सवालो की भरमार, लेकिन गैरसैण राजधानी का कोई प्रस्ताव नही

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कड़ाके ठंड,भूकंप का आना नेता अफसरों के माथे पर बल
चंद्र प्रकाश बुडाकोटी प्रकाश
भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में आज से आरंभ होने जा रहे विधानसभा सत्र में सवालों की भरमार है। लेकिन स्थाई राजधानी का कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास नही है।विधानसभा सचिवालय के मुताबिक विधायकों के बारह सौ से ज्यादा सवाल मिल चुके हैं।
स्थायी राजधानी को लेकर भले ही सूबे में पिछले सत्रह सालों से सियासत चल रही है, लेकिन जनभावना से जुड़े इस मुद्दे को कोई भी राजनीतिक पार्टी छोड़ना नहीं चाहती। पिछली कांग्रेस सरकार ने हर साल एक विधानसभा सत्र गैरसैंण में आयोजित करने की शुरुआत की, जिसे मौजूदा भाजपा सरकार भी उसी तर्ज पर आगे बढ़ा रही है। दिलचस्प बात यह कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात करने वाली भाजपा यहां शीतकालीन विधानसभा सत्र आयोजित कर रही है।कड़ाके की ठंड में सत्र की व्यवस्था और तैयारियों ने तमाम संबंधित विभागों के अधिकारियों के पसीने छुड़ाए हुए हैं, वही कल आये भूकंप से सभी के माथे पर वल है,लेकिन विधायक पूरी शिद्दत के साथ सत्र में भाग लेने को तैयार हैं। विधायकों की दिलचस्पी का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय में सदस्यों के बारह सौ से ज्यादा सवाल पहुंच चुके हैं।लोकायुक्त विधेयक और तबादला विधेयक को लेकर सबकी नजरें शीत सत्र पर टिकी हुई हैं। मौजूदा सरकार अपने पहले ही सत्र में ये दो विधेयक लेकर आई थी, हालांकि बाद में इन्हें प्रवर समिति को सौंप दिया गया।प्रवर समिति इन दोनों विधेयकों पर अपना प्रतिवेदन सदन को सौंप चुकी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा कि क्या सरकार इस सत्र में इन दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराती है या इसमें अभी और वक्त लगेगा। सत्र को लेकर सवाल बहुत सारे है,अफसर, मंत्री बिधायक सड़क मार्ग से गैरसैण जाते तो धरातलीय स्थिति का पता भी चल जाता लेकिन हमारे माननीयो की हवाई यात्रा से तो चिंतन भी हवाई ही हो रहा है।उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समय से जनता गैरसैण को राज्य की स्थायी राजधानी बनाना चाहती थी ।गैरसैण राज्य की स्थायी राजधानी बने यह सवाल महत्वपूर्ण है लेकिन सरकार के मंत्री प्रकाश पंत कहते है कि गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नही है।राजधानी प्रस्ताव कहाँ से आना है यह तो सरकार जाने लेकिन सरकार के पास इतिहास की स्वर्णिम गाथा लिखने का मौका जरूर सामने है। हफ्ते भर चलने वाले इस सत्र में पहाड़ के हिस्से में कुछ निकल कर आएगा ऐसी उम्मीद बरकरार है।

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