प्रकाश पांडे के मन की बात सुनकर भी

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बेपरवाह रही उत्तराखण्ड सरकार!
पीएम को मन का दर्द सुनाकर भी टूट गई पांडे की सांसे
पीएमओ से आई शासन मंे चिट्ठी कहां हो गई गायब?
देहरादून। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पदभार संभालने के बाद से लगातार देशवासियों को अपने मन की बात बता रहे हैं और भाजपा सरकारें प्रधानमंत्री के मन की बातों को सुनने के लिए चौकडी भी लगाते हैं लेकिन जब उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले के एक ट्रांसपोर्टर ने देश के प्रधानमंत्री को अपने मन की बात के लिए खत लिखा तो पीएमओ ने उसके मन के दर्द को सुनकर उत्तराखण्ड शासन को पत्र भी लिखा लेकिन पीएमओ के लिखे पत्र को शासन ने हवा में उडा दिया जिसके चलते ट्रांसपोर्टर ने पीएम से मन की बात कर अपनी आखिरी उम्मीद को भी टूटते हुए देखा तो उसने सरकार के सामने जहर खा लिया और उसकी सांसे आखिरी क्षण तक यही कहती रही कि आखिर उसका जो हर्ष हुआ है भविष्य में किसी और का ऐसा हर्ष न हो। हैरानी वाली बात है कि शासन के अफसर पैदल एक ईमारत से दूसरी ईमारत तक न जायें इसके लिए तो सचिवालय में लाखों रूपये की लागत से पुल बना दिया गया लेकिन एक ट्रांसपोर्टर अपने ही पैसे निकलवाने के लिए पीएम से लेकर सरकार तक को अपने मन की बात सुनाता रहा लेकिन उत्तराखण्ड की बेपरवाह सरकार को इतना समय नहीं मिला कि वह एक आहत ट्रांसपोर्टर का दर्द सुन सके?
उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी के प्रकाश पांडे ने अपनी मौत से पूर्व भाजपा प्रदेश कार्यालय में देश के प्रधानमंत्री से लेकर उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया को जीएसटी व नोटबंदी को लेकर कटघरे में खडा किया था। मौत के आगोश में जाने से पहले जब प्रकाश पांडे ने प्रधानमंत्री को अपने मन की बात को लेकर खत लिखा और उस खत के लिखने के बावजूद जब उसकी आस टूट गई तो उसने मौत को गले लगा लिया लेकिन प्रधानमंत्री को जो उसने खत लिखा वह यूं लिखा गया था।
श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी, प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली। विषय नोटबंदी खनन पर रोक व जीएसटी से उत्पन्न हालात।
महोदय सन् 1991 में इण्टर व डिप्लोमा करने के बाद नौकरी ढूंढने की कोशिश की परंतु आरक्षण व अन्य वजह से नौकरी नहीं मिल पाई आजीविका चलाने के लिए 1998 में संविदा में रोडवेज में परिचालक की नौकरी की। शादी की, बच्चे हुये तो संविदा परिचालक की नौकरी से मिलने वाले वेतन से घर का गुजारा मुश्किल हुआ तो घर परिवार की पूंजी तथा घरवाली के जेवर बेचकर रिश्तेदारों से उधार मांगकर ट्रक खरीदा, ट्रांसपोर्ट का कारोबार किया जैसे-तैसे गुजर बसर चल ही रही थी कि आपके नोटबंदी, खनन पर रोक व जीएसटी से कोराबारी ठेकेदार तथा कम्पनी वाले परेशान हो गये और हमे पैमेंट देने में आनाकानी करने लगे जिस वजह से ट्रांसपोर्ट का काम पिट गया। अगस्त 2016 से अब तक गाडियों की किस्त जमा नहीं कर पाया हूं बाजार में देनदारी काफी हो गई है। गाडियां नहीं चल पा रही हैं पाई-पाई जोडकर एक प्लाट लिया था वह भी बैंक में गिरवी रखा है अपनी जीवन बीमा की प्रिमियम भी नहीं भर पाया हंू और आज तक किराये के मकान में ही रहता हंू। आपसे निवेदन है कि अगस्त 2016 से अगस्त 2017 तक प्राईनेंस कम्पनी का ब्याज तथा ओडी मॉफ कराने की कृपा करें इससे पूर्व भी आपको लिख चुका हंूं। महोदय आपसे अपने तथा अपने बच्चों के भविष्य को बचाने की गुहार लगा रहा हंू बहुत परेशान हंू। कृपा करके हमारी मद्द करें मैं आपसे मिलना चाहता हंू मेरे जैसे कई और भी छोटे-मोटे कारोबारी हैं जो परेशान हैं एक आपसे ही आशा है आपके जवाब के इंतजार में।
प्रकाश पांडे के इस खत पर पीएमओ ने संज्ञान लेते हुए 22 अगस्त 2017 को उत्तराखण्ड शासन को पत्र लिखा कि प्रकाश पांडे के पत्र पर एक्शन लिया जाये जो भी उचित हो और एक कापी प्रधानमंत्री कार्यालय के पोर्टल और एक कापी प्रकाश पांडे को पत्र का जवाब भेजा जाये। शासन ने प्रधानमंत्री कार्यालय से आये इस खत को हवा में उड़ा दिया? यही कारण रहा कि प्रधानमंत्री से उम्मीद की किरण टूटने के बाद ट्रांसपोर्टर ने अपने आपको मौत के आगोश में धकेल दिया।

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