बालपन में लौट गये राजनेता!

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अपने इलाके में खुद को कार्यक्रम में न बुलाने पर राजनेताओं को नहीं आने देते ‘नेताजी’
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि सरकार में शामिल एक बडा राजनेता सरकार बनने के बाद से ही बालपन में लौट आया है? नेताजी के बालपन की तरह जिद करने से सरकार में शामिल कुछ राजनेता काफी हैरान व परेशान दिखाई देते हैं क्योंकि जब भी राजनेता के इलाके में ंिकसी बडे कार्यक्रम के आयोजन में प्रदेश के कुछ पॉवरफुल राजनेताओं को बुलाया जाता है और नेताजी को कार्यक्रम से दूर रखा जाता है तो नेताजी बालपन में लौटकर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि को साफ संदेश दे देते हैं कि वह उनके इलाके में हो रहे कार्यक्रम में नहीं आयेंगे। इस पर ऐनमौके पर मुख्य अतिथि कार्यक्रम से दूरी बनाकर अपने आपको पीछे कर लेते हैं जिसके चलते कई बार बडे-बडे कार्यक्रमों में नेताजी की जिद के आगे मुख्य अतिथि का चयन करना भी बडी महाभारत हो रहा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेताजी आवाम के बीच किस तरह से हर कार्यक्रम मंे अपने आपको शामिल करने के लिए बालपन की तरह जिद्दी हो रखे हैं?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के निर्माण के बाद से आज तक भाजपा व कांग्रेस की सरकारें सत्ता पर राज करती रही हैं इस बार भाजपा को विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला तो उसके एक छोटे से राजनेता को पार्टी के अन्दर बडा वजूद मिल गया जिसके चलते यह नेताजी अपने आपको प्रदेश का सबसे पॉवरफुल नेता साबित करने के लिए कहीं भी अपनी हेकडी दिखाते हुए नजर आ जायेंगे। राज्य के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि नेताजी जिस इलाके के रहने वाले हैं वहां वह अपने आपको हर कार्यक्रम में उपस्थित रहने का खाका बनाये हुए हैं और उन्होंने साफ संदेश दे रखा है कि अगर उन्हें किसी भी कार्यक्रम में शामिल न किया गया तोेेे सरकार का कोई भी पॉवरफुल नेता उनके इलाके में हो रहे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकता। नेताजी के इलाके के लोग आजकल काफी खौफजदा नजर आ रहे हैं और उनके लिए हर कार्यक्रम में नेताजी को बुलाना एक बडी मजबूरी हो गया है क्योंकि अगर किसी भी छोटे या बडे कार्यक्रम में नेताजी को न बुलाकर सरकार के किसी पॉवरफुल नेता को बुलाने का निमंत्रण दिया गया तो इसका पता चलते ही नेताजी वीआईपी को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे देते हैं कि वह किसी भी कीमत पर उनके इलाके में हो रहे कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। यही कारण रहा कि चंद कार्यक्रमों में जब पॉवरफुल नेता को बुलाया गया और बालपन वाले नेताजी को कार्यक्रम से दूर रखा गया तो उस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने आने से हमेशा परहेज किया जिसके चलते बिना मुख्य अतिथि के ही कुछ कार्यक्रमों को पूरा किया गया। एक राजनेता का कहना था कि नेताजी बालपन की तरह जिद्द करते हैं कि उनके इलाके में वह मुख्य अतिथि न बने। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नेताजी को छपास का रोग इतना क्यों लग गया है कि वह मीडिया में छाने को लेकर हर कार्यक्रम में अप्रोक्ष रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की जिद्द में अड जाते हैं। अब तो इन नेताजी को लेकर राज्य के गलियारों में शोर मचना शुरू हो गया है कि पॉवर में छोटा सा राजनेता भी किस तरह से अपने आपको राज्य का भाग्य विधाता समझने लग जाता है?

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