अवैध निर्माण करते रहो सो रहा एमडीडीए!

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चकराता रोड़ पर अवैध निर्माणों पर अफसरों ने मंूद ली आंखे?
देहरादून। उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी में एमडीडीए का निर्माण शहर को स्वच्छ सुन्दर बनाने के लिए किया गया और ऐसी उम्मीद थी कि शायद एमडीडीए शहर को सुन्दर और स्वच्छ बनाने की दिशा में बहुत बडी पहल करेगा लेकिन सभी के अरमान धरे के धरे रह गये और एमडीडीए में जिस तेजी के साथ भ्रष्टाचार का खेल कुछ अफसर खेलने लगे उससे शहर की सुन्दरता पर बडा ग्रहण लगना शुरू हो गया।
हैरानी वाली बात है कि जिस जनपद में समूची सरकार मौजूद है उस जनपद में कैसे एमडीडीए की नाक के नीचे अवैध निर्माणों का खेल खुलेआम चल रहा है यह एमडीडीए और सरकार की मंशा पर बडा सवाल खडा कर रहा है। अस्थाई राजधानी में जहां हमेशा हरियाली नजर आती थी वहां आज एमडीडीए के कुछ अफसरों की मिलीभगत से अवैध निर्माण कर हरियाली को समाप्त करने का जो खतरनाक खेल खेला जा रहा है वह एमडीडीए की कार्यशैली पर बडा सवाल खडा कर रहा है। गजब बात तो यह है कि सरकार भी एमडीडीए पर कभी नकेल लगाने के लिए आगे नहीं आई और न ही उसने यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिरकार कैसे शहर में अवैध निर्माण का खेल चल रहा है। सरकार की एमडीडीए पर हमेशा क्यों कृपा बनी रहती है यह सवाल आज भी शहर के गलियारों में चर्चा का विषय बना रहता है। हमेशा उंगलियां उठती रही कि एमडीडीए के कुछ अधिकारियों के पास अकूत सम्पत्ति है और इन अधिकारियों की अगर विजिलेंस जांच हो जाये तो सरकार की अंाखे भी खुली की खुली रह जायेंगी कि कैसे उनकी नाक के नीचे कुछ अफसर किस तरह से भ्रष्टाचार के खेल में चौके-छक्के लगाकर अपना खजाना भरने में लगे हुए हैं। एमडीडीए के कुछ अफसर उन अवैध निर्माणों पर कभी नकेल लगाने के लिए आगे नहीं आते जो पहले से ही एमडीडीए के कुछ अफसरों को भेंट चढ़ा चुके होते हैं और जो मकान या दुकान स्वामी एमडीडीए के कुछ अफसरों की जेब नहीं भर पाता उसके निर्माण पर हंटर चलाने के लिए एमडीडीए के कुछ अफसर आगे आकर ऐसे कार्यवाही करने का दम भरते हैं मानो अवैध निर्माण के खिलाफ उन्होने कितना बडा ऑपरेशन चला रखा हो।
गजब बात तो यह है कि इन दिनों यमुना कालोनी मंत्री आवासों के आस-पास के हाई-वे रोड पर ही कुछ अवैध निर्माण धडल्ले से दिन-रात हो रहे हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि बडे-बडे निर्माण देखकर भी एमडीडीए के कुछ अफसर क्यूं अपनी आंखों पर काला चश्मा चढाये हुए हैं यह उनकी मंशा पर बडा सवाल खडा किये हुए है। नियमों की धज्जियां उडाते हुए जिस तरह से अवैध निर्माण का काला कारोबार चकराता रोड पर इन दिनों दिन-रात देखने में मिल रहा है वह एमडीडीए के कुछ अफसरों की कार्यशैली पर सवाल खडे कर रहा है। बहस इस बात को लेकर छिडी हुई कि आखिरकार जिस रास्ते से आये दिन सरकार के मंत्री व विधायक के अलावा प्रशासन व पुलिस के अफसर आते-जाते रहते हैं उन्हें सड़क के किनारे हो रहे यह अवैध निर्माण क्यों दिखाई नहीं देते यह उनकी मंशा पर भी सवालिया निशान लगा रहा है। अगर पैसे के बल पर अवैध निर्माणों का खेल होना है तो फिर राजधानी में एमडीडीए को अस्तित्व में बनाये रखने का औचित्य समझ से परे है। अब देखने वाली बात है कि क्या सरकार एमडीडीए के उन अफसरों पर नकेल लगाने के लिए एक कदम भी आगे बढायेगी जिन्होंने अवैध निर्माणों पर कार्यवाही करने के बजाए उन्हें अवैध निर्माण करने का खुला प्रमाण पत्र दे रखा है। अगर चकराता रोड पर सडक के किनारे अवैध निर्माण हो रहे हैं तो यह एमडीडीए की कार्यशैली पर बहुत बडा सवाल खडा कर रहा है और यह बात उठ रही है कि आखिर अवैध निर्माण पर कार्यवाही का एमडीडीए में क्या पैमाना है।

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