वन विभाग में बडे खेल की आशंका?

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जायका में कौन करायेगा एसआईटी की जांच?
सुनो मान्यवर सुनो,
वन विभाग से जुड़े आईएफएस अधिकारियों ने जिका जायका की सॉफ्ट लोन धनराशि को खुर्द बुर्द किया उसका जिक्र हम कल कर चुके है.. बड़ा सवाल ये है कि जापान इंडिया कॉपरेशन एजेंसी का ये पैसा क्या चुकाया नही जाएगा?इसी तरह का लोन गुजरात की बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए दिया गया,अब सोचिये सरकार वहां बुलेट ट्रेन चलाने के बजाय वो पैसा रेलवे स्टेशन की कैंटीन बनाने में लगादे तो भारत की साख पर कितना धब्बा लगेगा,आंकड़ो की बाजीगरी करके उत्तराखंड जिका का पोल यदि जापान में जाकर खोल दे तो क्या छवि बनेगी? आवाम आपको जानकारी देना चाह रहे हैं कि जापान के तमाम विश्व विद्यालयो के छात्र उत्तराखंड में जलवायु और पर्यावरण में शोध कर रहे है । यदि उनके जरिये ये फर्जी वाड़े जापान को पता चल गए तो क्या होगा,अधिकारी ट्रांसफर हो जायेगे,,मंत्री जी के विभाग बदल दिये जायेंगे घोटाले पर कम्बल डाल दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम को कई साल पहले उत्तराखंड सरकार ने ब्लैक लिस्ट में डाल दिया उसी निगम को जायका के काम दे दिए,है न कमाल की बात ऐसी क्या वजह थी कि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रमुख सचिव राकेश शर्मा इसी निगम को ठेके देने की सिफारिश करते रहे। ये सारे आपकी सरकार के अधिकारियों के संज्ञान में भी है,लेखा परीक्षा दल की रिपोर्ट में भी सामने आ चुके है, जायका का पैसा ,हर्बल और अन्य जरूरी वानिकी के लिए पांच सौ वन पंचायतों के लिए आया था,तो फिर ये पैसा आलीशान इमारतों में क्यों लगा दिया गया?,वन मंत्री हरक सिंह रावत ने जायका टीम ने हाल ही मैं जापान का दौरा तो कर लिया,पर वन मंत्री ने अभी तक वन पंचायतों की जमीनी हकीकत को एक बार भी जानने की जहमत नही उठायी, मान्यवर महोदय,जरा एक बार ये पूछिये कि तितलिखेत में टिहरी में दो स्थानों पर,इको टूरिजम सेंटर क्यों और किसके लिए बनाए जा रहे है,जबकि वन विभाग खुद कहता है कि उसकी इको टूरिजम की अभी तक नियमावली ही नही बनी और वन विभाग कोई व्यापार नही करता तो फिर ये इमारते क्यों बन रही है? और बताते चले कि नॉन टिम्बर प्रोडक्ट्स म्यूजियम और ट्रेनिंग सेंटर जायका के पैसों से बना रहे है और बना कौन रहा है उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम, सूत्र बताते है कि निगम ने वक्त रहते ये प्रोजेक्ट भी पूरे नही किये और सितंबर महीने में आपकी सरकार के दो बड़े जिम्मेदार अधिकारियों ने वन विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिख कर निगम पर अर्थ दंड लगा कर वसूली करने को कहा है ये वसूली की रकम ही पचास करोड़ से ज्यादा है,दिलचस्प बात देखिए मान्यवर महोदय, जायका के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सीधे शासन को रिपोर्ट करते है, वन विभाग के पीसीसीएफ राजेन्द्र महाजन जायका के भी पीसीसीएफ है ,जवाब तलब उनका किया जा रहा है प्रोजेक्ट डायरेक्टर का नही किया जारहा जबकि जायका की सारी जिम्मेदारी चीफ प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर की है नकि पीसीसीएफ चीफ की। वन विभाग को अब राज्यनिर्माण निगम से तम्माम मदो में वसूली के लिए कहा जारहा है किसलिए?यानी कोई बड़ा घप्पला सामने आगया है। मान्यवर महोदय,हम तो आपको सजग ही कर रहे है कि एक एस आई टी इस जायका पर भी बना दी जाए जो सच है सामने आजायेगा,क्योंकि ये विषय अंतर राष्ट्रीय स्तर पर साख बचाने का है बाकि आप जाने क्योंकि मामला तो खुल गया है।

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