मुकदमा दर्ज नहीं कराया तथा कारतूस बरामद होने के बाद दम भर दिया कि उनकी इंफेंट्री से कारतूस मिस हो रखे हैं। अब सबसे बडा सवाल यह खडा हो रहा है कि पुलिस ने जो खाली कारतूसों के साथ 119 जिंदा एसएलआर के कारतूस बरामद किये थे वे महिलाओं ने कहां से चुराये थे? सैकडों कारतूस चोरी करने वाली महिलाओं से सारे राज बेपर्दा करने के लिए पुलिस अफसर आगे आते हुए दिखाई ही नहीं दे रहे उससे उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है? चर्चाएं तो यहां तक है कि दून के कबाडी ने यह कारतूस सहारनपुर के एक कबाडी तक पहुंचा दिये थे लेकिन वह कबाडी अभी तक पुलिस व खुफिया एजेंसियों के हाथ नहीं चढ़ पाया है जिससे यह राज अभी तक राज ही बना हुआ है कि आखिरकार कबाडी इस बारूद को किसको बेचने की फिराक में था।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व एसओजी ग्रुप ने कांवली रोड की तीन महिलाओं व जीएमएस रोड के एक कबाडी को इंसास के आठ हजार से अधिक खाली कारतूसों व 119 जिंदा एसएलआर कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया था। इतने बडे पैमाने पर खाली गोलियों के कारतूस व 119 जिंदा एसएलआर कारतूसों के बरामद होने से कैंट क्षेत्र के सैन्य ईलाकों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बडा सवालिया निशान लग गया। यह बारूद बरामद होने के बाद सेना के किसी भी अफसर ने यह दावा नहीं किया कि बरामद कारतूस उनके हैं। हालांकि कारतूस बरामद होने के दो दिन बाद 21वीं इंफेंट्री की ओर से कैंट थाने को लिखित में शिकायत दी गई थी कि उनकी इंफेंट्री से यह खाली कारतूस गुम हुए थे। 21वीं इंफेंट्री की इस शिकायत से सवाल खडे हो गये कि आखिरकार जब यह कारतूस गायब हो रखे थे तो इसका मुकदमा थाने में दर्ज क्यों नहीं कराया गया था? सवाल खडे हो रहे हैं कि खाली कारतूस के मिस होने की तो शिकायत कैंट पुलिस से कर दी गई लेकिन जिंदा कारतूस किसके हैं कहां से आये, कैसे चुराये गये और इन कारतूसों को चुराने के बाद उसका इस्तेमाल कहां किया जाना था यह एक बडा राज आज भी राज बना हुआ है? पुलिस अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खडे हो रहे हैं कि जब भारी मात्रा में जिंदा व खाली कारतूस महिला गैंग से बरामद हुए हैं और उनके साथ एक कबाडी भी शामिल था तो अब तक पुलिस ने कबाडी व गैंग का पुलिस कस्टडी रिमांड लेने के लिए क्यों अपने कदम आगे नहीं बढाये यह कई शंकाओं को जन्म दे रहा है? सवाल सेना की सुरक्षा से जुडा हुआ है इसलिए पुलिस महकमें को आगे आकर इस गैंग का पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर यह पता लगाना जरूरी है कि आखिरकार कडी सुरक्षा भेदकर कैसे महिला गैंग ने यह कारतूस चुरा लिये? सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या सेना के हथियार गार्दरूम में रखे जाने के बजाए कहीं और रखे जाते हैं जिसके चलते उन्हें चुराना आसान है? बहस इस बात की भी छिडी हुई है कि आखिरकार 119 एसएलआर के कारतूस कहां से चुराये गये क्योंकि कारतूसों पर बैच नम्बर से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि यह कारतूस कहां से चोरी किये गये थे? चर्चाएं यह भी हैं कि महिला गैंग ने कारतूस भले ही जीएमएस रोड के एक कबाडी को बेच दिये थे लेकिन उसके बाद कबाडी ने इन कारतूसों को सहारनपुर के एक कबाडी को कैसे और कहां बेचा यह भी एक बडा जांच का विषय है? चर्चा है कि सहारनपुर का कबाडी अभी भी पुलिस व खुफिया एजेंसियों को चकमा देकर फरार है और उसके पकडे जाने के बाद कई राज खुल सकते हैं?

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