गैरसैंणः राजधानी के लिए नहीं उपयुक्त

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हुजूर! आखिर कैसे दूर होंगी दीक्षित आयोग ने गिनाईं कुदरती खामियां
महज जनभावनाओं से खेल रहे सियासी दल
देहरादून। इमसें कोई दो राय नहीं है कि गैरसैंण में स्थायी राजधानी का मुद्दा जनभावनाओं से जुड़ा है। शायद यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जनभावनाओं से खेल रहे हैं। कोई भवन बनवा कर और कोई विस का सत्र आयोजित करके खुद को गैरसैंण का हिमायती साबित करने की जुगत में है। लेकिन दोनों में से कोई भी दल इस सवाल का हल तलाशने को तैयार नहीं है कि दीक्षित आयोग ने गैरसैंण में राजधानी मामले में जो कुदरती खामियां गिनाईं हैं, उन्हें कैसे दूर किया जाएगा। राज्य की पहली अंतरिम सरकार ने सूबे की स्थायी राजधानी की तलाश के लिए दीक्षित आयोग का गठन किया था। आयोग ने कैसे काम किया और कैसे नौ साल बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को दी और कितने करोड़ रुपये खर्च किए, यह तो अलग बहस का मुद्दा है। लेकिन इसकी रिपोर्ट पर कोई भी सरकार गंभीर नहीं रही। वरिष्ठ अधिवक्ता नदीम उद्दीन ने सूचना अधिकार के तहत दीक्षित आयोग की रिपोर्ट हासिल की।
इस रिपोर्ट में अन्य स्थानों के साथ ही गैरसैंण साइट-एक (चौखुटिया) और गैरसैंण साइट-दो (मरूर) का पूरा अध्ययन किया गया है। दोनों ही स्थानों को आयोग ने राजधानी के लिए कतई भी उपयुक्त नहीं माना है। दोनों की स्थानों पर कुदरती खामियों की भरमार है तो कुछ खामियों को सरकारें दूर कर सकती है। लेकिन न तो भाजपा और न ही कांग्रेस की सरकारों ने इस दिशा में कोई काम नहीं किया। हां, दोनों की सियासी दलों ने इस मुद्दे पर जमकर सियासत की और अब भी कर रही हैं। अहम सवाल यह है कि जब तक गैरसैंण की कुदरती खामियों को हल नहीं तलाशा जाता उस वक्त तक गैरसैंण को राजधानी बनाने की बात करके का किस सरकार को अधिकार है। अब वक्त आ गया है कि सूबे की अवाम भी इन दोनों सियासी दलों की असलियत को समझे और उसी के आधार पर इन सियासी दलों को नसीहत भी दे।

गैरसैंण साइट-एक (चौखुटिया)
खूबियां—-
राजधानी बनाने पर कम लोगों को विस्थापित करना होगा।
गैरसैंण के पक्ष में जनता की राय है।
भोगौलिक रूप से राज्य के मध्य स्थित है।
खामियां
रेलवे, बस और हवाई सुविधाओं के विस्तार की गुंजाइश नहीं हैं।
रेलवे, बस और हवाई सुविधाएं बेहद कम हैं।
राष्ट्रीय राजधानी पहुंचना बहुत दुष्कर है।
वर्तमान और भविष्य के लिहाज से पर्याप्त जमीन नहीं है।
पर्याप्त मात्रा में पेयजल भी उपलब्ध है।
अवस्थापना सुविधाओं के विकास की दृष्टि से जमीन उचित नहीं है।
भू-गर्भीय फाल्ट के बेहद नजदीक है और भूंकप के नजरिए से गंभीर सेसमिक जोन में है।
अति वृष्टि, बर्फबारी और भूंकप की आशंका तेज है।
बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क, स्वास्थ्य और एजुकेशन की कोई सुविधा नहीं है।
अर्जिता बंसल ने लोगों की राय ली तो लोग इसके पक्ष में नहीं है।
आबादी के लिहाज से यह स्थान राज्य के मध्य में नहीं आता है।

गैरसैँण साइट-दो (मरूर)
खूबियां—-
राजधानी बनाने पर कम लोगों को विस्थापित करना होगा।
गैरसैंण के पक्ष में जनता की राय है।
भोगौलिक रूप से राज्य के मध्य स्थित है।

खामियां
रेलवे, बस और हवाई सुविधाओं के विस्तार की गुंजाइश नहीं हैं।
रेलवे, बस और हवाई सुविधाएं बेहद कम हैं।
राष्ट्रीय राजधानी पहुंचना बहुत दुष्कर है।
वर्तमान और भविष्य के लिहाज से पर्याप्त जमीन नहीं है।
पर्याप्त मात्रा में पेयजल भी उपलब्ध है।
अवस्थापना सुविधाओं के विकास की दृष्टि से जमीन उचित नहीं है।
भू-गर्भीय फाल्ट के बेहद नजदीक है और भूंकप के नजरिए से गंभीर सेसमिक जोन में है।
अति वृष्टि, बर्फबारी और भूंकप की आशंका तेज है।
बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क, स्वास्थ्य और एजुकेशन की कोई सुविधा नहीं है।
अर्जिता बंसल ने लोगों की राय ली तो लोग इसके पक्ष में नहीं है।
आबादी के लिहाज से यह स्थान राज्य के मध्य में नहीं आता है।
ईको लाजिकल के नजरिए से भी ठीक नहीं है।
अंतर राष्ट्रीय सीमा के बेहद नजदीक है।

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