महफूज नहीं सैन्य ठिकाने!

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आखिर कैसे तीन महिलाओं ने भेदा सुरक्षा चक्र?
सवालः गोलियां गार्ड रूम में रखी जाती हैं तो कैसे हुई चोरी
देहरादून। जनपद के सैन्य ठिकानों पर हमेशा सेना के जवान चौकसी में लगे रहते हैं ऐसे में अब सवाल उठा है कि आखिरकार तीन महिलायें कैसे सैन्य ठिकाने का सुरक्षा चक्र भेदकर हजारों राउंड गोलियां चुराने में सफल हुई यह सैन्य खुफिया एजेंसियों पर भी एक बडा प्रश्नचिन्ह लगा रहा है और यह बात उठ रही है कि अगर सैन्य ठिकाने से गोलियां चोरी हुई हैं तो यह साफ है कि जनपद में सैन्य ठिकाने महफूज नहंी हैं?
उल्लेखनीय है कि भारतीय सैन्य अकादमी को हमेशा आतंकी अपने निशाने पर लेते हैं और यही कारण है कि रात-दिन भारतीय सैन्य अकादमी व जनपद में सभी सैन्य ठिकानों पर सुरक्षा व्यवस्था कडी होती है और किसी भी व्यक्ति को बिना पहचान पत्र के प्रवेश करने नहीं दिया जाता। ऐसे में बहस छिड गई है कि कैंट इलाके की एक इंफेंट्री से कैसे हजारों राउंड गोलियां चोरी हो गई यह सेना की सुरक्षा पर बडा सवाल खडा कर रहा है। एसओजी ने कबाडी व महिला गैंग से हजारों राउंड इंसास रायफल के खाली कारतूस बरामद किये हैं वह सेना के अलावा किसी के पास इतनी मात्रा में नहीं हो सकते? वहीं एसएलआर के 119 जिंदा कारतूस कैसे तीन महिलायें सेना की सारी सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर चुराकर ले गई यह सेना अफसरों के लिए एक बडा चिंता का विषय होना चाहिए? देश में जहां आतंकवादी हर समय सेना को अपना निशाना बनाने में लगे हुए हैं वहीं राजधानी में तीन महिलायें कैसे सेना की सारी सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर हजारों राउंड कारतूस चुराकर ले गई यह देश के लिए भी एक बडा खतरा माना जा रहा है? सवाल यह भी खडे हो रहे हैं कि सेना के कारतूस गार्ड रूम में होते हैं जहां सुरक्षा व्यवस्था अचूक होती है लेकिन तीन महिलायें कैसे सेना की चौकसी को भेदकर यह गोलियां चुराने में सफल हो गई इसकी अगर निष्पक्ष जांच हुई तो बडे-बडे राज खुलकर सामने आ सकते हैं?

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