पलटू सरकार!

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वायदों से मुकरने में माहिर होती डबल इंजन सरकार?
लोकायुक्त, शराब, एनएच-74, कम्प्यूटर वितरण, पांडे को मुआवजे पर भी वायदा किया ‘तार-तार’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि कोई सरकार बार-बार अपने वायदों से मुकरती जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में प्रचंड बहुमत वाली डबल इंजन की सरकार अगर अपने वायदों से मुकर कर अपने ऊपर ‘पलटू सरकार’ होने का दाग लगवा रही है तो यह उसके लिए शुभ संकेत नहंी है क्योंकि आने वाले समय में राज्य के अन्दर निकाय चुनाव में सरकार के मुखिया की अग्नि परीक्षा होनी है और उसके बाद 2019 में लोकसभा का चुनाव भाजपा के लिए एक बहुत बडी चुनौती है ऐसे में डबल इंजन की सरकार का बार-बार वायदों से मुकरना राज्यवासियों के मन में एक बडी शंका पैदा कर रहा है और सवाल खडा कर रहा है कि सरकार भले ही दावा करे कि उसने प्रकाश पांडे के परिजनों को मुआवजा व एक सदस्य को नौकरी देने का वायदा नहीं किया लेकिन जनपद का डीएम जो कि सरकार का अंग होता है वह कोई ऐलान करता है तो उसे सरकार का शपथ पत्र माना जाता है। अब सरकार के अपने वायदे से पलटने को लेकर कांग्रेस व भाजपा के अन्दर भी घमासान शुरू हो गया है और त्रिवेन्द्र सरकार के लिए अपने वायदों से मुकरना आने वाले समय में एक बडा संकट खडा कर सकता है?
उल्लेखनीय है कि राज्य में पहली बार भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला और ऐसी उम्मीद लगी कि सरकार राज्यवासियों के सपनों पर खरी उतरेगी लेकिन वह तो मात्र नौ माह के भीतर ही आवाम के मन से उतरते हुए दिखाई दे रही है? सरकार ने राज्य में नौ माह के भीतर लोकायुक्त का गठन करने का दावा किया लेकिन सरकार अपने ही वायदे से मुकर गई और वह हर मंच पर ऐलान कर रही है कि प्रदेश में लोकायुक्त की जरूरत ही नहीं है जबकि अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश में लोकायुक्त गठन करने का आदेश दिया है। सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दम भरा और उधमसिंहनगर में एनएच-74 घोटाले की सीबीआई जांच कराने का ऐलान किया लेकिन चंद समय के भीतर ही सरकार अपने वायदे से पीछे हट गई और उसने एनएच-74 घोटाले की जांच एसआईटी से ही कराये जाने तक अपने कदम आगे बढाकर रखे। सीबीआई जांच कराने से सरकार का मुंह मोडना आवाम को उसकी मंशा पर एक बडा सवाल खडा कर गया। सरकार ने राज्य में शराब को हतोसाहित करने का ऐलान किया और मैदान व पहाडों में शराब बेचे जाने के समय में पहली बार परिवर्तन किया लेकिन सरकार अपने इस फैसले को ज्यादा समय तक नहीं रख पाई और पहाड व मैदान में शराब बेचने का एक ही समय कर राज्य की जनता के सामने सरकार ने अपनी विश्वसनियता कम कर दी? सरकार ने शुरूआती दौर में ऐलान किया था कि मैधावी छात्रों को कम्प्यूटर दिये जायेंगे लेकिन सरकार अपने इस वायदे केा भी पूरा नहीं कर पाई और आज तक एक भी छात्र को कम्प्यूटर दिया गया हो ऐसा देखने को नहीं मिल पाया है। सरकार अपने वायदों से जिस तेजी के साथ बार-बार मुकरती आ रही है उसको लेकर कांग्रेेस व भाजपा में भी घमासान मचा हुआ है। हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे की मौत पर जब भाजपा सरकार कटघरे में खडी हुई तो नैनीताल के डीएम ने हजारों लोगों के सामने मृतक के परिजनों को बारह लाख व मृतक की पत्नी को संविदा पर नौकरी देने का ऐलान किया था लेकिन तीन दिन बाद सरकार ऐलान कर गई कि उसने मुआवजा व नौकरी देने का कोई वायदा नहीं किया ऐसे में सवाल खडे हुए कि किसी जिले का डीएम सरकार का अंग है तो फिर उसके द्वारा की गई घोषणा सरकारी घोषणा क्यों नहीं मानी जा रही? सरकार बार-बार जिस तरह से अपने वायदों से मुकरती जा रही है उससे इस बात को लेकर बहस छिड गई है कि राज्य में डबल इंजन की सरकार पलटू सरकार बनकर रह गई है?

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